Dhanteras 2025 Pujan Shubh Muhurat: आज धनतेरस की खरीदारी के लिए बचे हैं बस इतने घंटे, जानें कितने बजे तक खरीद सकते हैं सोना? आज शॉपिंग का शुभ मुहूर्त
धनतेरस की पूजा का शुभ मुहूर्त 2025-
शाम 7 बजकर 15 मिनट से लेकर रात्रि 8 बजकर 20 मिनट तक
धनतेरस की खरीदारी के 3 शुभ मुहूर्त 2025-
- पहला शुभ मुहूर्त शाम 06:11 PM से लेकर रात 08:41 PM तक है। सोने-चांदी के आभूषण खरीदने के लिए इस मुहूर्त को बहुत अच्छा बताया गया है।
- दूसरा शुभ मुहूर्त यानी लाभ काल, चौघड़िया मुहूर्त शाम 05:48 PM से 07:23 PM तक है। इस मुहूर्त में बर्तन और घर के सामान खरीदे जा सकते हैं, ये शुभ होगा।
- तीसरा शुभ मुहूर्त यानी शुभ काल चौघड़िया मुहूर्त रात 08:57 PM से 10:32 PM तक है। इस दौरान झाड़ू, कुबेर यंत्र, सूखा धनिया खरीद सकते हैं।
मां लक्ष्मी मंत्र-
- ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा।
- ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम:।
- ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मी-नारायणाभ्यां नम:।
भगवान कुबेर के मंत्र-
- ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः।
- ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः।
कुबेर जी की आरती-
ऊं जय यक्ष कुबेर हरे,स्वामी जै यक्ष जै यक्ष कुबेर हर
शरण पड़े भगतों के,भण्डार कुबेर भरे॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे
शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े,स्वामी भक्त कुबेर बड़े।
दैत्य दानव मानव से,कई-कई युद्ध लड़े॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे॥
स्वर्ण सिंहासन बैठे,सिर पर छत्र फिरे, स्वामी सिर पर छत्र फिरे।
योगिनी मंगल गावैं,सब जय जय कार करैं॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे॥
गदा त्रिशूल हाथ में,शस्त्र बहुत धरे, स्वामी शस्त्र बहुत धरे।
दुख भय संकट मोचन,धनुष टंकार करें॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे॥
भाँति भाँति के व्यंजन बहुत बने,स्वामी व्यंजन बहुत बने।
मोहन भोग लगावैं,साथ में उड़द चने॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे॥
बल बुद्धि विद्या दाता,हम तेरी शरण पड़े, स्वामी हम तेरी शरण पड़े
अपने भक्त जनों के,सारे काम संवारे॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे॥
मुकुट मणी की शोभा,मोतियन हार गले, स्वामी मोतियन हार गले।
अगर कपूर की बाती,घी की जोत जले॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे॥
यक्ष कुबेर जी की आरती,जो कोई नर गावे, स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत प्रेमपाल स्वामी,मनवांछित फल पावे॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे॥
॥ इति श्री कुबेर आरती ॥
भगवान धन्वंतरि की आरती (Bhagwan Dhanvantari Aarti)
जय धन्वंतरि देवा, जय धन्वंतरि जी देवा
जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा।जय
तुम समुद्र से निकले, अमृत कलश लिए
देवासुर के संकट आकर दूर किए।
आयुर्वेद बनाया, जग में फैलाया
सदा स्वस्थ रहने का, साधन बतलाया।
भुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी
आयुर्वेद वनस्पति से शोभा भारी।
तुम को जो नित ध्यावे, रोग नहीं आवे
असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे।
हाथ जोड़कर प्रभुजी, दास खड़ा तेरा
वैद्य-समाज तुम्हारे चरणों का घेरा।
धन्वंतरिजी की आरती जो कोई नर गावे
रोग-शोक न आए, सुख-समृद्धि पावे।
धनतेरस पर धनिया क्यों खरीदा जाता है?
धनतेरस पर बहुत से लोग धनिया के बीज खरीदकर घर में रखते हैं। इसे सौभाग्य व सम्पन्नता का प्रतीक माना जाता है। दीपावली पर लक्ष्मी पूजा की थाली में इसे रखते हैं और बाद में इनको क्यारी,गमलों,खेतों आदि में बोया जाता है।धनतेरस पर किन देवी-देवताओं की पूजा होती है?
धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि, लक्ष्मी जी, गणेश जी, कुबेर जी की पूजा की जाती है। मान्यताओं अनुसार धनतेरस पर इन देवी-देवताओं की पूजा से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
धनतेरस पर धन्वंतरि की पूजा क्यों होती है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक माह की त्रयोदशी तिथि को धन्वंतरि भगवान का अवतरण हुआ था इसलिए धनतेरस पर इनकी पूजा की जाती है। आपको बता दें कि धन्वंतरि देव आयुर्वेद और चिकित्सा के जनक माने जाते हैं।कुबेर देव मूल मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं ऐं कुबेरा लक्ष्मीयै कमला-धारिण्यै धन-आक्राशिन्यै स्वाक्या धनतेरस पर शंख खरीद सकते हैं?
