आज का सुविचार (Thought of the day): राष्ट्रकवि रामधारी सिंह 'दिनकर हिंदी साहित्य के महान फनकारों में प्रमुखते से याद किये जाते हैं। खासतौर पर 'वीर रस' की कविताएं लिखने वाले दिनकरकी रचनाओं में शृंगार और दर्शन की भी गहरी छाप मिलती है। वह एक कवि और साहित्यकार होने के साथ ही महान विचारक भी थे। उनके बहुत से विचार आज भी लोगों के जीवन को नई दिशा देने का काम करते हैं। आज के सुविचार में आइए पढ़ते हैं दिनकर जी का एक बेहद खास विचार और समझते हैं कि इस विचार के आखिर मायने हैं क्या:
रामधारी सिंह दिनकर का अनमोल विचार
“अस्तमान सूर्य होने को मत रुको। चीजें तुम्हें छोड़ने लगें, उससे पहले तुम्हीं उन्हें छोड़ दो।”
रामधारी सिंह दिनकर का यह विचार जीवन के पड़ाव के बारे में है, जब हमें यह समझना होता है कि किसी चीज से जुड़े रहना हमारे लिए सही है या सिर्फ हमारी आदत बन चुकी है। दिनकर कहते हैं कि किसी व्यक्ति, रिश्ते, पद, सफलता या परिस्थिति के खत्म होने का इंतजार मत कीजिए। जब आपको महसूस होने लगे कि कोई चीज अपनी सार्थकता खो रही है, तो समय रहते उससे आगे बढ़ जाना ही बेहतर है।
‘अस्तमान सूर्य’ का मतलब होता है डूबता हुआ सूरज। डूबता सूरज से दिनकर का तात्पर्य है कि एक दिन का अंत हो चुका है। उसके डूबने के बाद रोशनी को पकड़े रहने की कोशिश बेकार है। जीवन में भी कुछ रिश्ते, अवसर और परिस्थितियां ऐसी होती हैं, जिनका समय पूरा हो जाता है। हम उन्हें सिर्फ इसलिए पकड़े रहते हैं क्योंकि उनसे हमारा भावनात्मक लगाव होता है। हमें डर लगता है कि छोड़ने के बाद हमारे पास क्या बचेगा। यही डर हमें आगे बढ़ने से रोकता है।
दिनकर का विचार हमें समय रहते विदा लेना सिखाता है। इसका मतलब है कि जब किसी चीज में विकास, सम्मान, खुशी या उद्देश्य लगातार खत्म होने लगे, तब उसकी वास्तविकता को स्वीकार किया जाए।
कई बार हम चाहते हैं कि सामने वाला हमें छोड़े, ताकि फैसला लेने का बोझ हमारे ऊपर न आए। लेकिन दिनकर का विचार आत्मनिर्णय की बात करता है। वह कहता है कि अपनी जिंदगी की दिशा तय करने की जिम्मेदारी भी हमारी ही है।
असल परिपक्वता भी यही है कि हम हर चीज को बचाने की कोशिश न करें। कुछ चीजों को छोड़ना अपने भविष्य के लिए जगह बनाना होता है। जैसे डूबता सूरज अगले दिन के सूर्योदय की तैयारी करता है, वैसे ही कुछ अंत हमारे जीवन में एक नई शुरुआत की जमीन तैयार करते हैं।
