Sandhya Arghya Time Today 2025 LIVE: छठ पूजा संध्या अर्घ्य टाइमिंग टुडे, घाट पर पहुंच रहे छठ व्रती, जानें आज कितने बजे दिया जाएगा संध्या अर्घ्य का समय, विधि और मंत्र
छठ पूजा के अर्घ्य का शुभ मुहूर्त 2025-
संध्या अर्घ्य का समय- 5:40 PM (27 अक्टूबर 2025)
उषा अर्घ्य का समय- 6:30 AM (28 अक्टूबर 2025)
27 अक्टूबर 2025 के सूर्योदय-सूर्यास्त का समय-
- सूर्योदय - 6:03 AM
- सूर्यास्त - 5:22 PM
- चंद्रोदय - 11:03 AM
- चन्द्रास्त - 09:28 PM
छठ पूजा की सामग्री लिस्ट-
- बांस का सूप
- बांस की डालियां
- कोसी
- पितल या कांसे का लोटा
- थाली
- कलश
- दीया
- अगरबत्ती
- धूप
- कपूर
- कपड़ा (लाल या पीला दुपट्टा)
- चूल्हा (मिट्टी का या लोहे का)
- आम की लकड़ी
- गंगाजल
- गन्ना
- नारियल
- सेब
- केला
- अमरूद
- संतरा
- नींबू
- अनार
- नाशपाती
- नए धान का चावल
- गेहूँ का आटा
- गुड़
- घी
- दूध
- केला के पत्ते
- फूल
- सिंदूर
- हल्दी
- चावल
- रोली
- कुमकुम
- तेल
- बत्ती
- नया कपड़ा (व्रती के लिए साड़ी या धोती)
- आटा का दीपक
- सोहारी
- सुपारी
- पान
- इलायची
- लौंग
- धागा
- मौली
- कच्चा सूत
शहर का नामसूर्यास्त का समय
दिल्ली5:40 PM
कानपुर5:32 PM
पटना5:12 PM
दरभंगा5:08 PM
लखनऊ5:26 PM
बनारस5:22 PM
मुंबई6:08 PM
गोरखपुर5:17 PM
जयपुर5:49 PM
छठ संध्या अर्घ्य के बाद क्या होता है?
संध्या अर्घ्य के बाद रात का कोसी भरी जाती है और अगले दिन सुबह में का पारण किया जाता है।Chhath Puja Sandhya Arghya Timing Today LIVE: जयपुर में आज सूर्यास्त का समय
जयपुर में आज सूर्यास्त का समय 5:49 PM है।Chhath Puja Sandhya Arghya Timing Today LIVE: गोरखपुर में आज सूर्यास्त का समय
गोरखपुर में आज सूर्यास्त का समय 5:17 PM थी। यहां सूरज डूब चूका है।Chhath Puja Sandhya Arghya Timing Today LIVE: मुंबई में आज सूर्यास्त का समय
मुंबई में आज 6 बजकर 08 मिनट पर सूर्यास्त होगा।Chhath Puja Sandhya Arghya Timing Today LIVE: बनारस में आज सूर्यास्त का समय
बनारस में आज सूर्यास्त का समय 5:22 PM है।Chhath Puja Sandhya Arghya Timing Today LIVE: लखनऊ में आज सूर्यास्त का समय
लखनऊ में आज सूर्यास्त का समय 5:26 PM है। इसी समय पर सूरज डूबने वाला है और संध्या अर्घ्य भी होगा।Chhath Puja Sandhya Arghya Timing Today, दरभंगा में आज सूर्यास्त का समय LIVE: दरभंगा में सूरज डूबने का समय
दरभंगा में सूरज डूब चूका है। सूर्यास्त का समय दरभंगा में 5:08 PM था ।Chhath Puja Sandhya Arghya Timing Today, पटना में आज सूर्यास्त का समय LIVE: पटना में छठ संध्या अर्घ्य का समय क्या है?
आज 5:12 PM में पटना में आज सूर्यास्त होता और इसी समय छठ संध्या अर्घ्य दिया जाएगा।Chhath Puja Sandhya Arghya Timing Today, कानपुर में आज सूर्यास्त का समय LIVE: कानपुर में सूरज कब डूबेगा?
कानपुर में आज सूर्यास्त का समय 5:32 PM है।Chhath Puja Sandhya Arghya Timing Today, दिल्ली में आज सूर्यास्त का समय LIVE: दिल्ली में सूरज कब डूबेगा?
