अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर 25 नवंबर को धर्म ध्वज फहराया जाना है। स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वैदिक मंत्रोच्चार के बीच ध्वज पताका फहराएंगे। राम मंदिर के शिखर की शोभा बढ़ाने वाला यह ध्वज बेहद खास है। ध्वज की लंबाई 22 फीट और चौड़ाई 11 फीट है। इसे मंदिर के शिखर पर लगे 42 फीट ऊंचे ध्वजदंड पर लगाया जाएगा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मंदिर के शिखर पर ध्वज क्यों लगाया जाता है। आइए जानते हैं इसका जवाब:
भारत की सनातन संस्कृति में मंदिर केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि ऊर्जा, आस्था और अध्यात्म का केंद्र होता है। मंदिर के ऊपर लहराता हुआ ध्वज इस आस्था का प्रतीक माना जाता है। इसीलिए हर छोटे-बड़े मंदिर के शिखर पर ध्वज अवश्य लगा होता है। इसके और भी कई महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कारण हैं:
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ध्वज भगवान की उपस्थिति का संकेत है
मंदिर के शिखर पर लहराता ध्वज यह बताता है कि यहां भगवान विराजमान हैं। पहले के समय में जब बड़े-बड़े जंगलों और गांवों में मंदिर होते थे, तो लोग दूर से ही ध्वज देखकर अंदाजा लगा लेते थे कि यहां ईश्वर का स्थान है। यह दिशा निर्देश का तरीका भी था।
सकारात्मक और दिव्य ऊर्जा का प्रतीक
ध्वज का लगातार हवा में लहराना ऊर्जा का सूचक माना जाता है। माना जाता है कि ध्वज पर मंत्रों का प्रभाव होता है और हवा के साथ यह ऊर्जा चारों दिशाओं में फैलती है। यही कारण है कि मंदिरों में ध्वज बदलने को शुभ माना जाता है।
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ध्वज बुरी शक्तियों को दूर रखने वाला कवच
भारतीय संस्कृति में ध्वज को रक्षा कवच माना गया है। लाल, भगवा, पीला या सफेद ध्वज भगवान की शक्ति का प्रतीक है। कहा जाता है कि जब ध्वज ऊंचाई पर लहराता है तो नकारात्मक शक्तियां उस क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर पातीं।
मंदिर की रक्षा का प्रतीक
राजाओं के समय में किले और मंदिर दोनों पर ध्वज लगाए जाते थे। किले में ध्वज शक्ति का प्रतीक और मंदिर में यह धर्म की रक्षा का प्रतीक माना जाता था। आज भी यह परंपरा चली आ रही है।
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हर देवता के अनुसार ध्वज का रंग और चिह्न
हर देवता के ध्वज का रंग और आकार अलग माना गया है। जिस देवता का मंदिर होगा उसी हिसाब से मंदिर के शिखर पर ध्वज भी नजर आएगा।
एक मत ये भी
मंदिर के ऊपर ध्वजा लगाने के पीछे कुछ लोगों का मत ये भी है कि झंडा और ध्वज स्तंभ पृथ्वी और ब्रह्मांड के बीच की कड़ी है। मान्यता है कि ध्वज स्तंभ धरती (भौतिक लोक), आकाश (दैविक लोक) और पाताल (अधोलोक) को जोड़ने वाली एक ब्रह्मांडीय धुरी है। ऐसा माना जाता है कि ध्वज की हर फड़फड़ाहट ब्रह्मांडीय शक्तियों को सक्रिय करती है और वहां उपस्थित भक्तों तक शुभ, सकारात्मक और रक्षक ऊर्जा पहुंचाती है।
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ध्वज के रंग और आकार का मतलब
मंदिरों के शिखर पर लगे ध्वज के रंग और आकार का भी अपना धार्मिक महत्व है। जैसे भगवान विष्णु का जो मंदिर होगा उसके शिखर पर आपको पीला या गरुड़ चिन्ह वाला ध्वज दिखेगा। शिवालयों पर यह ध्वज भगवा या काले रंग का होता है। वहीं देवी शक्तियों के पीठ पर लाल ध्वज फहराता है। इनका अर्थ है कि जिस रूप में ईश्वर स्थापित हैं, उस रूप की ऊर्जा ध्वज से आसपास फैलती है।
ध्वज लगाने के नियम
शास्त्रों में मंदिर के शिखर पर ध्वज लगाने के कुछ नियम बताए गए हैं। इन नियमों में से कुछ प्रमुख नियम इस प्रकार से हैं:
1. ध्वज मंदिर का सर्वोच्च चिन्ह है, इसलिए यह हमेशा सबसे ऊंची जगह, शिखर या कलश के ऊपर लगाया जाता है।
2. ध्वज सूर्योदय से पहले या सूर्योदय के बाद लगाया जाए। अधिकतर परंपराओं में ध्वज सुबह के शुभ समय में बदला जाता है। रात में ध्वज बदलना शुभ नहीं माना जाता।
3. ध्वज हमेशा दाईं दिशा में फहरना चाहिए। क्योंकि मंदिर वास्तु के अनुसार दाईं ओर का प्रतीक शुभ और देवस्थान की पहचान माना गया है।
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4. ध्वज चढ़ाने वाला व्यक्ति शुद्ध होना चाहिए। वह स्नान कर के साफ कपड़े पहने। उसे मन में शुद्ध भाव रखना चाहिए।
5 . ध्वज पर मंदिर के इष्ट देव से संबंधित प्रतीक या रंग अंकित होना चाहिए। जैसे, भगवान विष्णु के मंदिर में गरुड़ की छवि या शिव मंदिर में नंदी की तस्वीर हो सकती है।
25 नवंबर को 191 फीट की ऊंचाई पर जब सनातन परंपरा का प्रतीक ये ध्वज लहराएगा तो राम दिव्य राम मंदिर की शोभा और भी बढ़ जाएगी।
कैसा होगा राम मंदिर पर लगने वाला ध्वज
अयोध्या में राम मंदिर पर फहराए जाने वाले धर्म ध्वज का रंग केसरिया होगा। दरअसल सनातन परंपरा में केसरिया त्याग, बलिदान, वीरता और भक्ति का प्रतीक है। यह रंग भगवान राम के कुल रघुवंश का भी रंग है। ध्वज पर पवित्र कोविदार वृक्ष और 'ऊं' की छवि रहेगी।
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बता दें कि शास्त्रों में कोविदार वृक्ष पारिजात और मंदार जैसे दिव्य वृक्षों के संयोग से बना एक पवित्र वृक्ष माना गया है। वेद पुराओं की मानें तो सूर्यवंश के राजाओं के ध्वज पर इसी वृक्ष का प्रतीक अंकित रहता था। वाल्मीकि रामायण में बताया गया है कि जब वनवास पर निकले भगवान राम से मिलने भरत आए थे तो उनकी पताका पर भी
