अयोध्या राम मंदिर में भगवान राम का हुआ सूर्य तिलक, देखें खास तस्वीरें
अयोध्या में राम नवमी का त्योहार बेहद धूमधाम से मनाया जाएगा जिसकी तैयारी पूरी हो चुकी है। इस दौरान मंदिर में लाखों भक्तों की भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। बता दें राम नवमी पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:08 से दोपहर 01:39 बजे तक रहेगा।
अयोध्या में भगवान राम का जन्मोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर राम मंदिर में भक्तों की भारी बड़ी उमड़ती है। बता दें इस साल राम नवमी 6 अप्रैल को मनाई जा रही है। जानकारी अनुसार इस दिन राम मंदिर में रामलला की प्रतिमा का अद्भुत श्रृंगार किया जाएगा। तो वहीं दोपहर 12 बजे के करीब सूर्य भगवान राम जी की प्रतिमा का अभिषेक करेंगे जिसे सूर्य तिलक के नाम से जाना जाता है। इसके बाद सभी भक्त मिलकर अपने प्रभु की आरती उतारेंगे।
Ram Navami Puja Vidhi
अयोध्या राम मंदिर श्री राम जन्मोत्सव कार्यक्रम (Ram Navami Ayodhya Ram Mandir Program 2025)
रामलला का अभिषेक- प्रात: 9.30 बजे से 10.30 बजे तक
पर्दा रहेगा- प्रात: 10.30 बजे से 10.40 बजे तक
रामलला का श्रृंगार होगा- प्रात: 10.40 बजे से 11.45 बजे तक (पर्दा खुला रहेगा)
पर्दा रहेगा- प्रात: 11.45 बजे (इस समय भोग लगगा)
Happy Ram Navami Wishes In Hindi 2025
राम नवमी पर अयोध्या राम मंदिर में अभिषेक और आरती का समय
राम नवमी पर अयोध्या राम मंदिर में भगवान राम का अभिषेक दोपहर 12 बजे किया जाएगा। साथ में इस दौरान भगवान राम की आरती भी की जाएगी।
Ram Lalla Surya Tilak
Ayodhya Ram Mandir Live: राम मंदिर में उमड़ी भक्तों की भारी भीड़
Ayodhya Ram Lalla Sringar Live: राम लला का श्रृंगार जारी
रामलला की मनमोहक तस्वीर
Ayodhya Ram Mandir Ram Lalla Sringar: राम लला का श्रृंगार जारी
Ayodhya Ram Navami Surya Tilak Photo: राम नवमी सूर्य तिलक फोटो
Ayodhya Ram Navami Live: ऐसे होगा जन्मोत्सव का कार्यक्रम
Ayodhya Ram Mandir Photo Latest: राम मंदिर की फोटो
Ayodhya Ram Navami Live: रामलला का किया जा रहा है अभिषेक
Ayodhya Ram Navami Live: अयोध्या से राम नवमी उत्सव का सीधा प्रसारण
Ayodhya Ram Navami Live Darshan Aarti: राम नवमी को लेकर देश विदेश से श्रद्धालु पहुंच रहे अयोध्या
Ayodhya Ram Navami Live Darshan Aarti: राम जी की स्तुति
कौसल्या हितकारी ।
हरषित महतारी, मुनि मन हारी,
अद्भुत रूप बिचारी ॥
लोचन अभिरामा, तनु घनस्यामा,
निज आयुध भुजचारी ।
भूषन बनमाला, नयन बिसाला,
सोभासिंधु खरारी ॥
कह दुइ कर जोरी, अस्तुति तोरी,
केहि बिधि करूं अनंता ।
माया गुन ग्यानातीत अमाना,
वेद पुरान भनंता ॥
करुना सुख सागर, सब गुन आगर,
जेहि गावहिं श्रुति संता ।
सो मम हित लागी, जन अनुरागी,
भयउ प्रगट श्रीकंता ॥
ब्रह्मांड निकाया, निर्मित माया,
रोम रोम प्रति बेद कहै ।
मम उर सो बासी, यह उपहासी,
सुनत धीर मति थिर न रहै ॥
उपजा जब ग्याना, प्रभु मुसुकाना,
चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै ।
कहि कथा सुहाई, मातु बुझाई,
जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै ॥
माता पुनि बोली, सो मति डोली,
तजहु तात यह रूपा ।
कीजै सिसुलीला, अति प्रियसीला,
यह सुख परम अनूपा ॥
सुनि बचन सुजाना, रोदन ठाना,
होइ बालक सुरभूपा ।
यह चरित जे गावहिं, हरिपद पावहिं,
ते न परहिं भवकूपा ॥
दोहा:
बिप्र धेनु सुर संत हित,
लीन्ह मनुज अवतार ।
निज इच्छा निर्मित तनु,
माया गुन गो पार ॥
- तुलसीदास रचित, रामचरित मानस, बालकाण्ड-192
श्री राम जी की आरती (Shree Ram Ji Ki Aarti)
श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन
हरण भवभय दारुणं ।
नव कंज लोचन कंज मुख
कर कंज पद कंजारुणं ॥१॥
कन्दर्प अगणित अमित छवि
नव नील नीरद सुन्दरं ।
पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचि
नोमि जनक सुतावरं ॥२॥
भजु दीनबन्धु दिनेश दानव
दैत्य वंश निकन्दनं ।
रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल
चन्द दशरथ नन्दनं ॥३॥
शिर मुकुट कुंडल तिलक
चारु उदारु अङ्ग विभूषणं ।
आजानु भुज शर चाप धर
संग्राम जित खरदूषणं ॥४॥
इति वदति तुलसीदास शंकर
शेष मुनि मन रंजनं ।
मम् हृदय कंज निवास कुरु
कामादि खलदल गंजनं ॥५॥
मन जाहि राच्यो मिलहि सो
वर सहज सुन्दर सांवरो ।
करुणा निधान सुजान शील
स्नेह जानत रावरो ॥६॥
एहि भांति गौरी असीस सुन सिय
सहित हिय हरषित अली।
तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनि
मुदित मन मन्दिर चली ॥७॥
॥सोरठा॥
जानी गौरी अनुकूल सिय
हिय हरषु न जाइ कहि ।
मंजुल मंगल मूल वाम
अङ्ग फरकन लगे।
Chaitra Ram Navami | Ram Navami Mela 2025
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Chaitra Navratri 2025, Ayodhya Ram Lala Live Darshan Aarti: अयोध्या मंदिर के प्रभु श्रीरामलला की तस्वीर
Chaitra Navratri 2025, Ayodhya Ram Lala Live Darshan Aarti: रामलला की आरती लिखित में
नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।।
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कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।
पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।।
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भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।
रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।।
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सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।
आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।।
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इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।।
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मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।
करुना निधान सुजान सिलू सनेहू जानत रावरो।।
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एही भांती गौरी असीस सुनी सिय सहित हिय हरषी अली।
तुलसी भवानी पूजि पूनी पूनी मुदित मन मंदिर चली।।
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दोहा- जानि गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल वाम अंग फरकन लगे।।
