Bhado Masik Shivratri Vrat Katha, मासिक शिवरात्रि व्रत कथा, कहानी इन हिंदी : हिंदू पंचांग के अनुसार भादो मास की मासिक शिवरात्रि कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। 9 सितंबर से चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होगी, वहीं उदयातिथि के अनुसार चतुर्दशी 10 सितंबर को है। शिवरात्रि के दिन दोपहर से भद्रा क प्रारंभ हो रहा है। मासिक शिवरात्रि के दिन भगवान शिव के भक्त इस दिन व्रत रखते हैं, शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं, बेलपत्र अर्पित करते हैं और श्रद्धा के साथ भोलेनाथ की पूजा करते हैं।
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मान्यता है कि शिवरात्रि के दिन पूजा के साथ व्रत कथा सुनने या पढ़ने से पूजा का भाव और गहरा होता है। भादो मास की शिवरात्रि पर शिकारी चित्रभानु की कथा विशेष रूप से सुनाई जाती है। यहां पढ़ें भादो की मासिक शिवरात्रि व्रत कथा, कथा इन हिंदी, कहानी, भाद्रपद मासिक शिवरात्रि की पूजा विधि क्या है।
Bhado Masik Shivratri Vrat Katha, मासिक शिवरात्रि व्रत कथा, कहानी इन हिंदी
पौराणिक कथा के अनुसार, बहुत समय पहले चित्रभानु नाम का एक शिकारी रहता था। वह जंगल में जानवरों का शिकार करके अपने परिवार का पेट पालता था। उसका जीवन शिकार के इर्द-गिर्द ही चलता था और स्वभाव भी काफी कठोर था। इसके अलावा वह एक साहूकार का कर्जदार था। समय पर कर्ज नहीं चुका पाने के कारण साहूकार ने उसे पकड़कर एक शिव मठ में बंद कर दिया।
संयोग से उस दिन शिवरात्रि थी। चित्रभानु पूरे दिन मठ में ही बंद रहा। उसने न तो खाना खाया और न ही पानी पिया। वहां भगवान शिव की पूजा हो रही थी और शिवरात्रि की कथा भी सुनाई जा रही थी। चित्रभानु ने दिनभर वह कथा सुनी। इस तरह बिना किसी संकल्प के उसका उपवास भी हो गया।
शाम को साहूकार ने उसे इस शर्त पर छोड़ दिया कि वह अगले दिन उसका पूरा कर्ज चुका देगा। आजाद होते ही चित्रभानु शिकार की तलाश में जंगल की ओर निकल पड़ा। काफी देर तक घूमने के बाद भी उसे कोई शिकार नहीं मिला। रात हो गई तो वह एक तालाब के पास पहुंचा। वहां एक बेल का पेड़ देखकर वह उस पर चढ़ गया और रात बिताने के लिए वहीं बैठ गया।
चित्रभानु को यह मालूम नहीं था कि जिस पेड़ पर वह बैठा है, उसके नीचे एक शिवलिंग मौजूद है। शिवलिंग बेल के पत्तों से ढका हुआ था। शिकारी के पास पानी से भरा एक पात्र भी था। वह रातभर शिकार का इंतजार करता रहा।
रात के पहले पहर एक गर्भवती हिरणी तालाब पर पानी पीने आई। चित्रभानु ने जैसे ही उसे देखा, वह उसे मारने के लिए धनुष पर बाण चढ़ाने लगा। धनुष उठाते समय बेल के कुछ पत्ते टूटकर नीचे गिर गए। साथ ही उसके पास रखे पानी की कुछ बूंदें भी शिवलिंग पर गिर पड़ीं। इस तरह अनजाने में ही शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित हो गए।
हिरणी ने शिकारी को देखा तो डर गई। उसने उससे अपने प्राण न लेने की विनती की। उसने कहा कि वह गर्भवती है और अगर उसे मार दिया गया तो उसके बच्चे की भी जान चली जाएगी। उसने भरोसा दिलाया कि बच्चे को जन्म देने के बाद वह वापस लौट आएगी। हिरणी की बात सुनकर चित्रभानु के मन में पहली बार दया का भाव जागा और उसने उसे जाने दिया।
रात का दूसरा पहर शुरू हुआ तो एक दूसरी हिरणी तालाब पर पानी पीने पहुंची। चित्रभानु ने उसे भी अपना शिकार बनाने के लिए धनुष उठाया। इस बार भी बेल के पत्ते और पानी की बूंदें शिवलिंग पर जा गिरीं। हिरणी ने शिकारी से कहा कि वह अपने साथी की तलाश में है। पहले वह उससे मिलना चाहती है और उसके बाद वापस आने का वचन देती है। चित्रभानु ने उसे भी छोड़ दिया।
तीसरे पहर एक और हिरणी अपने बच्चों के साथ तालाब पर आई। चित्रभानु ने फिर धनुष उठाया। उसके ऐसा करते ही बेलपत्र और जल तीसरी बार शिवलिंग पर अर्पित हो गए। हिरणी ने अपने बच्चों को उनके पिता के पास पहुंचाने और फिर वापस आने की बात कही। इस बार भी शिकारी ने उन्हें जाने दिया। अब तक चित्रभानु के मन में काफी बदलाव आ चुका था। जो व्यक्ति कुछ समय पहले तक जानवरों का शिकार करने के लिए तैयार रहता था, वह लगातार तीन बार किसी जीव को जीवनदान दे चुका था।
रात के आखिरी पहर एक बड़ा हिरण तालाब के पास आया। चित्रभानु को लगा कि अब उसे भोजन मिल जाएगा। उसने हिरण को निशाना बनाने के लिए धनुष उठाया। इस बार भी बेलपत्र और जल शिवलिंग पर गिर पड़े। इस तरह शिवरात्रि के चारों पहर में अनजाने में शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ गए।
हिरण ने चित्रभानु से अपनी पत्नियों के बारे में पूछा। शिकारी ने उसे बताया कि वह तीनों हिरणियों को छोड़ चुका है। हिरण ने कहा कि अगर उसकी पत्नियों को जीवनदान दिया गया है तो वह भी उनके बिना जीवित नहीं रहना चाहता। उसने शिकारी से केवल इतना कहा कि उसे एक बार अपनी पत्नियों से मिलने का अवसर दिया जाए।
हिरण की बात सुनकर चित्रभानु का मन पूरी तरह बदल गया। उसके भीतर करुणा जाग चुकी थी। उसने धनुष नीचे रख दिया और हिरण को भी मारने से इनकार कर दिया। पौराणिक मान्यता के अनुसार, चित्रभानु के इस बदलाव से भगवान शिव प्रसन्न हुए। उन्होंने उसे दर्शन दिए और आशीर्वाद दिया। कहा जाता है कि भगवान शिव ने उसे ‘गुह’ नाम दिया और मोक्ष का वरदान प्रदान किया। धार्मिक मान्यता में आगे चलकर इसी गुह को भगवान श्रीराम के मित्र राजा गुह से जोड़ा जाता है।
भादो मासिक शिवरात्रि पूजा विधि
मासिक शिवरात्रि के दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान शिव का ध्यान करें। शिवलिंग पर पहले जल चढ़ाएं, फिर दूध, बेलपत्र, अक्षत, फूल और धतूरा अर्पित करें। इसके बाद शिव मंत्र का जाप करें, धूप-दीप जलाएं और आरती करें। श्रद्धा से व्रत कथा पढ़ना भी शुभ माना जाता है।
