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बच्चों को रोज एक घंटा खेलना क्यों जरूरी है? रुजुता दिवेकर ने बताया, पढ़ाई जितना ही जरूरी है मैदान में खेलना

Rujuta Diwekar on Kids Health: बच्चों को रोज कम से कम 60 मिनट खेलना क्यों जरूरी है? रुजुता दिवेकर से जानें खेलने के फायदे, WHO की गाइडलाइन और पेरेंटिंग टिप्स।

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बच्चों को रोज 1 घंटा खेलना क्यों जरूरी है, रुजुता दिवेकर ने बताए फायदे (AI Image)

Rujuta Diwekar on Kids Physical Activity: बच्चों की अच्छी सेहत के लिए सिर्फ पौष्टिक खाना और पर्याप्त नींद ही जरूरी नहीं है। रोजाना खेलना भी उतना ही जरूरी है। न्यूट्रिशनिस्ट रुजुता दिवेकर का कहना है कि बच्चों को हर दिन कम से कम एक घंटा खेलने का मौका मिलना चाहिए। इससे न सिर्फ उनकी हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत होती हैं, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ता है। जानिए बच्चों के लिए रोजाना खेलना क्यों जरूरी है और माता-पिता इसमें कैसे मदद कर सकते हैं।

आजकल बच्चों की दिनचर्या कुछ ऐसी हो गई है कि स्कूल से घर आते ही होमवर्क, फिर ट्यूशन और उसके बाद मोबाइल या टीवी। इस पूरे रूटीन में एक चीज धीरे-धीरे गायब होती जा रही है और वह है खुलकर खेलना। पहले बच्चे स्कूल से लौटकर बैग रखते ही पार्क या गली में खेलने निकल जाते थे। अब कई बच्चों को खेलने के लिए भी समय निकालना पड़ता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बच्चों के लिए रोज खेलना वाकई इतना जरूरी है?

सेलिब्रिटी न्यूट्रिशनिस्ट रुजुता दिवेकर (Rujuta Diwekar) ने अपने एक वीडियो में बच्चों की फिजिकल एक्टिविटी को लेकर महत्वपूर्ण बातें साझा की हैं। उनका कहना है कि बहुत से बच्चों को अच्छी सेहत के लिए जरूरी न्यूनतम शारीरिक गतिविधि भी नहीं मिल पा रही है। बच्चों में बढ़ता मोटापा और खराब फिटनेस चिंता की बात है। ऐसे में जरूरी है कि माता-पिता बच्चों के खेलने को समय की बर्बादी न समझें।

बच्चों को रोज कितनी देर खेलना चाहिए

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 5 से 17 साल के बच्चों और किशोरों को पूरे सप्ताह में औसतन रोजाना कम से कम 60 मिनट मध्यम से तेज गति वाली शारीरिक गतिविधि करनी चाहिए। इसमें दौड़ना, साइकिल चलाना, फुटबॉल, क्रिकेट, रस्सी कूदना और दूसरे आउटडोर गेम शामिल हो सकते हैं।

रुजुता दिवेकर बच्चों के लिए रोज कम से कम एक घंटे के फ्री प्ले पर जोर देती हैं। फ्री प्ले यानी ऐसा खेल जिसमें बच्चे अपनी पसंद से दौड़ें, कूदें, दोस्तों के साथ खेलें और खुलकर शारीरिक गतिविधि करें। हर बार किसी कोच, क्लास या तय नियमों की जरूरत नहीं है।

WHO के मुताबिक, 60 मिनट से ज्यादा शारीरिक गतिविधि करने से भी अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं। हालांकि छोटे बच्चों के लिए उम्र के अनुसार अलग दिशानिर्देश हैं।

रोज एक घंटा खेलने से बच्चों की हड्डियां और मांसपेशियां होती हैं मजबूत

बचपन शरीर के विकास का महत्वपूर्ण समय होता है। इस दौरान हड्डियां और मांसपेशियां तेजी से विकसित होती हैं। दौड़ने, कूदने, चढ़ने और दूसरे खेलों से शरीर को सक्रिय रहने का मौका मिलता है।

नियमित शारीरिक गतिविधि हड्डियों और मांसपेशियों की मजबूती बढ़ाने में मदद करती है। इससे जोड़ों की कार्यक्षमता और शरीर का संतुलन भी बेहतर होता है। खासतौर पर दौड़ने और कूदने जैसी गतिविधियां हड्डियों के विकास के लिए फायदेमंद हो सकती हैं।

बच्चों के दिल और फेफड़ों के लिए भी जरूरी है खेलना

जब बच्चे दौड़ते हैं या कोई ऐसा खेल खेलते हैं जिसमें शरीर लगातार सक्रिय रहता है, तो उनकी धड़कन और सांस लेने की गति बढ़ती है। इससे दिल और फेफड़ों को बेहतर तरीके से काम करने का अभ्यास मिलता है।

