Happy Ambedkar Jayanti 2025: “मैं हिंदू के रूप में पैदा हुआ हूं, लेकिन मरूंगा नहीं...” ऐसा धर्म चाहते थे भीमराव अंबेडकर, इसलिए अपनाया था बौद्ध धर्म

Ambedkar Jayanti 2025: हर साल 14 अप्रैल 2025 को भीमराव अंबेडकर की जयंती मनाई जाती है। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के धर्म को लेकर काफी अलग विचार थे। वे जन्म से हिंदू थे लेकिन उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया था। जानिए उन्होंने किस कारण छोड़ा था हिंदू धर्म और अन्य धर्मों को लेकर उनके क्या विचार थे।

Ambedkar Jayanti 2025: डॉ. भीमराव अंबेडकर जन्म से हिंदू थे लेकिन अपने जीवन के आखिरी सालों में उन्होंने तय कर लिया था कि वो एक हिंदू के तौर पर नहीं मरेंगे। अपना धर्म बदलने से पहले उन्होंने सिख, ईसाई और इस्लाम हर धर्म के बारे में गहराई से अध्ययन किया। इसके बाद 14 अक्टूबर 1956 को उन्होंने नागपुर की दीक्षाभूमि में अपने 3 लाख 65 हजार फॉलोअर्स के साथ बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया। डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की जयंती पर जानते हैं उनके सभी धर्मों को लेकर क्या विचार थे और बौद्ध धर्म की किन बातों ने उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित किया।

Ambedkar Jayanti 2025

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भीमराव अंबेडकर ने क्यों छोड़ा था हिंदू धर्म?

बचपन से ही जाति प्रथा का दंश झेल चुके भीमराव अंबेडकर ने हिंदू धर्म छोड़ने का निर्णय लिया। अंबेडकर का कहना था, मुझे एक ऐसा धर्म पसंद है जो स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व सिखाता है, क्योंकि किसी भी व्यक्ति के विकास के लिए इन तीन चीजों की आवश्यकता होती है। भीमराव अंबेडकर जी का कहना था कि धर्म मनुष्य के लिए है न कि मनुष्य धर्म के लिए। उस दौर में जाति प्रथा के चलते उन्हें हिंदू धर्म में इन तीनों चीजों का अभाव महसूस हुआ। ऐसे में 14 अक्टूबर 1956 को डॉक्टर भीमराव अंबेडकर ने हिंदू धर्म को छोड़कर बौद्ध धर्म अपना लिया था।

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