Butter Chicken: जितना स्वाद उतना ही रोचक इतिहास, बंटवारे से जुड़े तार, कोर्ट तक भी पहुंची रार (Photos: iStock)
Who Made Butter Chicken first: भारतीय परिवारों में अकसर संपत्ति को लेकर विवाद या झगड़ा देखने सुनने को मिलता है। लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि बटर चिकन के लिए दो परिवार आमने सामने आ जाएं। जी हां, ऐसा हुआ है। बटर चिकन पर विवाद इतना बढ़ा कि मामला कोर्ट तक पहुंच गया। भारतीय स्वाद की दुनिया में कुछ ऐसी ताकत रखता है बटर चिकन। जिन्हें नहीं पता उन्हें बता दें कि बटर चिकन एक नॉनवेज डिश है जिसे मुर्गे के मांस से बनाया जाता है। बटर चिकन खाने के शौकीनों की मानें तो इसका स्वाद ज़ुबान पर उतरते ही किसी रेशमी संगीत सा जादू करता है जिसमें टमाटर की हल्की खटास, मक्खन की मृदुल मिठास और मसालों की गरमाहट एक साथ अपना सुर छेड़ती हैं।
बटर चिकन पर दो परिवारों के बीच विवाद की जड़ है इसकी रेसिपी। दोनों परिवार दावा करते हैं कि इसकी रेसिपी उनके पूर्वज ने ईजाद की थी। बटर चिकन की रेसिपी पर विवाद से पहले ये जानना जरूरी है कि इसकी रेसिपी है क्या।
आइए सबसे पहले जानते हैं कि बटर चिकन बनता कैसे है। अगर आप 5-6 लोगों को लिए बटर चिकन बना रहे हैं तो करीब 1 किलो चिकन लेना होगा। 5 टामटर, 50 ग्राम मक्खन, एक कटोरी दही, 50 ग्राम सरसों का तेल, 5 हरी मिर्च, 10 इलायची, 10 लौंग, 1 दालचीनी स्टिक, 1 चम्मच जावित्री
1 चम्मच कसूरी मेथी, 1 चम्मच गरम मसाला, 2 चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 2 चम्मच नींबू का रस, 2 चम्मच नमक (स्वादानुसार), 3 चम्मच अदरक और लहसुन का पेस्ट भी लेना होगा।
चिकन के मीडियम आकार में पीस कर लें। इसमें लाल मिर्च पाउडर, नमक, नींबू का रस और अदरक व लहसुन का पेस्ट डाल अच्छे से मिला लें और करीब आधा घंटा तक मैरिनेट होने के लिए रख दें। इसके बाद मैरिनेटेड चिकन को तंदूर या माइक्रोवेव में भुनना होगा।
अब एक पैन लें। उसमें तीन-चार चम्मच तेल डालकर मक्खन गर्म कर लें। फिर सारे खड़े मसाले डालकर अच्छे से फ्राइ करें। थोड़ी देर बाद इसमें टमाटर, लहसुन और अदरक डालकर अच्छी तरह मिला लें। इसे अच्छे से पकाएं। फिर मिर्च पाउडर, कसूरी मेथी और अन्य सभी मसाले डालकर रोस्ट किए हुए चिकन के पीस डालने होंगे। इन सबको करीब 15 मिनट तक पकाएं। उपर से इलायची और फ्रेश क्रीम डालकर पकाएं। इस तरह आपका बटर चिकन बनकर तैयार है।
दिल्ली में रेस्त्रां की दो मशहूर चेन है। एक है मोती महल और दूसरी दरियागंज रेस्त्रां। मोती महल का दावा है कि उसके संस्थापक कुंदनलाल गुजराल ने 1930 के दशक में बटर चिकन की रेसिपी ईजाद की थी। वहीं, दरियागंज का कहना है कि बटर चिकन के आविष्कारक उनके संस्थापक कुंदनलाल जग्गी थे।
साल 2023 में टीवी रियालिटी शो शार्क टैंक इंडिया के एक एपिसोड में दरियागंज रेस्टोरेंट के मालिक ने दावा किया कि बटर चिकन की रेसिपी उनके पूर्वजों ने खोजी थी। इस एपिसोड के बाद मोती महल ने दरियागंज के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा दायर कर दिया।
