Durga Visarjan 2023 Mantra, Puja Vidhi: दुर्गा विसर्जन आश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को किया जाता है। इस दिन विजयादशमी (Vijayadashami 2023) और दशहरा (Dussehra 2023) का त्योहार भी मनाया जाता है। इस साल दुर्गा विसर्जन का मुहूर्त 24 अक्टूबर 2023 की सुबह 6 बजकर 27 मिनट से 8 बजकर 42 मिनट तक रहेगा (Durga Visarjan Muhurat 2023)। वहीं दशमी तिथि की समाप्ति 24 अक्टूबर की दोपहर 3 बजकर 14 मिनट पर होगी। भक्तगण इस शुभ मुहूर्त में दुर्गा विसर्जन मंत्र (गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठे स्वस्थानं परमेश्वरि। पूजाराधनकाले च पुनरागमनाय च।।) का जाप करते हुए माता दुर्गा की प्रतिमा को विसर्जित करेंगे (Maa Durga Visarjan Mantra)। जानिए दुर्गा विसर्जन की विधि, मंत्र और मुहूर्त।
Durga Visarjan 2023 Mantra And Muhurat
Durga Visarjan 2023 Date And Time (दुर्गा विसर्जन 2023 तारीख और मुहूर्त)
दुर्गा विसर्जन कब है 2023- 24 अक्टूबर 2023, मंगलवार
दुर्गा विसर्जन मुहूर्त 2023- 06:27 AM से 08:42 AM
दशमी तिथि प्रारम्भ- 23 अक्टूबर 2023 को 05:44 PM बजे
दशमी तिथि समाप्त- 24 अक्टूबर 2023 को 03:14 PM बजे
Durga Visarjan Mantra (दुर्गा विसर्जन मंत्र)
गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठे स्वस्थानं परमेश्वरि।
पूजाराधनकाले च पुनरागमनाय च।।
Durga Visarjan Puja Vidhi (दुर्गा विसर्जन पूजा विधि)
- कलश के पवित्र जल को पूरे घर में छिड़कर अपने परिवार को इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करने को कहें|
- इसके बाद घट में रखे सिक्कों को अपनी तिजोरी में रख दें और सुपारी को परिवार में प्रसाद के रूप में बांट दें|
- फिर माता की चौकी को घर के मंदिर में उचित स्थान पर रख दें|
- माता को चढ़ाई गई शृंगार की सामग्री और साड़ी घर की महिलाएं प्रयोग कर सकती हैं|
- फिर गणेश भगवान की प्रतिमा को मंदिर में रख दें|
- चौकी और घट के ढक्कन पर रखे चावल पक्षियों को खिला दें।
- फिर मां दुर्गा की प्रतिमा, घट में बोए गए जौ और सभी पूजा सामग्री को किसी नदी, सरोवर के जल में विसर्जित कर दें|
- अगर आपने ईको फ्रेंडली मूर्ति इस्तेमाल की है तो उसे घर पर ही इसे साफ जल में विसर्जित कर दें।
- इसके बाद एक नारियल, दक्षिणा और चौकी के कपड़े को ब्राह्मण को दान कर दें|
- इस तरह से दुर्गा विसर्जन की विधि संपन्न करें।
दुर्गा विसर्जन के दिन किए जाने वाले आयोजन
दुर्गा विसर्जन के दिन शमी के पेड़ की पूजा की जाती है। इसके अलावा बंगाली समुदाय के लोग इस दिन सिंदूर खेला मनाते हैं। इस दौरान विवाहित महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं। ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि के आखिरी दिन पर दुर्गा विसर्जन के साथ ही माता रानी भगवान शिव के पास कैलाश पर्वत पर चली जाती हैं। विसर्जन के दौरान एक पोटली में मां दुर्गा के लिए श्रृंगार का सामान और खाने-पीने की चीजें भी रखी जाती है।