धनतेरस के दिन आप शंख खरीद सकते हैं। शंख खरीदने से आपको शुभ फल प्राप्त होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।कुबेर मंत्र (Kuber Mantra)
- ऊँ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं में देहि दापय।
कार्तिक मास त्रयोदशी तिथि
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 18 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 20 मिनट से शुरू होगी वहीं इसकी समाप्ति 19 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 53 मिनट पर होगी।कुबेर जी की आरती लिखित में (Kuber Ji Ki Aarti)
ऊं जय यक्ष कुबेर हरे,स्वामी जै यक्ष जै यक्ष कुबेर हरशरण पड़े भगतों के,भण्डार कुबेर भरे॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे
शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े,स्वामी भक्त कुबेर बड़े।
दैत्य दानव मानव से,कई-कई युद्ध लड़े॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे॥
स्वर्ण सिंहासन बैठे,सिर पर छत्र फिरे, स्वामी सिर पर छत्र फिरे।
योगिनी मंगल गावैं,सब जय जय कार करैं॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे॥
गदा त्रिशूल हाथ में,शस्त्र बहुत धरे, स्वामी शस्त्र बहुत धरे।
दुख भय संकट मोचन,धनुष टंकार करें॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे॥
भाँति भाँति के व्यंजन बहुत बने,स्वामी व्यंजन बहुत बने।
मोहन भोग लगावैं,साथ में उड़द चने॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे॥
बल बुद्धि विद्या दाता,हम तेरी शरण पड़े, स्वामी हम तेरी शरण पड़े
अपने भक्त जनों के,सारे काम संवारे॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे॥
मुकुट मणी की शोभा,मोतियन हार गले, स्वामी मोतियन हार गले।
अगर कपूर की बाती,घी की जोत जले॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे॥
यक्ष कुबेर जी की आरती,जो कोई नर गावे, स्वामी जो कोई नर गावे।
कहत प्रेमपाल स्वामी,मनवांछित फल पावे॥
ऊं जै यक्ष कुबेर हरे॥
॥ इति श्री कुबेर आरती ॥
लक्ष्मी पूजन में न करें ये 3 गलतियां-
- लक्ष्मी पूजन में आपको सफेद फूल अर्पित नहीं करने चाहिए।
- ऐसी चीजों का भोग माता को नहीं लगाना चाहिए जिनमें लहसुन-प्याज हों।
- पूजा स्थल के पास इस दिन टूटी-फूटी चीजों को रखने से भी आपको बचना चाहिए।
धनतेरस के दिन किस दिशा में यम दीपक जलाना चाहिए?
धनतेरस के दिन यम का दीपक आपको घर की दक्षिण दिशा में जलाना चाहिए।। माना जाता है कि यम का दीपक जलाने से घर में सुख-समृद्धि और संपन्नता आती है।धनतेरस पर क्या करना चाहिए? (What To Do On Dhanteras)
धनतेरस पर सोने-चांदी के आभूषण, बर्तन, लक्ष्मी-गणेश जी की प्रतिमा, नमक, धनिया के बीज, बताशे-खिलौने आदि चीजों की खरीदारी करनी चाहिए। इसके अलावा शाम में भगवान धन्वंतरि जी की विधि विधान पूजा करनी चाहिए।धनतेरस पूजा सामग्री लिस्ट (Dhanteras Puja Samagri List)
- चौकी
- स्वस्तिक या अल्पना बनाने के लिए अक्षत या आटा
- चौकी पर बिछाने के लिए लाल वस्त्र
- मिट्टी के बड़े दीपक
- सरसों का तेल
- 13 मिट्टी के दीपक और बाती
- कौड़ी
- माता लक्ष्मी, गणेशजी, भगवान कुबेर, धन्वंतरि और यमराज जी की तस्वीर
- पूजा की थाली
- सुपारी
- कुबेर यंत्र
- कलश
- मौली या कलावा
- अक्षत
- रोली या अबीर
- गुलाल
- सिक्का
- गुड़ या शक्कर
- चंदन
- कुमकुम और हल्दी
- चौकी को शुद्ध करने के लिए गंगाजल
- सीजनल फल
- मिष्ठान्न
- ताम्बूल (पान, लौंग, सुपारी, इलायची)
- क्षमतानुसार दक्षिणा
- लाल और पीले पुष्प
- पुष्प माला
- धुप
- अगरबत्ती
- चढ़ावा के लिए खील-बताशा, धनिया के बीज, नए बर्तन, नई झाड़ू, धान-मूंग
- कपूर
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