मुंबई में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ बातचीत शुरू हो गई है। रुबियो ने कहा, 'जहां तक व्यापार समझौते की बात है, विदेश विभाग (स्टेट डिपार्टमेंट) व्यापार समझौतों पर बातचीत नहीं करता है, लेकिन जो कुछ भी हो रहा है, उसमें हम पूरी तरह शामिल हैं। मेरे समकक्ष, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और मुझे इस बात की बहुत परवाह है। हम इस समझौते के बहुत करीब पहुंच चुके हैं। मैं कहूंगा कि हम समझौते को अंतिम रूप देने के बिल्कुल करीब हैं। मुझे लगता है कि बस कुछ ही चीजें बाकी हैं जिन्हें सुलझाना है, इसलिए मुझे उम्मीद है कि यह जल्द ही हो जाएगा। हमें पूरी उम्मीद है कि जल्द ही कोई अच्छी खबर सामने आएगी और उसके बाद समझौते पर हस्ताक्षर हो जाएंगे। इसलिए, हम बहुत आशावादी हैं कि बहुत जल्द ही हमारे पास यहाँ कुछ ठोस परिणाम होंगे।'
रूबियो ने रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी भारत की उन्नत रिफाइनिंग क्षमताओं और रिलायंस की रिफाइनरी जैसी सुविधाओं के महत्व पर प्रकाश डाला। रूबियो ने कहा कि भारत अपने उन्नत रिफाइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्री की विशेषज्ञता का लाभ उठाकर, वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल (heavy crude) को और अधिक रिफाइन कर सकता है। रुबियो ने कहा कि इस मुद्दे पर रिलायंस के साथ चर्चा की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय कंपनियों ने पहले भी वेनेजुएला के कच्चे तेल को रिफाइन किया है।
उन्होंने कहा कि वेनेजुएला में भारतीय कंपनियों के पास पहले से ही तेल रियायतें (oil concessions) मौजूद हैं, जो उत्पादन बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती हैं। आगे कहा कि वेनेजुएला का तेल कुछ समय के लिए राहत दे सकता है और वैश्विक मांग को पूरा करने में मदद कर सकता है, हालांकि यह आपूर्ति में आने वाली सभी संभावित रुकावटों की पूरी तरह से भरपाई नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि वेनेजुएला के मादुरो शासन पर लगे मौजूदा अमेरिकी प्रतिबंध, भारत के साथ ऊर्जा सहयोग के विस्तार में मुश्किलें पैदा कर सकते हैं। इन प्रतिबंधों के मुद्दे को सुलझाना आवश्यक होगा।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का मंगलवार से भारत का तीन दिवसीय दौरा है। इस दौरान ऊर्जा, व्यापार एवं निवेश, रक्षा और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के साथ-साथ पश्चिम एशिया संकट पर विचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा। इस साल रुबियो की यह दूसरी भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देशों के संबंधों में लगातार तनाव बना हुआ है। इससे पहले मई में अपनी यात्रा के दौरान अमेरिकी विदश मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बातचीत की थी। इसके अलावा, उन्होंने क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भी हिस्सा लिया था।
विदेश मंत्रालय ने ट्वीट कर कहा- भारत की अपनी दूसरी यात्रा पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का मुंबई में स्वागत है!हवाई अड्डे पर महाराष्ट्र सरकार के संस्कृति, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और एआई मंत्री आशीष शेलार ने उनका स्वागत किया। यह यात्रा भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न स्तंभों के अंतर्गत सहयोग को और आगे बढ़ाने का अवसर प्रदान करती है।
अमेरिका के विदेश मंत्री के साथ कारोबारियों के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के भी आने की उम्मीद है। मुंबई में जयशंकर और रुबियो के बीच होने वाली बैठक में भारत-अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा होने की संभावना है।
मुंबई में रुबियो 26/11 के आतंकवादी हमले के मृतकों को श्रद्धांजलि देंगे
जयशंकर के साथ बैठक के अलावा, मुंबई में रुबियो के कार्यक्रमों में 26/11 के आतंकवादी हमले के मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए ताज स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करना भी शामिल है। उस हमले में छह अमेरिकी नागरिकों सहित 160 से अधिक लोगों की जान गई थी।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: अमेरिका और यूक्रेन के रिश्तों में भारी गिरावट, ट्रंप के रुख और रूस पर नरमी से बढ़ी दूरियां
'बातचीत में द्विपक्षीय सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा होने की उम्मीद'
अमेरिका के शीर्ष राजनयिक अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक स्वागत समारोह में भी शामिल होंगे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने पिछले सप्ताह कहा था, 'बातचीत में द्विपक्षीय सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों पर चर्चा होने की उम्मीद है, जिनमें ऊर्जा, व्यापार एवं निवेश, रक्षा, महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियां तथा आपसी हित के अन्य विषय शामिल हैं।' दोनों पक्षों के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते और पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा होने की संभावना है। रुबियो बुधवार को गुजरात के जामनगर जाएंगे।
भारत यात्रा से पहले रुबियो गए थे उज्बेकिस्तान
भारत यात्रा से पहले रुबियो ने उज्बेकिस्तान में कहा कि अमेरिका, भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के 'बहुत करीब' है। उन्होंने यह संकेत भी दिया कि रूसी तेल खरीदने के मामले में भारत को अमेरिकी शुल्क से मिली छूट का संबंध इस समझौते को अंतिम रूप देने के फैसले से है। रुबियो ने कहा, 'हम अभी भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं। हम इसे पूरा करने के बहुत करीब हैं। इसलिए जब राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर शुल्क से छूट और इस तरह के अन्य मामलों पर फैसला लेते हैं, तो यह उन बातों में से एक है, जिन पर हम विचार करते हैं।'
उद्देश्य शुल्क संबंधी मतभेदों को दूर करना, गैर-शुल्क बाधाओं को खत्म करना
भारत और अमेरिका 2025 की शुरुआत से प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। इसका उद्देश्य शुल्क संबंधी मतभेदों को दूर करना, गैर-शुल्क बाधाओं को खत्म करना और दोनों देशों के बाजारों तक पहुंच बढ़ाना है। भारत अपने उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में अधिक अनुकूल शुल्क व्यवस्था चाहता है। विदेश मंत्री जयशंकर ने कुछ दिन पहले कहा था कि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता अब समझौते के 'अंतिम चरण' के करीब पहुंच रही है।
