Ahoi Ashtami Sargi Time 2025 (अहोई अष्टमी सरगी टाइम 2025): अहोई अष्टमी के दिन माताएं अपनी संतान के लिए निर्जला उपवास करती हैं। कहते हैं कि इस व्रत को करने से देवी पार्वती अपने दोनों पुत्र गणपति और कार्तिकेय के समान अपने भक्तों की संतान की भी रक्षा करती हैं। यह भी मान्यता है कि जिन महिलाओं की गोद खाली होती है वह भी इस व्रत को करती हैं, ताकि उन्हें भी संतान की प्राप्ति हो सके। आज अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाएगा। व्रत रखने से पहले सरगी खाने की परंपरा है। यहां से आप इस व्रत की सरगी का समय जान सकते हैं और साथ ही ये भी जान सकते हैं कि सरगी में क्या-क्या खा सकते हैं।
अहोई अष्टमी की सरगी कितने बजे होगी 2025 में?
अहोई अष्टमी की सरगी उस दिन सवेरे सूर्योदय से पहले होती है, जिस दिन व्रत रखा जाता है। आज सूर्योदय का समय 6 बजकर 21 मिनट का है तो आपको इस समय से पहले ही सरगी खा लेनी है। वैसे सरगी का शुभ समय लगभग 4:30 AM से 5:45 AM के बीच है।
अहोई अष्टमी की सरगी में क्या खाना चाहिए?
- सूखे मेवे
- फल
- हलवा
- दूध
- दही
- बिना प्याज-लहसुन वाली आलू की सब्जी और पूड़ी
- चना और सफेद तिल का प्रसाद
अहोई अष्टमी की पूजा का समय
अहोई अष्टमी का पूजा आज शाम 5 बजकर 53 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर 8 मिनट तक की जा सकती है। यानी अहोई अष्टमी की पूजा के लिए आज 1 घंटा 15 मिनट का समय मिलेगा।
अहोई अष्टमी पूजा विधि
अहोई अष्टमी की शाम में दीवार पर अष्ट कोष्ठक की अहोई की पुतली रंग भर कर बनाएँ। उस पुतली के पास सेई (स्याऊ) तथा सेई के बच्चों का चित्र भी बनायें या छपी हुई अहोई अष्टमी का चित्र मंगवाकर दीवार पर लगाएं तथा पूजन कर सूर्यास्त के बाद अर्थात् तारे निकलने पर अहोई माता की पूजा करने से पहले पृथ्वी को पवित्र करके चौक पूज कर एक लोटा जल भरकर एक पटले पर कलश की भाँति रखकर पूजा करें। अहोई माता का पूजन करके माताएं कहानी सुनें। पूजा के लिए माताएं पहले से एक चांदी की अहोई बनायें जिसे स्याऊ कहते हैं और उसमें चांदी के दो दाने (मोती डलवा लें) जिस प्रकार गले में पहनने के हार में पैंडिल लगा होता है उसी की भांति चांदी की अहोई ढलवा लें ओर डोरे में चांदी के दाने डलवा लें। फिर अहोई की रोली, चावल दूध व भात से पूजा करें। जल से भरे लोटे पर सतिया बना लें एक कटोरी में हलवा तथा रुपये बायना निकाल कर रख लें और सात दाने गेहूं के लेकर कहानी सुने। कहानी सुनने के बाद अहोई स्याऊ की माला गले में पहन लें। जो बायना निकालकर रखा था, उसे सासू जी के पांव लगाकर श्राद्ध पूर्वक उन्हे दे देवें। इसके बाद चन्द्रमा को अर्घ्य देकर भोजन करे। दीवाली के बाद किसी शुभ दिन अहोई को गले से उतारकर उसका गुड़ से भोग लगावे और जल के छीटे देकर मस्तक झुकाकर रख दे। जितने बेटे हैं उतनी बार तथा जितने बेटों का विवाह हो गया हो उतनी बार चांदी के 2-2 दाने अहोई में डालती जावें ऐसा करने से अहोई माता प्रसन्न हो बच्चों की दीर्घायु करके घर में नित नये मंगल करती रहती हैं। इस दिन पंडितों को पेठा दान करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
