Vijaypat Singhania Life Lessons in Hindi: सफल उद्योगपति होने के साथ ही विश्व रिकॉर्डधारी एविएटर और 'द कंप्लीट मैन' ब्रांड के निर्माता भी थे। उन्होंने अपनी कंपनी रेमंड को वर्ल्ड क्लास ब्रांड बनाया लेकिन जीवन के अंतिम दिनों में परिवार और बिजनेस से जुड़ी चुनौतियों का सामना भी किया। उनका जीवन सफलता, साहस, पैशन और दर्दनाक सबकों का अनोखा मिश्रण है। आइए डालते हैं दिवंगत विजयपत सिंघानिया के जीवन से मिलने वाले 10 गहरे सबक पर एक नजर:
रेमंड के चीफ रहे विजयपत सिंघानिया से सीखें जीवन के 8 सबक
1. विरासत को संभालना और उसे आगे बढ़ाना
विजयपत ने रेमंड को एक साधारण टेक्सटाइल कंपनी से वर्ल्ड फेमस ब्रांड बनाया। उन्होंने सिखाया कि विरासत को सम्मान देना चाहिए, लेकिन समय के साथ एक्सपेरिमेंट करना और बदलाव लाना भी जरूरी है।
2. अपने पैशन को ना छोड़ना
विजयपत सिंघानिया ने 67 साल की उम्र में हॉट एयर बैलून में विश्व रिकॉर्ड बनाया और माइक्रोलाइट विमान से लंदन से दिल्ली की उड़ान भरी। वह सिखा गए हैं कि काम के साथ अपने शौक और पैशन को भी जिंदा रखना चाहिए। इससे जीवन में ऊर्जा बनी रहती है।
3. मेहनत और लगन
उन्होंने रेमंड को जिस मेहनत और दूरदर्शिता से नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया था वह सिखाता है कि सफलता रातोंरात नहीं मिलती। निरंतर मेहनत और धैर्य जरूरी है।
4. निर्णय लेने में सावधानी बरतना
विजयपत सिघानिया ने कंपनी में अपनी 37% हिस्सेदारी बेटे गौतम को गिफ्ट कर दी थी। इसे बाद में उन्होंने अपनी सबसे बड़ी गलती बताया था। यह सिखाता है कि जीवन के किसी भी अहम निर्णय लेने में सावधानी बरतनी चाहिए।
5. आत्मविश्वास और साहस
विजयपत सिंघानिया ने उस उम्र में नए कीर्तिमान बनाए जिस उम्र में लोग रिटायरमेंट प्लान कर लेते हैं। यह सिखाता है कि उम्र कोई बाधा नहीं होती। साहस और आत्मविश्वास से कोई भी चुनौती पार की जा सकती है।
6. जिंदगी में पूर्णता नहीं होती
विजयपत सिंघानिया ने अपनी जीवनी'An Incomplete Life' में लिखा कि जीवन कभी भी पूरा नहीं लगता। जीवन में हमेशा कुछ अधूरा रहता है, इसे स्वीकार कर आगे बढ़ना चाहिए।
7. सादगी और विनम्रता
विजयपत सिंघानियां ने अपने जीवन में खूब शोहरत हासिल की। हालांकि सफलता के बाद भी उन्होंने विनम्रता कभी नहीं छोड़ी। हमें भी सादगी और विनम्रता को अपने जीवन का आधार बनाना चाहिए।
8. गलतियों से सीखना
उन्होंने जिस तरह से सार्वजनिक तौर पर भी अपने गलत फैसलों की जिम्मेदारी ली वह सिखाता है कि अपनी गलतियों को स्वीकार कर दूसरों को सतर्क करना चाहिए, ताकि वे वही गलती न दोहराएं।
विजयपत सिंघानिया का जीवन उतार-चढ़ाव से भरा रहा। उन्हों अर्श से फर्श तक का सफर देखा। वह 28 मार्च 2026 को इस दुनिया को अलविदा कह गए। हालांकि वह अपने पीछे लोगों के सामने अपनी जीवन गाथा छोड़ गए हैं। सीखने वाले विजयपत सिंघानिया के जीवन से बहुत से अनमोल सबक सीख सकते हैं।