दिल्ली में आज 5:40 PM में सूर्यास्त होगा।छठ गीत: ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से
ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से,ओह पर सुगा मेड़राए
मारबो रे सुगवा धनुख से,
सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से,
आदित होई ना सहाय ॥
ऊ जे नारियर जे फरेला खबद से,
ओह पर सुगा मेड़राए ।
मारबो रे सुगवा धनुख से,
सुगा गिरे मुरझाए ।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से,
आदित होई ना सहाय ॥
अमरुदवा जे फरेला खबद से,
ओह पर सुगा मेड़राए ।
मारबो रे सुगवा धनुख से,
सुगा गिरे मुरझाए ।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से,
आदित होई ना सहाय ॥
शरीफवा जे फरेला खबद से,
ओह पर सुगा मेड़राए ।
मारबो रे सुगवा धनुख से,
सुगा गिरे मुरझाए ।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से,
आदित होई ना सहाय ॥
ऊ जे सेववा जे फरेला खबद से,
ओह पर सुगा मेड़राए ।
मारबो रे सुगवा धनुख से,
सुगा गिरे मुरझाए ।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से,
आदित होई ना सहाय ॥
सभे फलवा जे फरेला खबद से,
ओह पर सुगा मेड़राए ।
मारबो रे सुगवा धनुख से,
सुगा गिरे मुरझाए ।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से,
आदित होई ना सहाय ॥
<sup>छठ पूजा अर्घ्य मंत्र</sup>
- ॐ ह्रीं षष्ठीदेव्यै स्वाहा
- ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः
छठ पूजा सामग्री सूची
बांस का सूप, बांस की डालियां, कोसी, पितल या कांसे का लोटा, थाली, कलश, दीया, अगरबत्ती, धूप, कपूर, कपड़ा (लाल या पीला दुपट्टा), चूल्हा (मिट्टी का या लोहे का), आम की लकड़ी, गंगाजल, गन्ना, नारियल, सेब, केला, अमरूद, संतरा, नींबू, अनार, नाशपाती, नए धान का चावल, गेहूं का आटा, गुड़, घी, दूध, केला के पत्ते, फूल, सिंदूर, हल्दी, चावल, रोली, कुमकुम, तेल, बत्ती, नया कपड़ा, आटा का दीपक, सोहारी, सुपारी, पान, इलायची, लौंग, धागा, मौली, कच्चा सूत।संध्या अर्घ्य देते समय रखें इन बातों का ध्यान
छठ पूजा के दौरान मन को पूरी तरह शांत और नकारात्मक विचारों से दूर रखना चाहिए। घर की सफाई और पवित्रता बनाए रखना भी जरूरी है। व्रती को 36 घंटे का निर्जला उपवास रखना होता है, जो आत्मसंयम और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। यदि स्वास्थ्य से जुड़ी कोई परेशानी हो, तो बड़े-बुजुर्गों या किसी ज्योतिष विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।सूर्य को अर्घ्य देते समय करें इन मंत्रों का जाप
सूर्य को जल अर्पित करते समय 'ॐ आदित्याय नमः या ॐ भास्कराय नमः' मंत्र का जाप करें। अर्घ्य के बाद सूर्यदेव और छठी मैय्या से संतान सुख, आरोग्य और समृद्धि के आशीर्वाद देने की प्रार्थना करें।इन शुभ योगों में दिया जाएगा अस्तगामी सूर्य को अर्घ्य
छठ पूजा के दिन अस्त होते सूर्य को अर्घ्य रवि योग में अर्पित किया जाएगा। इसी दिन मंगल ग्रह वृश्चिक राशि में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे रूचक राजयोग का निर्माण होगा। वहीं गुरु ग्रह चंद्रमा की राशि में स्थित होकर हंस राजयोग बना रहे हैं। इस प्रकार आज तीन शुभ योगों के प्रभाव में संध्या अर्घ्य दिया जाएगा।इस तरह दें संध्या अर्घ्य
संध्या अर्घ्य सूर्यास्त के समय दिया जाता है। व्रती बांस के दउरा या सूप में ठेकुआ, फल, नारियल, गन्ना और चावल के लड्डू सजाते हैं। फिर नदी या तालाब के किनारे कमर तक पानी में खड़े होकर दूध और जल मिलाकर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करते हैं। इसके बाद सूप में रखे प्रसाद को सूर्यदेव को समर्पित किया जाता है। इस पूरे समय व्रती छठी मैया के लोकगीत गाते हैं या मंत्रों का जाप करते हैं।छठ पूजा में संध्या अर्घ्य देने की विधि
