बच्चों की देखभाल को लेकर कई तरह के पुराने नुस्खे आज तक चले आ रहे हैं। हाल ही में टीवी एक्टर नकुल मेहता ने अपने पॉडकास्ट में बाल रोग विशेषज्ञों के साथ चर्चा करते हुए ऐसे ही कुछ पारंपरिक तरीकों पर सवाल उठाए हैं। ये पुराने तरीके आज के समय में नवजात शिशुओं के लिए नुकसानदेह साबित हो सकते हैं। बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि अनजाने में अपनाए जाने वाले ये तरीके बच्चों की सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे ही 4 जरूरी नुस्खों के बारे में जिनसे नए माता-पिता को बचना चाहिए।
एक साल से कम उम्र के बच्चों को कभी न दें शहद
बच्चों को थोड़ा सा शहद चटाने की परंपरा आम है, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार एक साल से छोटे बच्चों को शहद बिल्कुल नहीं देना चाहिए। शहद में क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम नाम के बैक्टीरिया के बीजाणु होते हैं, जो नवजात शिशु के कमजोर पाचन तंत्र में गंभीर समस्या पैदा कर सकते हैं। इससे इंफेंट बोटुलिज्म जैसी खतरनाक बीमारी का खतरा रहता है।
पेट दर्द या गैस के लिए ग्राइप वॉटर का उपयोग
छोटे बच्चों के पेट में गैस या दर्द होने पर तुरंत ग्राइप वॉटर पिलाना एक आम चलन है। हालांकि कोई पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं कि ग्राइप वॉटर पेट के दर्द को ठीक करता है। बाजार में मिलने वाले ग्राइप वॉटर में कई तरह की जड़ी-बूटियां, मिठास या ऐसी ही दूसरी चीजें होती हैं जो संवेदनशील बच्चों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
जोर-जोर से तेल की मालिश करना
नवजात शिशु की त्वचा बेहद नाजुक होती है। बहुत जोर-जोर से मालिश करने या हाथ-पैर और जोड़ों पर ज्यादा दबाव डालने से उनकी कोमल त्वचा और मांसपेशियों को नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा, बच्चों के कान या नाक के अंदर तेल डालना भी खतरनाक हो सकता है, क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है या तेल सांस की नली में जा सकता है। मालिश हमेशा बहुत हल्के हाथों से और सुरक्षित उत्पादों के साथ ही करनी चाहिए।
जन्म के तुरंत बाद नहलाना
पारंपरिक रूप से कई जगह बच्चे के जन्म के तुरंत बाद उसे नहलाने की जिद की जाती है। डॉक्टरों की सलाह है कि यदि बच्चा पूरी तरह स्वस्थ और स्थिर है, तो जन्म के कम से कम 24 घंटे बाद ही उसका पहला स्नान होना चाहिए। इससे बच्चे के शरीर का तापमान नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। इसके बाद भी रोज नहलाना जरूरी नहीं है, केवल गीले कपड़े से साफ-सफाई रखना पर्याप्त होता है।
