Guru Purnima 2026: गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति में गुरु, आचार्य और ज्ञान परंपरा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है। यह दिन महर्षि वेदव्यास की जयंती दिन मनाया जाता है, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस अवसर पर गुरु की स्तुति में संस्कृत श्लोकों का पाठ करने की परंपरा सदियों पुरानी है। आज हम आपको कुछ श्लोक बताएंगे जिनका उच्चारण गुरु पूर्णिमा के दिन करना चाहिए। ये श्लोक श्रद्धा व्यक्त करने के लिए नहीं हैं, बल्कि जीवन में ज्ञान, विवेक और आत्मिक उन्नति का संदेश भी देते हैं। आइए जानते हैं गुरु पूर्णिमा पर बोले जाने वाले 10 प्रसिद्ध संस्कृत श्लोक (Guru Purnima Sanskrit Shlokas) और उनका स्पष्ट हिंदी अर्थ...
गुरु पूर्णिमा पर पढ़ें ये संस्कृत श्लोक
गुरु पूर्णिमा के लिए खास संस्कृत श्लोक - Guru Purnima Sanskrit Shlokas
1.
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
हिंदी अर्थ - गुरु ही ब्रह्मा हैं जो ज्ञान का सृजन करते हैं, गुरु ही विष्णु हैं जो जीवन का पालन करते हैं और गुरु ही महेश्वर हैं जो अज्ञान का नाश करते हैं। ऐसे परम ब्रह्म स्वरूप गुरु को प्रणाम है।
2.
अखण्डमण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम्।
तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
हिंदी अर्थ- जो गुरु इस सम्पूर्ण चराचर जगत में व्याप्त परम सत्य का बोध कराते हैं, उन्हें मेरा प्रणाम।
3.
अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया।
चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
हिंदी अर्थ - जो गुरु अज्ञान रूपी अंधकार में डूबे हुए शिष्य की आंखों में ज्ञान का अंजन लगाकर उसे सत्य का दर्शन कराते हैं, उन्हें प्रणाम।
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4.
ध्यानमूलं गुरोर्मूर्ति: पूजामूलं गुरोः पदम्।
मन्त्रमूलं गुरोर्वाक्यं मोक्षमूलं गुरोः कृपा॥
हिंदी अर्थ- गुरु का स्वरूप ही ध्यान का आधार है, उनके चरण पूजा का आधार हैं। गुरु के वचन ही मंत्र हैं और उनकी कृपा ही मोक्ष का मार्ग है।
5.
न गुरोरधिकं तत्त्वं न गुरोरधिकं तपः।
तत्त्वज्ञानात् परं नास्ति तस्मै श्रीगुरवे नमः॥
हिंदी अर्थ- गुरु से बढ़कर कोई तत्व नहीं, गुरु से बढ़कर कोई तप नहीं। आत्मज्ञान से श्रेष्ठ कुछ भी नहीं, इसलिए गुरु को प्रणाम।
6.
यस्य देवे परा भक्तिः यथा देवे तथा गुरौ।
तस्यैते कथिता ह्यर्थाः प्रकाशन्ते महात्मनः॥
हिंदी अर्थ- जिस व्यक्ति की भगवान में जैसी श्रद्धा होती है, वैसी ही श्रद्धा यदि गुरु में भी हो, उसी के सामने शास्त्रों का वास्तविक ज्ञान प्रकट होता है।
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7.
तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया।
उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः॥
हिंदी अर्थ- ज्ञान प्राप्त करने के लिए विनम्रता, सेवा और उचित प्रश्न करने का मार्ग अपनाओ। तत्वदर्शी गुरु तुम्हें सच्चा ज्ञान प्रदान करेंगे।
8.
आचार्यात् पादमादत्ते पादं शिष्यः स्वमेधया।
पादं सब्रह्मचारिभ्यः पादं कालक्रमेण च॥
हिंदी अर्थ- विद्यार्थी एक चौथाई ज्ञान गुरु से, एक चौथाई अपनी बुद्धि से, एक चौथाई सहपाठियों से और शेष समय के अनुभव से प्राप्त करता है।
9.
विद्या ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्।
पात्रत्वात् धनमाप्नोति धनात् धर्मं ततः सुखम्॥
हिंदी अर्थ- विद्या से विनम्रता आती है, विनम्रता से योग्य बनते हैं, योग्यता से धन मिलता है, धन से धर्म और धर्म से सुख प्राप्त होता है।
10.
सह नाववतु।
सह नौ भुनक्तु।
सह वीर्यं करवावहै।
तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥
हिंदी अर्थ- हे परमात्मा! गुरु और शिष्य दोनों की रक्षा करें, दोनों का पालन करें, दोनों मिलकर पराक्रमपूर्वक अध्ययन करें। हमारा ज्ञान तेजस्वी बने और हमारे बीच कभी द्वेष न हो।
गुरु पूर्णिमा पर श्लोक उच्चारण का महत्व
गुरु वंदना के ये श्लोक केवल धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा का सार भी हैं। इनमें गुरु को ईश्वर का स्वरूप, ज्ञान का स्रोत और आत्मिक उन्नति का मार्गदर्शक माना गया है। शास्त्रों के अनुसार गुरु की कृपा से ही शिष्य में विवेक, विनम्रता और सत्य को पहचानने की क्षमता विकसित होती है। इसलिए गुरु पूर्णिमा के दिन इन श्लोकों का श्रद्धापूर्वक पाठ विशेष फलदायी माना गया है।