छठ पर्व में सूर्यदेव को संध्या अर्घ्य अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। व्रती शाम के समय कमर तक जल में खड़े होकर अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इस दौरान वे बांस की टोकरी में फल, ठेकुआ, नारियल, गन्ना और अन्य प्रसाद सजाकर सूर्यदेव को समर्पित करते हैं।सूर्य कवच का पाठ
छठ पूजा के तीसरे दिन अर्घ्य देने से पहले सूर्य कवच का पाठ करने की परंपरा होती है। यह पाठ स्वास्थ्य, करियर, धन और संतान की प्रगति के लिए शुभ माना जाता है। नियमित रूप से सूर्य कवच का पाठ करने से आंख, त्वचा, हृदय और हड्डियों से जुड़ी समस्याओं में सुधार होता है। इसके साथ ही आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति भी मजबूत होती है।कौन हैं छठी माता
छठी माता को सूर्यदेव की बहन माना जाता है। वे संतान की रक्षक और सुख-समृद्धि देने वाली देवी हैं। छठ पूजा में सूर्यदेव के साथ छठी मैया की पूजा की जाती है। माना जाता है कि सच्चे मन से व्रत करने वालों पर वे अपनी कृपा बरसाती हैं और उनके परिवार को सुख, स्वास्थ्य और संतोष का आशीर्वाद देती हैं।छठ पूजा में संध्या अर्घ्य का महत्व
छठ पर्व हिंदू धर्म का ऐसा एकमात्र त्योहार है, जिसमें सूर्यदेव को संध्या के समय अर्घ्य अर्पित किया जाता है। मान्यता है कि इस समय भगवान सूर्य अपनी पत्नी प्रत्यूषा के साथ अस्त होते हैं। जब व्रती शाम को संध्या अर्घ्य देते हैं, तो वे अपने परिवार की सुख-समृद्धि और संतान के कल्याण की कामना करते हुए सूर्यदेव की आराधना करते हैं।छठ पूजा की कहानी
छठ पूजा सबसे पहले किसने किया?छठ पूजा सबसे पहले किसने किया, इसकी कई पौराणिक मान्यताएं हैं, जिनमें सबसे प्रमुख कथाएं माता सीता, सूर्यपुत्र कर्ण और पांडवों की पत्नी द्रौपदी से जुड़ी हैं।
1. माता सीता- मान्यता है कि रावण वध के बाद ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए माता सीता ने ऋषि मुद्गल के आश्रम में छह दिनों तक छठ व्रत किया था।
2. सूर्यपुत्र कर्ण- एक अन्य कथा के अनुसार, सूर्य के परम भक्त और भगवान सूर्य के पुत्र कर्ण ने पहली बार छठ पूजा की शुरुआत की थी। वह घंटों तक पानी में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे।
3. द्रौपदी- एक और कथा में बताया गया है कि पांडवों की पत्नी द्रौपदी ने अपने परिवार के कल्याण और सुख-समृद्धि के लिए छठ व्रत रखा था, जिससे पांडवों का सौभाग्य लौट आया था।
छठ पूजा में बरतें ये सावधानी-
- छठ पूजा के सामान को जूठे हाथ से न छुएं।
- छठ व्रती का अपमान न करें।
- छठ के प्रसाद में गलती से भी नमक का इस्तेमाल न करें।
- छठ के किसी सामान को अगर जूठे हाथ से छू दिया है तो उसे पूजा में इस्तेमाल न करें।
हो दीनानाथ- छठ गीत लिरिक्स
सोना सट कुनिया, हो दीनानाथहे घूमइछा संसार, हे घूमइछा संसार
सोना सट कुनिया, हो दीनानाथ
हे घूमइछा संसार, हे घूमइछा संसार
आन दिन उगइ छा हो दीनानाथ
आहे भोर भिनसार, आहे भोर भिनसार
आजू के दिनवा हो दीनानाथ
हे लागल एती बेर, हे लागल एती बेर
बाट में भेटिए गेल गे अबला
एकटा अन्हरा पुरुष, एकटा अन्हरा पुरुष
अंखिया दियेते गे अबला
हे लागल एती बेर, हे लागल एती बेर
बाट में भेटिए गेल गे अबला
एकटा बाझिनिया, एकटा बाझिनिया
बालक दियेते गे अबला
हे लागल एती बेर, हे लागल एती बेर
छठ पूजा में क्या-क्या मिलता है?
