Mangal Pradosh 2025 Vrat Katha, Puja Vidhi And Muhurat In Hindi (भौम प्रदोष व्रत कथा): भौम प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की विधि विधान पूजा की जाती है। कहते हैं इस व्रत को रखने से सभी प्रकार के कर्ज से छुटकारा मिल जाता है। साथ ही आर्थिक स्थिति में भी सुधार आने लगता है। इतना ही नहीं नियमित रूप से ये व्रत रखने से स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें भी दूर हो जाती हैं। 24 फरवरी को भौम प्रदोष व्रत रखा जाएगा। जान लें इसकी पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और व्रत कथा।
मंगल प्रदोष व्रत कथा (Mangal Pradosh Vrat Katha In Hindi)
भौम प्रदोष व्रत की कथा अनुसार प्राचीन समय में एक गांव में तीन दोस्त रहते थे। जिनमें से एक दोस्त राजकुमार पुत्र था, दूसरा ब्राह्मण पुत्र और तीसरा धनिक पुत्र था। राजकुमार और ब्राह्मण के पुत्र शादीशुदा थे और अपनी पत्नियों के साथ रहते थे। वहीं धनिक पुत्र विवाहित तो था लेकिन उसका अभी गौना होना बाकी था। एक दिन तीनों मित्र आपस में बैठकर अपनी पत्नियों की प्रशंसा कर रहे थे। जिस पर ब्राह्मण पुत्र ने कहा कि, जिस घर में स्त्रियां नहीं होती हैं उस घर में भूत डेरा जमा लेते हैं।
ये सुनकर धनिक पुत्र ने तुरंत अपनी पत्नी को लाने का विचार कर लिया। उस समय शुक्र डूबे हुए थे। ऐसे में बहू बेटियों को घर से विदा नहीं करवाया जाता है। लेकिन तब भी वह अपनी पत्नी को लेने के लिए अपने ससुराल पहुंच गया। ससुराल वालों ने उसे बहुत समझाया लेकिन उसने किसी की नहीं सुनी। जब वह अपनी पत्नी को लेकर घर से निकला तो रास्ते में उनकी बैलगाड़ी का पहिया निकल गया जिससे बैल की दोनों टांग टूट गई और दोनों पति पत्नी को भी चोट लग गई। लेकिन इसके बाद भी वे चलते रहे।
कुछ आगे चले तो उन्हें रास्ते में डाकुओं ने घेर लिया और उनका सारा धन लूट लिया। लेकिन फिर भी वह चलते रहे। घर पहुंचने पर धनिक पुत्र को सांप ने डस लिया। जब वेद को बुलाया गया तो उन्होंने कहा कि, ‘इनकी तीन दिन बाद मृत्यु हो जाएगी।’ इस बात की खबर जब ब्राह्मण कुमार को मिली तो वो धनिक पुत्र के घर पहुंचे और उनके माता, पिता और पत्नी को प्रदोष व्रत करने की सलाह दी। साथ ही धनिक पुत्र की पत्नी को वापिस उनके मायके भी छोड़ आने के लिए भी कहा। जिसके बाद उन तीनों ने नियमित रूप से प्रदोष व्रत का पालन किया। जिसके फलस्वरूप तनिक पुत्र ठीक हो गया।
मंगल प्रदोष पूजा मुहूर्त 2025 (Mangal Pradosh Puja Muhurat 2025)
भौम प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त 25 फरवरी की शाम 6 बजकर 18 मिनट से रात 8 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में प्रदोष व्रत की पूजा बेहद शुभ फलदायी मानी जाती है।
मंगल व्रत पूजन विधि (Mangal Pradosh Vrat Puja Vidhi)
- भौम प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
- इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की विधि विधान पूजा करें।
- इस दिन शिवलिंग पर भांग, बेल पत्र, धतूरा, इत्यादि चीजें चढ़ाने का विशेष महत्व माना जाता है।
- इसके बाद भगवान शिव का गंगा जल से अभिषेक करें।
- फिर भोलेनाथ के मंत्रों का जाप करें।
- भगवान शिव को चंदन लगाएं।
- अंत में शिव जी की आरती उतारें और उन्हें भोग अवश्य अर्पित करें।
- इस दिन प्रदोष व्रत की कथा भी जरूर सुनें।
मंगल प्रदोष व्रत का महत्व (Mangal Pradosh Vrat Mahatva)
कहते हैं जो कोई भी सच्चे मन से भौम प्रदोष व्रत रखता है उसे आर्थिक संकट से छुटकारा मिल जाता है। इतना ही नहीं नियमित रूप से इस व्रत का पालन करने पर व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों से भी मुक्ति मिल जाती है।
