दिवाली पर सिर्फ घर नहीं, अपने भीतर भी जलाएं दीया; सद्गुरु से जानें अंदर के अंधेरे को कैसे मिटाएं

सद्गुरु दिवाली को स्पष्टता यानी क्लैरिटी का त्योहार मानते हैं। उनके अनुसार रोशनी सिर्फ अंधेरा दूर करने का साधन नहीं है। यह जीवन को साफ नजर से देखने का प्रतीक भी है।

दिवाली का त्योहार आ गया है। लोगों के घर दीये से सज चुके हैं। गलियां रोशन हो चुकी हैं। लेकिन क्या दिवाली की रोशनी सिर्फ हमारे घरों और बाजारों के लिए है? जाने-माने आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु के मुताबिक, इस त्योहार का असली मतलब इससे कहीं आगे है। बाहर जलने वाला हर दीया हमें अपने भीतर झांकने की याद दिलाता है। सवाल यह है कि हमारे अंदर कितना उजाला है?

Sadhguru on Diwali

दिवाली पर सिर्फ घर नहीं, अपने भीतर भी जलाएं दीया; सद्गुरु बताते हैं अंदर के अंधेरे को कैसे मिटाएं (Photo: Sadhguru fb)

सद्गुरु दिवाली को स्पष्टता यानी क्लैरिटी का त्योहार मानते हैं। उनके अनुसार रोशनी सिर्फ अंधेरा दूर करने का साधन नहीं है। यह जीवन को साफ नजर से देखने का प्रतीक भी है। जब सोच में उलझन होती है, तो ज्ञान और आत्मविश्वास होने के बावजूद इंसान गलत फैसले ले सकता है। इसलिए जरूरी है कि बाहर की रोशनी के साथ भीतर की उलझनों पर भी ध्यान दिया जाए।

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