सुप्रीम कोर्ट ने 2008 के अहमदाबाद सीरियल बम ब्लास्ट मामले में दोषी मोहम्मद तनवीर की मौत की सजा पर रोक लगा दी है। इस आतंकी हमले में 56 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। शीर्ष अदालत ने तनवीर की उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है, जिसमें उसने गुजरात हाईकोर्ट के 7 जुलाई के फैसले को चुनौती दी है।
सुप्रीम कोर्ट
जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने 9 अक्टूबर के अपने आदेश में कहा कि अपीलकर्ता तनवीर को दी गई मौत की सजा पर अमल रोक दिया जाए। अदालत ने मामले से संबंधित मूल रिकॉर्ड ट्रायल कोर्ट और गुजरात हाईकोर्ट से मंगाने का निर्देश भी दिया है।
जेल में आचरण और मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन की रिपोर्ट मांगी
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को निर्देश दिया है कि वह आठ सप्ताह के भीतर तनवीर से संबंधित सभी प्रोबेशन अधिकारियों की रिपोर्ट पेश करे। इसके अलावा संबंधित जेल के अधीक्षक को भी आठ सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देनी होगी कि जेल में तनवीर ने किस तरह का काम किया है और जेल के भीतर उसका आचरण तथा व्यवहार कैसा रहा है।
पीठ ने जेल अधीक्षक को तनवीर का सरकारी मेडिकल अस्पताल से मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन कराने का निर्देश भी दिया है। इसकी रिपोर्ट भी आठ सप्ताह के भीतर अदालत में पेश करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 12 सप्ताह बाद तय की है।
गुजरात हाईकोर्ट ने 38 दोषियों की मौत की सजा रखी थी बरकरार
गुजरात हाईकोर्ट ने 7 जुलाई को अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में इंडियन मुजाहिदीन के 38 दोषियों की मौत की सजा बरकरार रखी थी। हाईकोर्ट ने हमले में बड़ी संख्या में लोगों की मौत, साजिश के व्यापक स्वरूप और समाज में बड़े पैमाने पर आतंक फैलाने के इरादे को मौत की सजा बरकरार रखने के प्रमुख आधारों में शामिल किया था।
हाईकोर्ट ने विशेष अदालत के फरवरी 2022 के फैसले को भी बरकरार रखा था। विशेष अदालत ने 38 दोषियों को मौत की सजा और 11 अन्य को उम्रकैद सुनाई थी। हाईकोर्ट ने बाकी 11 दोषियों की उम्रकैद की सजा भी बरकरार रखी थी।
70 मिनट में हुए थे 21 बम धमाके
26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद के अलग-अलग इलाकों में करीब 70 मिनट के भीतर 21 बम धमाके हुए थे। इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हो गई थी और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। मामले की जांच के दौरान सूरत में मिले बिना फटे बमों से जुड़े मामलों को भी अहमदाबाद धमाकों के मामलों के साथ जोड़ दिया गया था।
कुल 35 पुलिस मामलों को एक साथ जोड़ने के बाद 78 लोगों के खिलाफ मुकदमा चला। इनमें से 49 लोगों को विशेष अदालत ने दोषी ठहराया था। विशेष अदालत का फरवरी 2022 का फैसला इस लिहाज से ऐतिहासिक था कि एक ही मामले में 38 दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई थी।
एक अन्य दोषी की फांसी पर भी रोक लगा चुका है सुप्रीम कोर्ट
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट 1 अक्टूबर को भी दोषी अहमद बावा उर्फ अब्बू अबुबकर बरेलवी की मौत की सजा पर रोक लगा चुका है। अब मोहम्मद तनवीर की सजा पर भी रोक लगने के बाद शीर्ष अदालत मामले में दोषियों की अपीलों पर विचार कर रही है।