- खजूर
- ठेकुआ
- केला
- डाभ नींबू
- नारियल
- गन्ना
- सिंघाड़ा, सुपारी और सुथनी
- आंवला
- मूली और पत्ते
- कच्चा हल्दी
प्रेग्नेंसी में छठ कैसे किया जाता है?
महिला गर्भवती है, तो वह छठ कर सकती है, लेकिन शरीर की क्षमता और चिकित्सक की सलाह के अनुसार। यदि स्वास्थ्य ठीक हो, तो घर में गुनगुने पानी से स्नान करें। नदी या तालाब पर जाने की आवश्यकता नहीं है। घर में, विशेष रूप से रसोई और पूजा स्थल को साफ करें। सूर्य देव और छठी मइया को जल अर्पित करें। आप बस गर्भावस्था में निर्जला या कठोर उपवास न करें और पूरे दिन छठ के गीत सुनें।
छठ पूजा के चार दिन कौन-कौन से होते हैं?
पहला दिन, नहाय खाय- शरीर और मन की शुद्धि का दिन।
दूसरा दिन, खरना- निर्जला उपवास और शाम को गुड़ की खीर का प्रसाद।
तीसरा दिन, संध्या अर्घ्य- डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर आभार प्रकट किया जाता है।
चौथा दिन, उषा अर्घ्य- उदयमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है।
छठ कोसी कैसे भरते हैं?
छठ पूजा में कोसी भरना एक महत्वपूर्ण और पवित्र अनुष्ठान है, जिसे मुख्य रूप से महिलाएँ करती हैं। इसमें बांस या लकड़ी की टोकरी (सुप) को साफ करके नीचे कपड़ा या पत्ते बिछाए जाते हैं और उसमें गेहूँ या चावल रखकर समृद्धि का प्रतीक बनाया जाता है। इसके ऊपर फल (केला, नारियल, अमरूद आदि), ठेकुआ, दीपक और सिंदूर या हल्दी सजाए जाते हैं, कभी-कभी साड़ी या छोटी वस्तुएँ भी टोकरी में रखी जाती हैं। कोसी भरते समय महिलाएँ पारंपरिक गीत गाती हैं, जैसे “कोसी भरे चलली गौरा देवी…”, और इसे सूर्यदेव और छठी मैया को अर्पित करती हैं। इस अनुष्ठान का उद्देश्य परिवार की सुख-समृद्धि, बच्चों की लंबी उम्र और स्वास्थ्य के लिए आशीर्वाद लेना है। इसे करते समय साफ-सफाई, सात्विकता और भक्ति का विशेष ध्यान रखा जाता है।कोसी भराई गीत
चननि ताने चलले महादेवघुटी भर धोती भीजे
घुटी भर धोती भीजे
भीजता त धोती मोरा भीजे देहु
चननि मोर नहीं भीजे
चननि मोर नहीं भीजे
चननि मोर नहीं भीजे
कोसी भरे चलली गौरा देइ
सवा लाख के साडी भीजे
सवा लाख के साडी भीजे
भीजता ता साडी मोरा भीजे देहु
कोसी मोर नाही भीजे
कोसी मोर नाही भीजे
कोसी मोर नाही भीजे
गरजी गरजी देव रिमझिम बरसे
पनिया के बूँद टपके पगिया ऊपर से
गरजी गरजी देव रिमझिम बरसे
पनिया के बूँद टपके पगिया ऊपर से
चङनि तान चलले धर्मेन्दर सेवका
घुटी भर धोती भीजे
घुटी भर धोती भीजे
भीजता त धोती मोर् भीजे देहु
चङनि मोरा नाही भीजे
चङनि मोरा नाही भीजे
चङनि मोरा नाही भीजे
धन धन बाटे मोरा अँगना के भाग हो
दुलारी छठी मैय्या आइल बाड़ी आज हो
धन धन बाटे मोरा अँगना के भाग हो
दुलारी छठी मैय्या आइल बाड़ी आज हो
ता कोसी भरे चलली अमिता देइ
नौलखा हार भीजे
नौलखा हार भीजे
अ भीजता ता हार मोरा भीजे देहु
कोसी मोरा नहीं भीजे
कोसी मोरा नहीं भीजे
कोसी मोरा नहीं भीजे
छोटकी बलकावा के माई रक्षा करिहैं
बरती केवईयां के अन्धन से भरिहैं
नन्हका बलकावा के माई रक्षा करीहें
बरती केवईयां के अन्धन से भरिहैं
ता चङनि तान चलले पंकज सेवका
घुटी भर धोती भीजे
घुटी भर धोती भीजे
के भीजता त धोती मोर् भीजे देहु
चननी मोर नहीं भीजे
चननी मोर नहीं भीजे
चननी मोर नहीं भीजे
