Guru Pradosh Vrat Katha: गुरु प्रदोष व्रत कथा, पढ़ने मात्र से होती है धन संपत्ति में वृद्धि

Guru Pradosh Vrat Katha (गुरु प्रदोष व्रत कथा): प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। जब ये व्रत गुरुवार को पड़ता है तो इसे गुरु प्रदोष व्रत कहते हैं। ये व्रत समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला माना गया है। यहां से आप गुरु प्रदोष व्रत की कथा पढ़ सकते हैं।

Guru Pradosh Vrat Katha (गुरु प्रदोष व्रत कथा): मार्च में प्रदोष व्रत 27 मार्च को है। ये गुरु प्रदोष व्रत है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। साथ ही प्रदोष के दिन व्रत भी रखा जाता है। कहते हैं कि ऐसा करने से भोलेनाथ के साथ माता पार्वती का भी आशीर्वाद मिलता है। अगर आप प्रदोष व्रत रखते हैं तो आपको पता होना चाहिए कि बिना कथा के ये व्रत अधूरा माना जाता है। यहां से आप प्रदोष व्रत की कथा पढ़ सकते हैं-

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Guru Pradosh Vrat Katha In Hindi (गुरुवार प्रदोष व्रत कथा)-

एक बार इन्द्र और वृत्रासुर में घनघोर युद्ध हुआ। उस समय देवताओं ने दैत्य सेना को पराजित कर नष्ट-भ्रष्ट कर दिया। अपना विनाश देख वृत्रासुर अत्यंत क्रोधित हो स्वयं युद्ध के लिये उद्यत हुआ। मायावी असुर ने आसुरी माया से भयंकर विकराल रूप धारण किया। उसके स्वरूप को देख इन्द्रादिक सब देवताओं ने इन्द्र के परामर्श से परम गुरु बृहस्पति जी का आवाह्न किया, गुरु तत्काल आकर कहने लगे-हे देवेन्द्र! अब तुम वृत्रासुर की कथा ध्यान मग्न होकर सुनो-वृत्रासुर प्रथम बड़ा तपस्वी कर्मनिष्ठ था, इसने गन्धमादन पर्वत पर उग्र तप करके शिवजी को प्रसन्न किया था। पूर्व समय में यह चित्ररथ नाम का राजा था, तुम्हारे समीप जो सुरम्य वन है वह इसी का राज्य था, अब साधु प्रवृत्ति विचारवान् महात्मा उस वन में आनन्द लेते हैं। भगवान के दर्शन की अनुपम भूमि है। एक समय चित्ररथ स्वेच्छा से कैलाश पर्वत पर चला गया।

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