Dhanteras 2026 Business Puja Muhurat : धनतेरस का त्योहार व्यापारियों के लिए भी बेहद खास माना जाता है। इस दिन दुकानदार और कारोबारी अपने प्रतिष्ठान की साफ-सफाई करने के साथ भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, कुबेर देव और भगवान धन्वंतरि की पूजा करते हैं। मान्यता है कि धनतेरस पर विधि-विधान से पूजा करने से व्यापार में बरकत आती है और कारोबार में तरक्की के नए रास्ते खुलते हैं। कई व्यापारी इस दिन नए बही-खाते और अकाउंट रजिस्टर की भी पूजा करते हैं, ताकि आने वाला साल आर्थिक रूप से अच्छा रहे। ऐसे में आइए जानते हैं धनतेरस पर व्यापारी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है और इस दिन दुकान या प्रतिष्ठान में पूजा कैसे करनी चाहिए।
धनतेरस पर व्यापारी पूजा का क्या मुहूर्त है
धनतेरस 2026 पर व्यापारी पूजा का शुभ मुहूर्त
धनतेरस पर व्यापारियों के लिए पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त शाम 6 बजकर 01 मिनट से रात 7 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। इस दौरान वृषभ लग्न रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, वृषभ लग्न को धन और स्थिरता देने वाला माना जाता है। ऐसे में इस लग्न में पूजा करना व्यापार और आर्थिक समृद्धि के लिए शुभ माना जाता है।
- व्यापारी पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त: शाम 6:01 बजे से रात 7:58 बजे तक
- प्रदोष काल: शाम 5:31 बजे से रात 8:08 बजे तक
व्यापारी इस अवधि में अपने प्रतिष्ठान में पूजा कर सकते हैं। पूजा से पहले दुकान की साफ-सफाई और सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर लेना अच्छा रहेगा।
धनतेरस पर व्यापारी पूजा की विधि
धनतेरस के दिन व्यापारी अपने दुकान, ऑफिस या प्रतिष्ठान में भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, कुबेर देव और भगवान धन्वंतरि की पूजा करते हैं। पूजा के दौरान नए बही-खातों और कारोबार में इस्तेमाल होने वाली जरूरी चीजों को भी शामिल किया जाता है। आइए जानते हैं पूजा की पूरी विधि किया है।
धनतेरस के दिन सबसे पहले अपनी दुकान या प्रतिष्ठान की अच्छी तरह साफ-सफाई करें। इसके बाद गंगाजल छिड़ककर व्यापार स्थल को पवित्र करें। दुकान के प्रवेश द्वार पर रंगोली बनाएं और दरवाजे के दोनों तरफ घी या तेल के दीपक जलाएं। मान्यता है कि साफ-सुथरे स्थान पर मां लक्ष्मी का आगमन होता है। इसके बाद दुकान या प्रतिष्ठान के ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में पूजा की चौकी स्थापित करें। चौकी पर लाल या पीले रंग का साफ कपड़ा बिछाएं। इसके बाद पूजा की सभी सामग्री व्यवस्थित तरीके से रख दें। अगर दुकान में अलग से पूजा स्थल है, तो वहां भी चौकी स्थापित की जा सकती है।
भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और कुबेर देव को विराजमान करें
अब चौकी पर भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, कुबेर देव और भगवान धन्वंतरि की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। अगर किसी देवी-देवता की मूर्ति या तस्वीर उपलब्ध नहीं है, तो सुपारी पर कलावा बांधकर उन्हें प्रतीक रूप में विराजमान कर सकते हैं। इसके बाद सभी देवी-देवताओं का ध्यान करें और पूजा का संकल्प लें।
नए बही-खातों और अकाउंट रजिस्टर की पूजा करें
धनतेरस पर व्यापारी नए बही-खाते, अकाउंट रजिस्टर और लेजर बुक खरीदते हैं। कई कारोबारी डिजिटल अकाउंटिंग से जुड़े उपकरणों और रिकॉर्ड को भी पूजा में शामिल करते हैं। नए बही-खातों को पूजा की चौकी पर रखें। उन पर रोली से स्वास्तिक बनाएं और अक्षत, फूल तथा कलावा अर्पित करें। मान्यता है कि इससे कारोबार में बरकत बनी रहती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
देवी-देवताओं को रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें
पूजा की शुरुआत सबसे पहले भगवान गणेश के पूजन से करें। उन्हें रोली, अक्षत, फूल और दूर्वा अर्पित करें। इसके बाद माता लक्ष्मी, कुबेर देव और भगवान धन्वंतरि को रोली, अक्षत, फूल, माला और कलावा चढ़ाएं। इस दिन खरीदी गई नई वस्तुएं जैसे पीतल या तांबे के बर्तन, सोने-चांदी के सिक्के और झाड़ू भी पूजा के स्थान पर रख सकते हैं। इन सभी वस्तुओं पर रोली और अक्षत लगाकर उनका पूजन करें।
धूप-दीप जलाकर भोग लगाएं
अब पूजा स्थल पर धूप और दीप जलाएं। घी और सरसों के तेल का दीपक जलाकर देवी-देवताओं के सामने रखें। इसके बाद फल, मिठाई, गुड़ और खड़े धनिये का भोग लगाएं। व्यापारी अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार अन्य सात्विक भोग भी अर्पित कर सकते हैं।
माता लक्ष्मी, गणेश जी और कुबेर देव की आरती करें
पूजा के अंत में माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देव की आरती करें। इसके बाद श्रद्धापूर्वक मंत्रों का जाप करें। माता लक्ष्मी की कृपा के लिए ‘ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीलक्ष्म्यै नमः’ इस मंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके अलावा भगवान धन्वंतरि का ध्यान और उनके मंत्र का जाप भी कर सकते हैं। अंत में हाथ जोड़कर प्रार्थना करें कि कारोबार में उन्नति हो, आर्थिक स्थिति मजबूत बने और परिवार तथा कर्मचारियों के जीवन में सुख-शांति बनी रहे।
धनतेरस पर व्यापारी पूजा क्यों है खास
धनतेरस पर व्यापारी पूजा करने की परंपरा सुख-समृद्धि और कारोबार में बरकत की कामना से जुड़ी है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा विघ्नों को दूर करने के लिए, माता लक्ष्मी की पूजा धन-वैभव के लिए और कुबेर देव की पूजा आर्थिक समृद्धि के लिए की जाती है। वहीं, भगवान धन्वंतरि की पूजा अच्छे स्वास्थ्य और निरोगी जीवन की कामना से होती है। नए बही-खातों की पूजा करके व्यापारी अपने कारोबार के लिए नई शुरुआत और आने वाले समय में बेहतर आर्थिक स्थिति की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा शुभ फलदायी मानी जाती है।