मोत महल के संस्थापक कुंन लाल गुजराल के परिवार वाले कहते हैं कि जब पेशार अविभाजित भारत केका हिस्सा था तब वहां के गोरा बाजार में मोखा सिंह लांबा का एक ढाबा था। इसी ढाबे पर कुंदल लाल गुजराल बतौर शेफ काम करते थे। उन्होंने एक दिन तंदूरी चिकन को बटर, टमाटर और मलाई की थिक ग्रेवी के साथ पकाया। लोगों को यह स्वाद खूब पसंद आया। वहीं से बटर चिकन की ये रेसिपी चल निकली।
आजादी के बाद जब कुंदन लाल गुजराल दिल्ली आए तो उन्होंने यहां पर ढाबा खोला और लोगों को बटर चिकन खिलाने लगे। आगे चलकर उन्होंने मोती महल नाम से एक बड़ा रेस्त्रां खोला। अपने रेस्त्रां की सबसे खास चीज उन्होंने बटर चिकन रखी। इस रेस्त्रां में उनके पार्टनर थे कुंदन लाल जग्गी। यह वही कुंदन लाल जग्गी थे जिन्होंने दरियागंज रेस्त्रां खोला था।
कुंदन लाल गुजराल और कुदन लाल जग्गी के अलग होने के साथ ही बटर चिकन पर रार का जन्म हुआ। दरअसल ये दोनों पेशावर के उस ढाबे में साथ काम करते थे। जग्गी ने भी अपने रेस्त्रां पर बटर चिकन बनाना और खिलाना शुरू किया। दोनों क रेस्त्रां खूब चला। दोनों में थोड़ी कड़वाहट आई लेकिन मामला कोर्ट तक नहीं पहुंचा
जग्गी के परिवार वालों का दावा है कि पेशावर में कुंदन लाल गुजराल ने नहीं बल्कि कुदन लाल जग्गी ने बटर तचिकन की रेसिपी ईजाद की थी। इनका कहना है जब मोती महल बना था तब भी जग्गी ही बटर चिकन बनाते थे, गुजराल मार्केटिंग का काम करते थे।
बटर चिकन को लेकर चाहे जो विवाद हो, लेकिन इसके इतिहास को लेकर लगभग सभी फूड हिस्टोरियंस की एक सी राय है। इंटरनेट पर मौजूद रिपोर्ट्स का निचोड़ निकाला जाए तो बटर तिकन का जन्म विभाजन से पहले 1930 के दशक में हुआ था। पेशावर में इसे मुर्ग मखनी कहा जाता था। मुर्ग मखनी के जन्म से पहले तंदूरी चिकन पेशावर की मशहूर डिश हुआ करती थी। तंदूरी चिकन बनाने के दौरान जो चिकन बच जाता था उससे एक दिन किसी बावर्ची ने टमाटर और मक्खन की ग्रेवी में डालकर पका दिया। ढाबे के सारे कारीगरों ने वह डिश खाई। हर किसी को स्वाद पसंद आया। हंसी मजाक में किसी ने बोल दिया कि ये तो मुर्ग मखनी है।
अगले दिन से मुर्ग मखनी को ढाबे के मालिक ने अपने मेन्यू में शामिल कर लिया। खाने वाले इस डिश की खूब तारीफ करते। साथ ही तारीफ होने लगी उस डिश को बनाने वाले शेफ की। बदलते दौर के साथ ये मुर्ग मखनी बटर चिकन कहलाने लगा।
पेशावर के ढाबे पर जन्मी यह मुर्ग मखनी आज करोड़ों भारतीय और पाकिस्तानियों के लिए स्वाद का दूसरा नाम बन चुका है। खाने वाले इसकी तारीफ के कसीदे पढ़ते नहीं थकते। साथ ही तारीफ होती है इस मुर्ग मखनी की ईजाद करने वाले शेफ की। अब तो अतीत ही गवाह है कि वह शेफ था कौन। कुंदन लाल गुजराल या कुंदन लाल जग्गी।
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