Navratri Rasotsav 2026: देशभर में नवरात्रि की धूम है। कहीं माता की चौकी सजी है तो कहीं उनके जागरण से रातें गुलजार हैं। नवरात्रि के इस पवित्र उत्सव पर गरबा और डांडिया की मस्ती भी देश के कई हिस्सों में देखने को मिल रही है। हालांकि गुजरात के राजकोट में नवरात्रि पर अलग ही माहौल रहता है। हर साल की तरह इस बार भी राजकोट के ऐतिहासिक रणजीत विलास पैलेस में शक्ति और भक्ति के मेल से सजे पारंपरिक नवरात्रि रासोत्सव ने देखने वालों का मन मोह लिया।
राजकोट में नवरात्रि रासोत्सव की धूम
रासोत्सव में तलवार रास के लिए जब क्षत्रिय समाज की महिलाएं हाथों में खुली तलवारें लेकर दोपहिया वाहनों और विंटेज जीपों पर सवार हुईं, तो देखने वालों की सांसें थम गईं। भगिनी सेवा फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस अनोखे नवरात्रि रासोत्सव में शौर्य, शक्ति, आस्था, साहस और परंपरा का ऐसा मेल देखने को मिला जो शायद ही कहीं और नजर आए।
नारी शक्ति और शौर्य से सजा तलवार रास
इस कार्यक्रम में 200 से अधिक क्षत्रिय महिलाओं ने हिस्सा लिया। महिलाओं ने स्कूटर्स, बाइकों और विंटेज जीपों पर सवार होकर बेहद खतरनाक और सटीक संतुलन के साथ तलवारें लहराईं। नंगे हाथों में चमचमाती खुली तलवारें और गाड़ी की रफ्तार के साथ तालमेल बिठाना आसान नहीं था। लेकिन इन महिलाओं के चेहरे पर चमकता आत्मविश्वास देखते ही बन रहा था। इस तलवार रास के लिए महिलाएं पिछले करीब एक महीने से अभ्यास कर रही थीं।
राजकोट स्टेट की रानी कादम्बरी देवी ने इस आयोजन को लेकर कहा कि वाहनों पर सवार होकर तलवार रास करना जितना भव्य दिखता है, इसके पीछे उतनी ही कड़ी साधना होती है। उन्होंने कहा कि, "मां भगवती स्वयं सर्वशक्तिमान हैं और अस्त्र-शस्त्र उनका प्रिय रूप हैं। वे शस्त्रों के माध्यम से ही अधर्म का नाश और दुष्टों का संहार करती हैं। क्षत्रिय परंपरा में शस्त्र पूजा का बहुत बड़ा महत्व है। प्राचीन समय में भी महिलाएं युद्ध पर जाने वाले योद्धाओं को शस्त्र सौंपती थीं और स्वयं भी शस्त्र संचालन में पारंगत होती थीं। इस आयोजन के जरिए हम अपनी आने वाली पीढ़ी को उसी गौरवशाली इतिहास और साहस से जोड़ रहे हैं।"
दूसरी तरफ, नवरात्रि तलवार रास में भाग लेने वाली महिलाओं ने कहा कि इसका हिस्सा बनना आत्मरक्षा, शक्ति और नारी स्वाभिमान का अनुभव है। इस तलवार रास का संदेश है कि आधुनिक दौर में जब महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, तब भी वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों और शूरवीर परंपराओं को पूरी शान के साथ सहेजे हुए हैं।
दीवा और थाली रास ने भी मोहा मन
पांच दिनों तक चलने वाले इस सांस्कृतिक उत्सव में तलवार रास के साथ ही गुजरात की पारंपरिक संस्कृति की बानगी पेश करने वाले दीवा रास और थाली रास का भी प्रदर्शन हुआ। इसमें छोटी-छोटी बच्चियों से लेकर बुजुर्ग महिलाओं तक ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया।
राजकोट का यह तलवार रास इस बात की मिसाल है कि जब नारी की शक्ति और परंपरा का संगम होता है, तो वह नजारा हमेशा के लिए यादगार बन जाता है।
