मार्किंग स्कीम एक ऐसा गाइड है, जिससे छात्रों को पता चलता है कि परीक्षा में किसी सवाल के जवाब के लिए कितने अंक मिलेंगे और उत्तर में किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है। इसमें सवालों के अंक, जरूरी पॉइंट्स और उत्तर जांचने का तरीका बताया जाता है। अगर छात्र सैंपल पेपर के साथ मार्किंग स्कीम का भी इस्तेमाल करें, तो उन्हें परीक्षा की तैयारी करने और अपने जवाबों को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। मार्किंग स्कीम का सही इस्तेमाल करने के 7 तरीके (Image- AI Generated/Newsroom Verified)
मार्किंग स्कीम देखकर जानें कि किस सवाल के कितने अंक हैं। इससे आप तय कर पाएंगे कि किसी जवाब में कितनी जानकारी लिखनी है।
मार्किंग स्कीम में दिए गए मुख्य बिंदुओं को पहचानें। उत्तर लिखते समय उन सभी जरूरी बातों को शामिल करने की कोशिश करें।
पहले बिना मार्किंग स्कीम देखे सैंपल पेपर हल करें। इसके बाद स्कीम की मदद से अपने उत्तरों का मिलान करें और कमियां समझें।
खासकर गणित और विज्ञान जैसे विषयों में केवल अंतिम उत्तर पर निर्भर न रहें। जहां जरूरी हो, फॉर्मूला, प्रक्रिया और गणना के चरण भी लिखें।
दो अंको के सवाल में बहुत लंबा जवाब लिखने के बजाय जरूरी जानकारी दें। वहीं, ज्यादा अंकों वाले सवालों में सभी जरूरी बिंदुओं को समझाकर लिखें।
अपने उत्तरों की जांच करते समय देखें कि कहां जरूरी पॉइंट छूट गए, गणना गलत हुई या सवाल ठीक से नहीं समझ पाए। इन गलतियों को नोट करके दोबारा अभ्यास करें।
मार्किंग स्कीम के साथ सैंपल पेपर हल करते समय परीक्षा जैसा माहौल बनाएं। इससे आपको समय के अंदर जवाब पूरा करने और अंकों के हिसाब से समय बांटने की आदत पड़ेगी।