Navratri 2026 Day 6 Today (aaj kaun si devi ka din hai navratri mein): शारदीय नवरात्रि का पर्व 9 दिनों तक चलता है। इन 9 दिनों में मां दुर्गा के साथ-साथ उनके 9 स्वरूपों देवी शैलपुत्री, देवी ब्रह्मचारिणी, देवी चंद्रघंटा, देवी कूष्मांडा, देवी स्कंदमाता, देवी कात्यायिनी, देवी कालरात्रि, देवी महागौरी और देवी सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। माता रानी का प्रत्येक स्वरूप अपने आप में दिव्य और अलौकिक है, जिनके पीछे ब्रह्मांड के कल्याण, अधर्म के नाश और भक्तों की रक्षा से जुड़ी प्रेरणादायक कथाएं हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार, आज 16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को नवरात्रि का छठा दिन है, जो कि मां दुर्गा के छठे स्वरूप को समर्पित है।
यहां पर आप जानेंगे कि आज शारदीय नवरात्रि के छठे दिन किस देवी की पूजा की जाएगी, आज पूजी जाने वाली देवी का स्वरूप क्या है, आज किस समय और कैसे माता रानी की पूजा करना शुभ रहेगा।
आज कौन सी देवी की पूजा की जाएगी
शारदीय नवरात्रि का छठा दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप देवी कात्यायनी को समर्पित है। ऐसे में आज मां कात्यायनी की पूजा की जाएगी। देवी कात्यायनी का जन्म महर्षि कात्यायन की पुत्री के रूप में हुआ था। महर्षि कात्यायन मां भगवती के बहुत बड़े भक्त थे। उन्होंने माता रानी से वरदान मांगा था कि वो उनकी पुत्री के रूप में जन्म लें। इसके बाद माता भगवती का जन्म ब्रह्मा, विष्णु और शिव यानी त्रिदेवों के तेज से हुआ और वो महर्षि कात्यायन की पुत्री कहलाईं।
देवी कात्यायनी का स्वरूप कैसा है
पौराणिक शास्त्रों में देवी कात्यायनी को अत्यंत तेजस्वी, भव्य और दिव्य दर्शाया गया है। मां की सवारी सिंह है और उनकी 4 भुजाएं हैं। माता के एक बाएं हाथ में तलवार है, जबकि दूसरे बाएं हाथ में कमल का फूल सुशोभित है। इसके अलावा एक दाहिना हाथ अभय मुद्रा में और दूसरा दाहिना हाथ वरद मुद्रा में है।
आज किस समय करें मां कात्यायनी की पूजा
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:42 बजे से लेकर सुबह 5:32 बजे तक
- प्रातः संध्या: सुबह 5:07 बजे से लेकर सुबह 6:22 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से लेकर दोपहर 12:29 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:51 बजे से लेकर शाम 6:16 बजे तक
- सायाह्न संध्या: शाम 5:51 बजे से लेकर शाम 7:06 बजे तक
- अमृत काल: 17 अक्टूबर की सुबह 2:35 बजे से लेकर सुबह 4:23 बजे तक
- निशिता मुहूर्त: रात 11:42 बजे से लेकर सुबह 12:32 बजे तक
कात्यायनी देवी की पूजा विधि
- सुबह स्नान आदि कार्य करने के बाद लाल या पीले रंग के कपड़े पहनें।
- घर के मंदिर में गंगाजल का छिड़काव करें, जिससे वह स्थान पवित्र हो जाए।
- मंदिर में स्थापित मां दुर्गा की मूर्ति के साथ देवी कात्यायनी की तस्वीर स्थापित करें।
- मां दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों का स्मरण करने के बाद पूजा और व्रत का संकल्प लें।
- देवी को रोली, अक्षत, फूल, वस्त्र, श्रृंगार का सामान, फल और भोग अर्पित करें।
- मंत्रों का जाप करने के बाद घी का दीपक जलाएं।
- मां कात्यायनी की प्रार्थना, स्तुति, स्तोत्रम्, कवच और चालीसा आदि पढ़ें।
- नवरात्रि के छठे दिन के व्रत की कथा पढ़ने के बाद आरती करें।
- शाम को एक बार फिर देवी कात्यायनी की पूजा करें, जिसके पश्चात आप व्रत का पारण कर सकते हैं।
कात्यायनी देवी की प्रिय चीजें क्या हैं
मां कात्यायनी को पुष्प में गुलाब के फूल, फल में केला और भोग में शहद अति प्रिय हैं। इसके अलावा देवी का प्रिय रंग लाल है, जबकि पसंदीदा मंत्र 'ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥' है।
