Aja Ekadashi Vrat Katha In Hindi (अजा एकादशी व्रत कथा): अजा एकादशी हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी और मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशियों में से एक मानी जाती है। ये व्रत हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है और भगवान विष्णु की उपासना के लिए समर्पित होता है। इस साल अजा एकादशी 19 अगस्त को है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखने और भगवन्नाम का स्मरण करने से समस्त पापों का नाश होता है और आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन पूजा और व्रत के अलावा कथा पढ़ने का भी विशेष महत्व होता है। यहां से आप एकादशी की व्रत कथा पढ़ सकते हैं और इसके महत्व के बारे में जान सकते हैं।
अजा एकादशी व्रत की कहानी (Aja Ekadashi vrat kahani)-
पौराणिक कथा के अनुसार हरिश्चंद्र बेहद प्रतापी, दयालु और सत्यवादी राजा थे। कुछ बुरे परिस्थिति आने की वजह से उनका सारा साम्राज उनके हाथों से छिन गया। यहां तक की उनकी स्त्री-पुत्र परिवार भी उनसे दूर हो गए। वह खुद को बेचारा बनकर एक चांडाल के घर नौकर का जीवन यापन करने लगें। एक दिन की बात है,राजा हरिश्चंद्र बहुत ही उदास बैठे थे। तभी उधर से गौतम ऋषि गुजर रहे थे। जब ऋषि ने राजा को उदास देखा, तो वह उनसे उनकी उदासी का कारण पूछने लगे।
तब राजा ने अपनी सारी व्यथा ऋषि गौतम को बताएं और इससे इस पीड़ा से मुक्ति पाने का उपाय भी पूछा। तब ऋषि राजा से कहें कि तुम अजा एकादशी का व्रत विधि- विधान से करों। व्रत के प्रभाव से तुम्हारे जीवन के सभी पाप नष्ट हो जाएंगे और तुम्हें इस पीड़ा से मुक्ति मिल जाएगी। ऋषि की यह बात सुनकर राजा हरिश्चंद्र अजा एकादशी के दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु का पूजन उपवास रखकर किया। उन्होंने रात भर जागरण करके भगवान का ध्यान भी किया। व्रत के प्रभाव से राजा हरिश्चंद्र के सभी पाप नष्ट हो गए और उन्हें दोबारा से परिवार राज पाट सभी प्राप्त हो गए। मृत्यु के पश्चात राजा हरिश्चंद्र को बैकुंठ धाम की प्राप्ति भी हुई।
