Ganesh Ji ki Aarti (गणेश जी की आरती): किसी भी धार्मिक अनुष्ठान, हवन, पूजा या मांगलिक कार्य को प्रारंभ करने से पहले भगवान गणेश जी की आराधना आवश्यक मानी जाती है। गणेश जी की आरती श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक शुद्धता, सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि का प्रतीक होती है। गणेश जी की आरती के माध्यम से भक्त भगवान गणेश सहित भगवान शिव और माता पार्वती से भी आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन में नई सफलताएं प्राप्त कर सकते हैं। महाशिवरात्रि शिव-शक्ति के विवाह के उपलक्ष्य में मनाया जाता है, जिस दिन भोलेनाथ सहित उनके परिवार की भी विधि-विधान से पूजा होती है। इस दिन भक्त श्रद्धापूर्वक व्रत रखकर भगवान शिव से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं जिसमें आरती-मंत्र भी पढ़े और गाए जाते हैं, जिनमें से एक भगवान गणेश की आरती भी है। यहां पढ़िए गणेश जी की आरती।
Ganesh Ji ki Aarti (गणेश जी की आरती)-
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
Sukhkarta Dukhharta lyrics in Hindi (सुखकर्ता दुखहर्ता लिरिक्स हिंदी में)-
सुख करता दुखहर्ता, वार्ता विघ्नाची
नूर्वी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची
सर्वांगी सुन्दर उटी शेंदु राची
कंठी झलके माल मुकताफळांची
जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति
जय देव जय देव
रत्नखचित फरा तुझ गौरीकुमरा
चंदनाची उटी कुमकुम केशरा
हीरे जडित मुकुट शोभतो बरा
रुन्झुनती नूपुरे चरनी घागरिया
जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति
जय देव जय देव
लम्बोदर पीताम्बर फनिवर वंदना
सरल सोंड वक्रतुंडा त्रिनयना
दास रामाचा वाट पाहे सदना
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवर वंदना
जय देव जय देव, जय मंगल मूर्ति
दर्शनमात्रे मनःकमाना पूर्ति
जय देव जय देव
शेंदुर लाल चढायो अच्छा गजमुख को
दोन्दिल लाल बिराजे सूत गौरिहर को
हाथ लिए गुड लड्डू साई सुरवर को
महिमा कहे ना जाय लागत हूँ पद को
जय जय जय जय जय
जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव
अष्ट सिधि दासी संकट को बैरी
विघन विनाशन मंगल मूरत अधिकारी
कोटि सूरज प्रकाश ऐसे छबी तेरी
गंडस्थल मद्मस्तक झूल शशि बहरी
जय जय जय जय जय
जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव
भावभगत से कोई शरणागत आवे
संतति संपत्ति सबही भरपूर पावे
ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे
गोसावीनंदन निशिदिन गुण गावे
जय जय जी गणराज विद्यासुखदाता
धन्य तुम्हारो दर्शन मेरा मत रमता
जय देव जय देव
Ganesh Ji ki Aarti Ka Mahatva (गणेश जी की आरती का महत्व)
महाशिवरात्रि जैसे पावन पर्व पर भगवान गणेश की आरती करने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इससे घर में सुख-समृद्धि आती है और विघ्न भी दूर होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश को बुद्धि और विवेक का प्रतीक माना जाता है। इनकी आरती करने से ऐश्वर्य और यश भी मिलता है। ऐसा कहा जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन गौरीनंदन की उपासना करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
