सड़क सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पैदल यात्रियों से लेकर स्पीड गवर्नर तक पर उठे सवाल

सुनवाई के दौरान नेशनल रोड सेफ्टी बोर्ड का मुद्दा भी उठा। जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि कानून में संशोधन के बाद सेक्शन 215 के तहत केंद्र को नेशनल रोड सेफ्टी बोर्ड गठित करना है और Section 215(2) में उसके कार्य निर्धारित हैं।

सड़क सुरक्षा, इमरजेंसी मेडिकल केयर और पैदल यात्रियों के अधिकारों से जुड़ी जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विश्वनाथन की बेंच ने दिल्ली हाईकोर्ट के पास पैदल यात्रियों की सुरक्षा और वाहनों की ओवरस्पीडिंग रोकने के उपायों पर गंभीरता से विचार किया। कोर्ट ने साफ कहा कि सिर्फ सिग्नल लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि वाहनों और पैदल यात्रियों की आवाजाही को समग्र रूप से देखकर समाधान निकालना होगा।

सुप्रीम कोर्ट

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दिल्ली हाईकोर्ट के पास पैदल यात्रियों की मुश्किल

अमिकस क्यूरी और वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल ने बताया कि भारत मंडपम के बाद पैदल यात्रियों के लिए सड़क पार करने की पर्याप्त जगह नहीं है। करीब 100 मीटर आगे एक सिग्नल लगाया गया है। इस पर जस्टिस पारदीवाला ने पूछा- “क्या सिर्फ रेड लाइट लगाने से समस्या हल हो जाएगी?” अमिकस ने कहा कि इस पूरे इलाके का ट्रैफिक और पैदल यात्रियों की आवाजाही देखने के लिए विशेषज्ञों की मदद से कमेटी बनाई जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि पहले दिल्ली हाईकोर्ट की तरफ जाने के लिए राइट टर्न था, लेकिन अब वह बंद है। लोगों को बाईं ओर उतरकर सड़क पार करनी पड़ती है और वहां फुटओवर ब्रिज भी नहीं है।

पुराना किला की खूबसूरती भी बनी चुनौती

सड़क पर कोई बड़ा निर्माण करने के सुझाव पर अमिकस ने कहा कि इससे पुराना किला का दृश्य और उसकी खूबसूरती प्रभावित हो सकती है। जस्टिस पारदीवाला ने दोनों सड़कों को जोड़ने वाले इन-बिल्ट ब्रिज का सुझाव दिया। इस पर ASG ने बताया कि एक तरफ पुराना किला है और दूसरी तरफ भी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अवशेष हैं। कोर्ट ने दिन खत्म होने तक इस मुद्दे पर एक पेज की नोट देने को कहा, ताकि उसे आदेश में शामिल किया जा सके।

बुजुर्गों के लिए फुटओवर ब्रिज पर चढ़ना मुश्किल

अमिकस ने कहा कि उम्रदराज लोग फुटओवर ब्रिज पर चढ़ने में सक्षम नहीं होते। उन्होंने लिफ्ट लगाने का सुझाव दिया। साथ ही वाहनों की रफ्तार नियंत्रित करने के लिए रंबल स्ट्रिप्स और सड़क डिजाइन में बदलाव की बात कही।

वाहन ट्रैकिंग डिवाइस पर केंद्र से रिपोर्ट तलब

सुप्रीम कोर्ट ने व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम डिवाइसेज के मुद्दे पर भी सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि 13 मई के आदेश में इस संबंध में कई निर्देश दिए गए थे। अमिकस ने बताया कि केंद्र के हलफनामे में वाहन निर्माताओं के साथ हुई बातचीत का जिक्र नहीं है। ASG ने बताया कि मोटर व्हीकल सोसाइटी के साथ बातचीत हुई है। उसके मुताबिक चार पहिया वाहनों में डिवाइस डीलरों की ओर से लगाए जा रहे हैं, लेकिन निर्माताओं की ओर से प्री-फिट नहीं किए जा रहे। इस पर अमिकस ने कहा कि अगर डिवाइस वाहन में पहले से फिट होंगे तो उनके अनुपालन की निगरानी करना आसान होगा।

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