Aaj ki Shayari(आज की शायरी), 15 February ki Shayari: शायरी शब्दों से बुनी ऐसी भावना है सीधे दिल तक पहुंचती है। इसमें प्रेम है, विरह है, उम्मीद है और जीवन की गहरी समझ भी। शायरी की खूबसूरती यह है कि कम शब्दों में बड़ी बात कह देती है। एक अच्छा शेर सुनते ही लगता है जैसे किसी ने हमारे अनकहे जज़्बात पढ़ लिए हों। यही वजह है कि औज लखनवी का एक शेर खूब वायरल होता रहता है। यह शेर कुछ इस तरह से है:
Aaj ki Shayari(आज की शायरी)
“उस पे क़ुर्बान कि जिस ने तिरी आवाज सुनी, सदक़े उस आंख के जिस ने तिरा जलवा देखा”
इस शेर में शायर उस इंसान से रश्क कर रहा है जिसे महबूब की आवाज सुनने या उसका दीदार करने का सौभाग्य मिला है। यहां आशिक कह रहा है कि वह उस व्यक्ति पर भी कुर्बान है जिसने सिर्फ महबूब की आवाज सुनी। यानी आवाज तक भी पहुंच जाना उसके लिए एक बड़ी नेमत है। और जिसने महबूब का जलवा यानी रूप, सौंदर्य या उपस्थिति देख ली, वह तो और भी खुशनसीब है।
सूफियाना संदर्भ में देखें तो आवाज ईश्वर की पुकार है और जलवा उसका दिव्य दर्शन। शायर कह रहा है कि जिसे उस सत्य की झलक मिल गई, वह धन्य है। इस तरह शेर इश्क-ए-मजाजी और इश्क-ए-हकीकी दोनों मायनों में पढ़ा जा सकता है।
भावनात्मक स्तर पर यह शेर प्रेम की वह अवस्था दिखाता है जहां आशिक खुद को भूल चुका है। उसे अपनी चाहत से ज्यादा खुशी इस बात में है कि किसी और को महबूब की नजदीकी मिली। यह प्रेम की पराकाष्ठा है। यहां ईर्ष्या भी है, लेकिन वह कड़वी नहीं, मीठी है। वह दर्द भी है और दुआ भी।
असल में यह शेर हमें बताता है कि सच्चा प्रेम पाने से ज्यादा देखने, सुनने और महसूस करने की तड़प का नाम है। आशिक की सबसे बड़ी दौलत मिलन नहीं, महबूब की झलक की ख्वाहिश है और उसी ख्वाहिश में उसकी पूरी दुनिया बसती है।
