Chaurchan 2026 Moon Rise Timing Today Live Updates: बिहार और मिथिला क्षेत्र में आज घरों के आंगन चौरचन की पूजा के लिए सज गए हैं। कहीं अरिपन बनाया जा रहा है तो कहीं दही, फल, खीर-पूड़ी और घर में तैयार पकवान पूजा की डाली में सजाए जा रहे हैं। अब सभी को इंतजार है चौरचन के चांद का।
आज चौरचन का चांद कितने बजे दिखेगा
इस वर्ष चौरचन 14 सितंबर 2026, सोमवार को मनाया जा रहा है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि आज सुबह 7 बजकर 06 मिनट से शुरू हो चुकी है। चतुर्थी तिथि का समापन 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 44 मिनट पर होगा।
चौरचन की मुख्य पूजा शाम को चंद्र दर्शन के बाद की जाती है। हालांकि आज चंद्रमा खगोलीय गणना के अनुसार सुबह ही उदित हो चुका है। इसलिए यहां दिया गया शाम का समय वास्तव में वह अवधि है, जब सूर्यास्त के बाद चांद आसमान में दिखाई देगा और चंद्रदेव को अर्घ्य दिया जा सकेगा।
आज चौरचन का चांद कितने बजे दिखेगा
बिहार के अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त के समय में कुछ मिनट का अंतर रहेगा। चांद सूर्यास्त के बाद पश्चिमी आकाश में दिखाई देगा। मौसम साफ रहने पर श्रद्धालु नीचे दिए गए अनुमानित समय से चंद्र दर्शन कर सकते हैं।
| शहर | सूर्यास्त के बाद चांद दिखने का संभावित समय | चंद्रास्त का समय |
|---|---|---|
| मुजफ्फरपुर | शाम 5:54 बजे के बाद | शाम 7:38 बजे |
| दरभंगा | शाम 5:52 बजे के बाद | शाम 7:36 बजे |
| समस्तीपुर | शाम 5:54 बजे के बाद | शाम 7:37 बजे |
| सीतामढ़ी | शाम 5:52 बजे के बाद | शाम 7:37 बजे |
| पूर्णिया | शाम 5:44 बजे के बाद | शाम 7:29 बजे |
| जनकपुर, नेपाल | शाम 6:07 बजे के बाद, नेपाली समय | शाम 7:51 बजे, नेपाली समय |
नोट: जनकपुर का समय नेपाल के स्थानीय समय यानी NPT के अनुसार दिया गया है। भारतीय समय के अनुसार वहां चंद्र दर्शन लगभग शाम 5:52 बजे के बाद और चंद्रास्त करीब शाम 7:36 बजे होगा।
मुजफ्फरपुर में चौरचन का चांद आज कितने बजे दिखेगा
मुजफ्फरपुर में सूर्यास्त शाम करीब 5 बजकर 54 मिनट पर होगा। इसके बाद पश्चिमी आकाश में चांद देखा जा सकेगा। यहां चंद्रास्त का समय लगभग शाम 7 बजकर 38 मिनट है। इस तरह परिवारों को चंद्र दर्शन और अर्घ्य के लिए करीब पौने दो घंटे की अवधि मिल सकती है।
खगोलीय गणना के अनुसार मुजफ्फरपुर में आज चंद्रोदय सुबह करीब 8 बजकर 23 से 24 मिनट पर हो चुका है। इसलिए शाम को चांद उगने की प्रतीक्षा करने के बजाय सूर्यास्त के बाद उसे पश्चिम दिशा में देखें। मुजफ्फरपुर की खगोलीय गणना
दरभंगा में चौरचन का चांद कब दिखाई देगा
दरभंगा में आज शाम करीब 5 बजकर 52 मिनट पर सूर्यास्त होगा। इसके कुछ ही मिनट बाद मौसम साफ होने पर चांद दिखाई देना शुरू हो सकता है। चंद्रमा लगभग शाम 7 बजकर 36 मिनट पर अस्त होगा। इसलिए पूजा की तैयारी सूर्यास्त से पहले पूरी कर लें।
समस्तीपुर में आज चौरचन का चांद कितने बजे दिखेगा
समस्तीपुर में सूर्यास्त शाम लगभग 5 बजकर 54 मिनट पर होगा। चांद शाम 7 बजकर 37 मिनट के आसपास अस्त होगा। यहां भी चौरचन पूजा और अर्घ्य के लिए सूर्यास्त से चंद्रास्त तक का समय उपयुक्त रहेगा। उपलब्ध खगोलीय गणना में आज का चंद्रोदय सुबह लगभग 8 बजकर 20 से 22 मिनट के बीच बताया गया है। समस्तीपुर का चंद्र समय
सीतामढ़ी और पूर्णिया में चंद्र दर्शन का समय
सीतामढ़ी में श्रद्धालु शाम करीब 5 बजकर 52 मिनट के बाद चंद्र दर्शन कर सकते हैं। चंद्रमा यहां शाम करीब 7 बजकर 37 मिनट तक आसमान में रहेगा।
पूर्णिया बिहार के पूर्वी हिस्से में है। इसलिए वहां सूर्यास्त और चंद्रास्त दूसरे शहरों की तुलना में कुछ मिनट पहले होगा। पूर्णिया में चांद शाम करीब 5 बजकर 44 मिनट के बाद देखा जा सकता है। चंद्रास्त लगभग शाम 7 बजकर 29 मिनट पर होगा।
जनकपुर में चौरचन के चांद का समय
नेपाल के जनकपुर में चौरचन और चौठ चंद का पर्व मैथिल परंपरा के साथ मनाया जाता है। वहां सूर्यास्त शाम करीब 6 बजकर 07 मिनट पर होगा और चंद्रमा लगभग 7 बजकर 51 मिनट पर अस्त होगा। ये दोनों समय नेपाल स्टैंडर्ड टाइम के अनुसार हैं। भारतीय समय नेपाल से 15 मिनट पीछे चलता है।
चौरचन पर चंद्रमा को अर्घ्य कैसे दें
शाम की पूजा से पहले आंगन या पूजा स्थान को साफ करके अरिपन बनाया जाता है। इसके बाद पूजा की सामग्री सजाई जाती है।
- बांस या धातु की डाली में फल और पकवान रखें।
- दही, खीर-पूड़ी, केला, नारियल और मिठाई चढ़ाएं।
- चंद्रमा दिखाई देने पर हाथ में फल या पूजा की डाली लेकर दर्शन करें।
- जल या दूध से चंद्रदेव को अर्घ्य दें।
- परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की खुशहाली की प्रार्थना करें।
- पूजा के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों में बांटें।
बादल हों तो चांद कैसे देखें
शहर में दिया गया समय खगोलीय गणना पर आधारित है। बादल, बारिश, ऊंची इमारतें या स्थानीय मौसम चंद्र दर्शन में बाधा डाल सकते हैं। चंद्रमा को सूर्यास्त के बाद पश्चिम से दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर देखें। खुले मैदान, छत या ऐसी जगह चुनें जहां सामने ऊंची इमारतें न हों।