कोसी भरे चलली अंजानो देइ
सवा लाख के साडी भीजे
सवा लाख के साडी भीजे
के भीजता ता साडी मोरा भीजे देहु
कोसी मोरा नहीं भीजे
कोसी मोरा नहीं भीजे
कोसी मोरा नहीं भीजे
छठ पूजा के 5 जरूरी फल
- डाभ नींबू
- अनानास
- केला
- गन्ना
- सिंघाड़ा
छठ के भोजपुरी गीत लिरिक्स
कोपी कोपी बोले सूरज देवसुनहये सेवक लोग सुनहये सेवक लोग
मोरे चौअरा दुभिया जन्म गईले
मकरी बसरे लिहले मकरी बसरे लिहले
कॉपी कॉपी बोले सूरज देव
सुनहये सेवक लोग सुनहये सेवक लोग
बिनती से बोले सेवक लोग
सुन्हये आदित मन सुन्हये आदित मन
सुन्हये है सूरज देव सुन्हये है सूरज देव
राऊरा घटये दुभीया छटाई देहब
मकरी भगाई देहाब मकरी भगाई देहाब
सुन्हये है सूरज देव सुन्हये है सूरज देव
राऊरा घटये चंदन क्षिरक देहाब
मकरी उजड़ी देहाब मकरी उजड़ी देहाब
सुन्हये आदित मन सुन्हये आदित मन
राऊरा घटये होमवा करी देहब
तुलसी रोपाई देहब तुलसी रोपाई देहब
सुन्हये है सूरज देव सुन्हये है सूरज देव
सुन्हये आदित मन सुन्हये आदित मन
सुन्हये है सूरज देव सुन्हये है सूरज देव
छठ गीत (कांच ही बांस के बहंगिया)
कांच ही बांस के बहंगिया,कांच ही बांस के बहंगिया,
बहंगी लचकत जाए,
बहंगी लचकत जाए ||
होए ना बलम जी कहरिया ,
बहंगी घाटे पहुंचाए,
बहंगी घाटे पहुंचाए |
कांच ही बांस के बहंगिया ,
बहंगी लचकत जाए,
बहंगी लचकत जाए ||
बाट जे पूछे ना बटोहिया ,
बहंगी केकरा के जाय,
बहंगी केकरा के जाय |
तू तो आंध्र होवे रे बटोहिया ,
बहंगी छठ मैया के जाए,
बहंगी छठ मैया के जाए |
वह रे जे बाड़ी छठी मैया ,
बहंगी उनका के जाए,
बहंगी उनका के जाए|
कांच ही बांस के बहंगिया
बहंगी लचकत जाए,
बहंगी लचकत जाए ||
होए ना देवर जी कहरिया ,
बहंगी घाटे पहुंचाई,
बहंगी घाटे पहुंचाई ||
वह रे जो बाड़ी छठी मैया
बहंगी उनका के जाए,
बहंगी उनका के जाए ||
बाटे जे पूछे ना बटोहिया
बहंगी केकरा के जाय,
बहंगी केकरा के जाय ||
तू तो आन्हर होय रे बटोहिया
बहंगी छठ मैया के जाए,
बहंगी छठ मैया के जाए ||
वह रे जय भइली छठी मैया ,
बहंगी उनका के जाए,
बहंगी उनका के जाए ||
आज छठ पूजा का कौन सा दिन है?
आज 27 अक्टूबर के दिन, छठ पूजा का तीसरा दिन है। आज संध्या अर्घ्य का दिन है और आज के दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है।
आज छठ पूजा में क्या होगा?
व्रती लोग आज नदी, ताल-घाट या तालाब किनारे खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देंगें इसका मतलह है कि सूर्यास्त के समय सूर्य देव को जल, दूध, फल, आदि अर्पित करेंगे। आज के दिन भी व्रती निर्जला व्रत में ही रहेंगे। अर्घ्य के बाद घर जाकर कोसी भरा जाएगा। माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र, समृद्धि और परिवार के सुख-शांति के लिए कोसी भरती हैं।छठ पूजा: सूर्य देव के मंत्र
ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः।।ॐ सूर्याय नम:।।
ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा ।।
ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:।।
ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ ।।
सूर्य देव की आरती
ॐ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान.जगत् के नेत्रस्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा.