नियमित फिजिकल एक्टिविटी बच्चों की कार्डियोरेस्पिरेटरी फिटनेस सुधारने में मदद करती है। इससे उनकी सहनशक्ति बढ़ सकती है और वे शारीरिक गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

मोटापे से बचाने में मदद करता है रोजाना खेलना

बच्चों में मोटापा बढ़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें खानपान, नींद की कमी, लंबे समय तक बैठे रहना और कम शारीरिक गतिविधि शामिल हैं।

रुजुता दिवेकर बच्चों के बीच घटती फिजिकल एक्टिविटी को लेकर चिंता जताती हैं। नियमित खेलकूद से शरीर ऊर्जा खर्च करता है और स्वस्थ वजन बनाए रखने में मदद मिलती है।

हालांकि सिर्फ एक घंटा खेलना मोटापे से बचने की गारंटी नहीं है। इसके साथ संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और स्वस्थ दिनचर्या भी जरूरी है।

खेलते-खेलते बढ़ता है बच्चों का आत्मविश्वास

खेलने का फायदा सिर्फ शरीर को नहीं, दिमाग को भी मिलता है। जब बच्चे दूसरे बच्चों के साथ खेलते हैं, तो उन्हें मिलकर काम करना, अपनी बारी का इंतजार करना और हार-जीत को स्वीकार करना आता है।

कभी कोई बच्चा दौड़ में पीछे रह जाता है, तो कभी वही अगले दिन जीत जाता है। ऐसे छोटे-छोटे अनुभव बच्चों को चुनौतियों का सामना करना सिखाते हैं।

रुजुता दिवेकर के अनुसार, नियमित शारीरिक गतिविधि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और सामाजिक मेलजोल के लिए भी फायदेमंद है। इससे बच्चों को दोस्त बनाने और समूह में घुलने-मिलने का अवसर मिलता है।

क्या बच्चों को खेलने के लिए ट्यूशन छोड़ने देना चाहिए

रुजुता दिवेकर का एक सुझाव माता-पिता को सोचने पर मजबूर कर सकता है। उनका कहना है कि अगर ट्यूशन या होमवर्क बच्चों के रोजाना एक घंटे के खेल में बाधा बन रहा है, तो प्राथमिकताओं पर दोबारा विचार करना चाहिए।

इसका मतलब यह नहीं कि बच्चे पढ़ाई छोड़ दें। बल्कि जरूरत है उनकी दिनचर्या में संतुलन बनाने की। स्कूल, पढ़ाई और खेल तीनों के लिए समय होना चाहिए।

कई बार माता-पिता पढ़ाई के दबाव में बच्चों का खेलने का समय सबसे पहले कम कर देते हैं। जबकि शारीरिक गतिविधि ध्यान, मानसिक स्वास्थ्य और सीखने की क्षमता के लिए भी लाभकारी हो सकती है।

माता-पिता बच्चों को रोज एक घंटा खेलने की आदत कैसे डालें

अगर आपका बच्चा मोबाइल या टीवी पर ज्यादा समय बिताता है और बाहर खेलने में दिलचस्पी नहीं लेता, तो शुरुआत धीरे-धीरे करें।

  • बच्चे की दिनचर्या में खेलने का समय तय करें।
  • उसे अपनी पसंद का खेल चुनने दें।
  • दोस्तों के साथ खेलने के मौके बढ़ाएं।
  • छुट्टी के दिन परिवार के साथ पार्क जाएं।
  • मोबाइल और टीवी के समय की सीमाएं तय करें।
  • खेलने को सजा या इनाम से न जोड़ें।

रुजुता दिवेकर का संदेश साफ है कि बच्चों के लिए खेलने का समय कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि स्वस्थ बचपन की जरूरत है। अच्छे नंबर, ट्यूशन और दूसरी उपलब्धियों के बीच बच्चों की शारीरिक गतिविधि को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

आखिर में समझने वाली बात यह है कि बच्चों को हर समय कुछ सिखाना जरूरी नहीं होता। कभी-कभी उन्हें बस खेलने देना भी उनके विकास के लिए बहुत कुछ कर सकता है।

Medha Chawla
मेधा चावलाauthor

मेधा चावला टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन की लीड हैं। लाइफस्टाइल पत्रकारिता में 20 वर्षों का अनुभव रखने वाली मेधा की विशेषज्ञता हेल्थ, वेलनेस, फिटनेस, मेंटल हेल्थ, डेली लाइफ इम्प्रूवमेंट, ह्यूमन-इंटरेस्ट फीचर्स और रिसर्च-बेस्ड स्टोरीज तक फैली है। उनकी लेखन शैली पाठकों को जटिल स्वास्थ्य और जीवनशैली संबंधी विषयों को आसान, समझने योग्य और व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे उनका कंटेंट व्यापक पाठक समूह से जुड़ता है। अबतक 30,000 से अधिक कंटेंट पीस लिख चुकी मेधा की कई एक्सक्लूसिव स्टोरीज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेंड सेट कर चुकी हैं।

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