September Shayari in Hindi: सितंबर महीना साल के कैलेंडर में एक कोमल बदलाव की तरह आता है। ना ज्यादा गर्मी और ना ही पूरी ठंड। बस हवा में हल्की नरमी और आसमान में साफ नीलापन। इस माह-ए-सितंबर में ऐसा जादू है कि धूप भी अपना गुस्सा छोड़कर धीरे-धीरे मुस्कुराने लगती है। सितंबर माह वह प्रतीक है जो हमें बताता है कि बदलाव हमेशा मंद रफ्तार से आता है। सितंबर को साल की डायरी में सबसे प्यारा और सबसे संतुलित पन्ना कहा जाए तो कहीं से गलत ना होगा। बहुत से शायरों ने इसी माह-ए-सितंबर पर कई खूबसूरत शेर गढ़े हैं। आइए पढ़ें सितंबर पर शायरी हिंदी में:
सितंबर पर शायरी
1. सद-सौग़ात सकूं फ़िरदौस सितंबर आ
ऐ रंगों के मौसम मंज़र मंज़र आ
- राजेन्द्र मनचंदा बानी
2. जब भी माह-ए-सितंबर जनाब आएगा
खेतियों पर ग़ज़ब का शबाब आएगा
- हैदर बयाबानी
3. तुम्हारे हिज्र में जब भी कैलेंडर पर निगाह डाली
सितंबर के महीने को सितमगर ही पढ़ा मैं ने
- अतीब क़ादरी
4. किस ने सोचा था कि कमरों में फ़क़त चुप होगी
किस ने सोचा था कि गुज़रेगा सितंबर ऐसे
- अज़्बर सफ़ीर
5. अपने नाम की मोहरें लगाई हैं
तुम्हें ये धूप का ज़ेवर सितंबर की निशानी है
- असग़र नदीम सय्यद
6. कोई कहता ही रहा
वो सितंबर की ख़ुनुक रात थी मैं था तुम थीं
- अज़रा नक़वी
7. सितंबर की ग्यारहवीं रात है
सड़क की सिलवटों पर अठखेलियाँ लेती मोहब्बत को
- इंजील सहीफ़ा
8. मार्च में अक़्द हुआ और सितंबर में तलाक़
कोई बतलाए बुरा है कि ये साल अच्छा है
- अस्ताद रामपुरी
9. हांफती नदी में दम टूटा हुआ था लहर का
वाक़िआ है ये सितंबर की किसी सह-पहर का
- आफ़ताब इक़बाल शमीम
10. धार-दार चाक़ू तैरते हैं
पेड़ों पे चांदनी सितंबर की सहमी है
- अख़्तर यूसुफ़
बता दें कि सितंबर महीना इसलिए भी खास होता है क्योंकि जैसे जीवन में कठिन दौर के बाद सुकून लौटता है, वैसे ही तपिश और बारिश के बाद सितंबर की नरमी हमारे जीवन में आती है और हर मंजर को खुशहाली से भर देती है।