धरत सब ही तव ध्यान, ॐ जय सूर्य भगवान.
ॐ जय सूर्य भगवान...
सारथी अरुण हैं प्रभु तुम, श्वेत कमलधारी. तुम चार भुजाधारी.
अश्व हैं सात तुम्हारे, कोटि किरण पसारे. तुम हो देव महान.
ॐ जय सूर्य भगवान...
ऊषाकाल में जब तुम, उदयाचल आते. सब तब दर्शन पाते.
फैलाते उजियारा, जागता तब जग सारा. करे सब तब गुणगान.
ॐ जय सूर्य भगवान...
संध्या में भुवनेश्वर अस्ताचल जाते. गोधन तब घर आते.
गोधूलि बेला में, हर घर हर आंगन में. हो तव महिमा गान.
ॐ जय सूर्य भगवान...
देव-दनुज नर-नारी, ऋषि-मुनिवर भजते. आदित्य हृदय जपते.
स्तोत्र ये मंगलकारी, इसकी है रचना न्यारी. दे नव जीवनदान.
ॐ जय सूर्य भगवान...
तुम हो त्रिकाल रचयिता, तुम जग के आधार. महिमा तब अपरम्पार.
प्राणों का सिंचन करके भक्तों को अपने देते. बल, बुद्धि और ज्ञान.
ॐ जय सूर्य भगवान...
भूचर जलचर खेचर, सबके हों प्राण तुम्हीं. सब जीवों के प्राण तुम्हीं.
वेद-पुराण बखाने, धर्म सभी तुम्हें माने. तुम ही सर्वशक्तिमान.
ॐ जय सूर्य भगवान...
पूजन करतीं दिशाएं, पूजे दश दिक्पाल. तुम भुवनों के प्रतिपाल.
ऋतुएं तुम्हारी दासी, तुम शाश्वत अविनाशी. शुभकारी अंशुमान.
ॐ जय सूर्य भगवान...
छठ पूजा के दौरान क्या करें
- छठ व्रत करने वाली महिलाएं और पुरुषों को प्रतिदिन स्नान-ध्यान करके तन और मन से पवित्र होना चाहिए। प्रतिदिन साफ वस्त्र धारण करें।
- छठ पूजा स्थल और छठ पूजा के लिए प्रसाद आदि पकवान बनाए जाने वाले स्थान को हमेशा साफ-सुथरा और पवित्र रखना चाहिए।
- छठ पूजा करने वाले व्यक्ति को प्रतिदिन सूर्य देवता को अर्घ्य जरूर देना चाहिए। इसके बाद ही कुछ ग्रहण करना चाहिए।
- छठ पूजा का व्रत करने वाले व्यक्ति को ब्रह्मचर्य पालन करना चाहिए।
- छठ व्रत को करने वाले साधक को पलंग आदि पर सोने की बजाय जमीन पर ही सोना चाहिए।
- छठ पूजा में किसी भी चीज को पकाने के लिए मिट्टी के चूल्हे का प्रयोग करना चाहिए।
- शुभता और सौभाग्य के लिए छठ पूजा के लिए नई टोकरी या सूप का प्रयोग करें। इस बात का विशेष ख्याल रखें कि आपकी टोकरी या सूप टूटा हुआ न हो।
छठ पूजा में गन्ने का महत्व
छठ पूजा में गन्ना बहुत शुभ माना जाता है। इसे पवित्रता और उन्नति का प्रतीक समझा जाता है। पूजा के समय गन्ना रखने से घर में सुख-शांति आती है और परिवार को समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। माना जाता है कि छठी मैया को गन्ना अर्पित करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है।छठी मैया और सूर्य देव के बीच क्या संबंध है?
छठी मइया को ब्रह्मा की मानस पुत्री और सूर्य देव की बहन कहा जाता है।छठ पूजा में छठी मैया कौन है?
छठी मैया को सूर्य देव की बहन माना जाता है, जो बच्चों की रक्षा करती हैं। उन्हें देवसेना भी कहते हैं और कई धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उनका संबंध भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय से भी है। छठ पूजा में उनकी पूजा सूर्य देव के साथ ही संतान की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और परिवार की रक्षा के लिए की जाती है।Weekly Horoscope : अंधाधुंध कमाई की तैयारी कर लें इन 5 राशियों के लोग, अक्टूबर का तीसरा हफ्ता रहेगा बेहद शानदार
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