सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली सरकार से कहा कि वह इंटेलिजेंस ब्यूरो से इनपुट लेकर बताए कि पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की 1995 में हुई हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे जगतार सिंह हवारा को तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी जेल में शिफ्ट किया जा सकता है या नहीं। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच हवारा की जेल ट्रांसफर की मांग पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को तय की है।
सुप्रीम कोर्ट
दिल्ली सरकार ने IB के इनपुट को जरूरी बताया
सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि इस तरह के मामले में फैसला लेने से पहले IB से इनपुट लेना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट प्रतिकूल होती है, तो जेल ट्रांसफर से बचना चाहिए। भाटी ने यह भी बताया कि पंजाब सरकार ने अपने हलफनामे में कहा है कि शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के हित में हवारा को पंजाब की जेल में शिफ्ट करने पर विचार नहीं किया जाना चाहिए।कोर्ट ने कहा कि वह यह तय करने के लिए सक्षम नहीं है कि हवारा को पंजाब की जेल में भेजने से कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित होगी या नहीं। जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि इस मामले में संभावित परिणामों पर विचार करना जरूरी है। अदालत ने दिल्ली सरकार से IB से जरूरी निर्देश और इनपुट लेने को कहा।
हवारा ने पंजाब की जेल में शिफ्ट करने की मांग क्यों की?
जगतार सिंह हवारा ने अपनी याचिका में कहा है कि जिस मामले में वह सजा काट रहा है, वह पंजाब में दर्ज हुआ था और उसकी बेटी भी पंजाब में रहती है। उसका तर्क है कि दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद रहने के कारण पंजाब में लंबित कानूनी कार्यवाही में शामिल होने में उसे कठिनाई होती है। उसने यह भी कहा कि दिल्ली में उसके खिलाफ कोई मामला लंबित नहीं है।
दिल्ली सरकार ने जेल से फरार होने का मामला उठाया
सुनवाई के दौरान ऐश्वर्या भाटी ने हवारा के जेल से फरार होने की घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हवारा को पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या की साजिश में दोषी ठहराया गया था और उसकी मौत की सजा को बाद में उम्रकैद में बदल दिया गया। उन्होंने गृह मंत्रालय की उस एडवाइजरी का भी हवाला दिया, जिसमें हाई-रिस्क कैदियों को एक राज्य से दूसरे राज्य की जेल में स्थानांतरित करने के मामले में IB से परामर्श लेने की बात कही गई है।
हवारा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने दलील दी कि जेल से फरार होने की घटना कई साल पुरानी है। उन्होंने उस समय की सामाजिक परिस्थितियों का भी उल्लेख किया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ट्रांसफर के असर पर विचार जरूरी
जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि अदालत को यह देखना होगा कि हवारा को पंजाब की जेल में भेजने के क्या परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने टिप्पणी की कि हर व्यक्ति के भविष्य में सुधार की संभावना हो सकती है, लेकिन इस मामले में यह भी सुनिश्चित करना होगा कि जेल ट्रांसफर से कोई ऐसी स्थिति पैदा न हो, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित हो।
अब सुप्रीम कोर्ट 3 नवंबर को मामले की अगली सुनवाई करेगा। फिलहाल अदालत ने हवारा को पंजाब की जेल में शिफ्ट करने का आदेश नहीं दिया है, बल्कि दिल्ली सरकार से IB के इनपुट लेकर आने को कहा है।
