यूपीएसआईएफएस लैब तैयार कर रही अगली पीढ़ी के ड्रोन, 35 किलो तक सामान ढो सकते हैं हैवी लिफ्टिंग Drone

उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) की फॉरेंसिक एआई एंड रोबोटिक लैब इस क्षेत्र में नवाचार की मिसाल बन रही है। यह सरकारी लैब विभिन्न प्रकार के रोबोटिक और ड्रोन प्रोजेक्ट्स के लिए केंद्र बन चुकी है। यहां दुश्मन देशों के ड्रोन का पोस्टमार्टम किया जाता है।

UPIFS lab : भारत-पाकिस्तान सीमा पर हालिया तनाव में ड्रोन तकनीक ने निर्णायक भूमिका निभाई है। भारत के स्वदेशी विकसित ड्रोन ने न केवल सीमा पर निगरानी और जवाबी कार्रवाई में अहम योगदान दिया, बल्कि अब यह रोजमर्रा की जिंदगी में भी तेजी से प्रवेश कर रहे हैं। ऑनलाइन डिलीवरी, मेडिकल इमरजेंसी, कृषि और लॉजिस्टिक कार्यों में ड्रोन का उपयोग नए आयाम पर पहुंच रहा है।

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यूपीएसआईएफएस लैब तैयार कर रही अगली पीढ़ी के ड्रोन। तस्वीर-प्रतीकात्मक, PTI

नवाचार की मिसाल बन रही है लैब

उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) की फॉरेंसिक एआई एंड रोबोटिक लैब इस क्षेत्र में नवाचार की मिसाल बन रही है। यह सरकारी लैब विभिन्न प्रकार के रोबोटिक और ड्रोन प्रोजेक्ट्स के लिए केंद्र बन चुकी है। यहां दुश्मन देशों के ड्रोन का पोस्टमार्टम किया जाता है, जिससे उनकी तकनीक और उड़ान नियंत्रक का विश्लेषण कर उनकी कुंडली तैयार की जाती है। इसे तैयार करने में 'ड्रोनमैन' के नाम से मशहूर मिलिंदराज की अहम भूमिका रही है।

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