Cushioning: सुनने में नरम मगर है खतरनाक, ब्रेकअप का बैकअप कर रहा रिश्तों को खोखला, आखिर क्या बला है कुशनिंग

Cushioning in Relationship: कुशनिंग आज के युवाओं के रिलेशनशिप का एक अहम हिस्सा बन चुका है। हालांकि यह रिश्तों में विश्वास और गहराई को कमज़ोर करता है। असली प्यार और रिश्ते जोखिम लेने की हिम्मत मांगते हैं , न कि किसी तरह कै बैकअप या प्लान बी।

Cushioning in Relationship: रिलेशनशिप ऐसी चीज है जिसमें अगर विश्वास ना हो उसे खत्म होने से कोई नहीं बचा सकता। बहुत से लोगों का रिश्ता जीवन की सांस के साथ ही खत्म होता है तो वहीं कुछ लोगों का रिलेशनशिप किसी चाइनीज खिलौने सी होती है कि चली तो चांद तक नहीं तो रात तक। ऐसे में आजकल के युवा किसी भी तरह के अलगाव या ब्रेकअप की संभावना को ध्यान में रखते हुए नए विकल्पों को चुन रहे हैं। नए तरह के रिश्ते बना रहे हैं। तभी तो डेटिंग के नए-नए ट्रेंड्स सेट हो रहे हैं। ऐसा ही एक ट्रेंड पिछले कुछ सालों में काफी पॉपुलर हुआ है। इस रिलेशनशिप ट्रेंड का नाम है कुशनिंग। यह रिलेशनशिप का ऐसा ट्रेंड है जो आपको हैरान कर सकता है।

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What is Cushioning in Relationship, Pros and Cons of Cushioning

कुशनिंग क्या है (What is Cushioning)

कुशनिंग के शाब्दिक अर्थ पर नजर डालें तो यह अंग्रेजी में कुशन शब्द से बना है। कुशनिंग का इस्तेमाल किसी भी तरह के झटके से बचने के लिए किया जाता है। रिलेशनशिप में भी कुशनिंग का यही काम है। कुशनिंग एक ऐसी डेटिंग तकनीक है जिसमें कोई व्यक्ति रिलेशनशिप में रहते हुए भी दूसरे के साथ रोमांटिक संपर्क बनाता है। ये लोग उनके लिए एक तरह का बैकअप होते हैं कि अगर किसी मोड़ पर उनका अपने पार्टनर से ब्रेकअप या तलाक हो जाए तो वह अकेले न रहें। इसे आसान शब्दों में प्लान बी तैयार करने जैसा है। वह तीसरा शख्स कुशन की तरह काम करता है जो ब्रेकअप या तलाक के दर्द को कम करता है।

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