Eid Ul Adha Namaz Ka Tarika Step By Step : Eid al-Adha की नमाज सामान्य नमाज से थोड़ी अलग होती है। ईद-उल-अजहा की नमाज में 2 रकात होती हैं और इसमें 6 अतिरिक्त तकबीरें कही जाती हैं। इस नमाज को ईदगाह या मस्जिद में जमात के साथ अदा किया जाता है। साल 2026 में भारत में बकरीद 28 मई, गुरुवार को मनाई जा रही है। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार 18 मई 2026 को जिलहिज्जा महीने का चांद दिखाई दिया था। इसके बाद 10वीं तारीख को ईद-उल-अजहा का त्योहार मनाया जा रहा है। इस दिन पुरुष मस्जिदों में जाकर नमाज पढ़ते हैं। वहीं, महिलाएं घर पर ही पांच वक्त की नमाज अदा करती है। इस दिन मुसलमान सुबह विशेष नमाज अदा करते हैं, जिसके बाद कुर्बानी की जाती है। आइए आसान भाषा में स्टेप बाय स्टेप जानते हैं कि बकरीद की नमाज कैसे पढ़ी जाती है।
बकरीद की नमाज का तरीका
ईद-उल-अजहा की नमाज से पहले क्या करें
ईद की नमाज से पहले सुबह जल्दी उठकर गुस्ल यानी स्नान करना सुन्नत माना गया है। इसके बाद साफ और अच्छे कपड़े पहनें। पुरुष इत्र लगा सकते हैं। नमाज के लिए जाते समय रास्ते में तकबीर पढ़ना भी अच्छा माना जाता है। ईदगाह या मस्जिद पहुंचकर शांति से बैठें और नमाज शुरू होने का इंतजार करें। ईद की नमाज आमतौर पर सूर्योदय के कुछ समय बाद पढ़ी जाती है। अलग-अलग शहरों में इसका समय अलग हो सकता है।
ईद-उल-अजहा की नमाज में कितनी तकबीर होती हैं
ईद की नमाज में कुल 6 अतिरिक्त तकबीरें कही जाती हैं। पहली रकात में 3 और दूसरी रकात में 3 तकबीरें होती हैं। इन तकबीरों के कारण ईद की नमाज सामान्य नमाज से अलग मानी जाती है।
ईद-उल-अजहा नमाज की नियत कैसे करें (Namaz Ki Niyat Kaise Kare)
नमाज शुरू करने से पहले नियत बांधी जाती है। आमतौर पर इमाम साहब नियत बोलकर भी बताते हैं, लेकिन जिसे याद न हो वह दिल में यह इरादा कर सकता है कि 'जो नियत इमाम की वही मेरी है।'
पूरा तरीका इस प्रकार माना जाता है —
'आऊजू बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम, बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम।
मैं नियत करता हूं दो रकात नमाज ईद-उल-अजहा की, छः जायेद तकबीरों के साथ, वास्ते अल्लाह तआला के, पीछे इस इमाम के, रुख मेरा काबा शरीफ की तरफ, अल्लाहु अकबर।'
ईद-उल-अजहा की पहली रकात का तरीका
सबसे पहले नियत बांधें। इमाम साहब 'अल्लाहु अकबर' कहेंगे, तब दोनों हाथ कान तक उठाकर हाथ बांध लें। इसके बाद सना यानी 'सुब्हानकल्लाहुम्मा…' पूरी पढ़ें। ईद की नमाज में सना पढ़ना बहुत जरूरी माना जाता है। अब अतिरिक्त तकबीरें शुरू होंगी। पहली बार 'अल्लाहु अकबर' कहने पर हाथ कान तक उठाकर छोड़ दें। दूसरी बार भी ऐसा ही करें। तीसरी बार 'अल्लाहु अकबर' कहने पर हाथ उठाकर बांध लें।
इसके बाद इमाम साहब तअव्वुज यानी 'आऊजू बिल्लाह…' और तस्मियह यानी 'बिस्मिल्लाह…' पढ़ेंगे। फिर सूरह फातिहा पढ़ी जाएगी। इसके बाद कोई दूसरी सूरह पढ़ी जाएगी।
अब 'अल्लाहु अकबर' कहते हुए रुकू में जाएंगे। रुकू में कम से कम तीन बार 'सुब्हान रब्बियल अज़ीम' पढ़ें। फिर इमाम द्वार कहे गए 'समिअल्लाहु लिमन हमिदह' पर रुकू से उठें और बाकी नमाजी रुकू से उठते समय 'रब्बना लक़ल हम्द' कहें।
इसके बाद सजदे में जाएं और कम से कम तीन बार 'सुब्हान रब्बियल अअला' पढ़ें। पहला सजदा पूरा करने के बाद बैठें और फिर दूसरा सजदा करें। इसके बाद दूसरी रकात के लिए खड़े हो जाएं।
ईद-उल-अजहा की दूसरी रकात का तरीका
दूसरी रकात में इमाम साहब पहले सूरह फातिहा और फिर कोई दूसरी सूरह पढ़ेंगे। इसके बाद अतिरिक्त तकबीरें कही जाएंगी। पहली बार 'अल्लाहु अकबर' कहने पर हाथ उठाकर छोड़ दें। दूसरी बार भी ऐसा ही करें। तीसरी बार भी हाथ उठाकर छोड़ दें।
अब चौथी बार 'अल्लाहु अकबर' कहते हुए बिना हाथ उठाए सीधे रुकू में चले जाएं। रुकू में 'सुब्हान रब्बियल अज़ीम' पढ़ें। फिर रुकू से उठते समय 'समिअल्लाहु लिमन हमिदह' और 'रब्बना लक़ल हम्द' कहें। इसके बाद दो सजदे करें।
सजदे में कम से कम तीन बार 'सुब्हान रब्बियल अअला' पढ़ें। अब बैठकर अत्तहिय्यात पढ़ी जाती है। अत्तहिय्यात में 'ला' पर उंगली उठाई जाती है और 'इल्लल्लाह' पर वापस नीचे कर ली जाती है।
इसके बाद दुरूदे इब्राहीम और 'रब्बना आतिना फिद्दुन्या…' पढ़ा जाता है। अंत में दाईं और बाईं तरफ 'अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह' कहते हुए सलाम फेरा जाता है और नमाज पूरी हो जाती है।
नमाज के बाद क्या किया जाता है
नमाज पूरी होने के बाद इमाम साहब खुत्बा पढ़ते हैं। ईद के खुत्बे को ध्यान से सुनना जरूरी माना गया है। इसके बाद लोग एक-दूसरे को गले लगाकर बकरीद की मुबारकबाद देते हैं। इसके बाद कुर्बानी की प्रक्रिया शुरू होती है। इस्लाम में कुर्बानी को त्याग, अल्लाह की राह में समर्पण और जरूरतमंदों की मदद का प्रतीक माना जाता है।
ईद की नमाज पढ़ते समय इन बातों का ध्यान रखें
नमाज के दौरान जल्दबाजी न करें। इमाम की हर तकबीर और हर अमल को ध्यान से फॉलो करें। अगर किसी को तरीका याद न हो तो आसपास के लोगों को देखकर आसानी से नमाज अदा की जा सकती है। ईद की नमाज में सबसे जरूरी बात यह मानी जाती है कि नियत के बाद सना जरूर पढ़ें और अतिरिक्त तकबीरों का क्रम न भूलें। यही चीज ईद की नमाज को सामान्य नमाज से अलग बनाती है।
