देश में सड़कों और फुटपाथों पर पैदल यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कई अहम दिशानिर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया है कि वे मोटर वाहन अधिनियम की धारा 138(1A) और 210D के तहत छह महीने के भीतर नियम तैयार करें। इन नियमों का मकसद सड़कों की डिज़ाइन, रखरखाव, और पैदल यात्रियों व गैर-यांत्रिक वाहनों की सुरक्षा को मजबूत करना है।
राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 6 महीने की समय सीमा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश धारा 138(1A) के तहत ऐसे नियम बनाएं जो नॉन मोटर वाहनों और पैदल यात्रियों की गतिविधियों को नियंत्रित करें और सार्वजनिक स्थानों व राष्ट्रीय राजमार्गों तक उनकी सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करें। इसके साथ ही, कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी राज्य धारा 210D के तहत सड़कों की डिज़ाइन, निर्माण और रखरखाव के मानक तय करने वाले नियम तैयार करें। यह नियम राष्ट्रीय राजमार्गों के अलावा अन्य सभी सड़कों पर लागू होंगे।
पैदल यात्रियों की सुरक्षा लोगों के जीवन के अधिकार से जुड़ा है
जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस के. वी. विश्वनाथन की बेंच ने कहा कि पैदल यात्रियों की सुरक्षा केवल प्रशासनिक ज़िम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। कोर्ट ने कहा कि सुरक्षित फुटपाथ, पैदल पार पथ (जैब्रा क्रॉसिंग) और उचित सड़क रखरखाव नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता से सीधे जुड़े हैं। मई 2025 में दिए गए एक आदेश में भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि फुटपाथों पर चलने का अधिकार जीवन जीने के अधिकार के समान महत्वपूर्ण है।
हेलमेट, गलत लेन ड्राइविंग और ओवरटेकिंग पर भी सख्त निर्देश
कोर्ट ने अपने आदेश में पैदल यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी कई और बातें भी शामिल की हैं। इसमें दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट पहनने की अनिवार्यता, गलत लेन में ड्राइविंग, और असुरक्षित ओवरटेकिंग जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सड़क सुरक्षा का मतलब केवल वाहन चालकों की सुरक्षा नहीं है, बल्कि हर उस व्यक्ति की सुरक्षा है जो सड़क या फुटपाथ का उपयोग करता है।
अनधिकृत हूटर और रंगीन लाइट्स पर लगे रोक
सुप्रीम कोर्ट ने वाहनों पर लगाए जाने वाले अनधिकृत हूटर, लाल-नीली और सफेद एलईडी लाइट्स पर भी चिंता जताई। अदालत ने कहा कि इन उपकरणों का दुरुपयोग सड़क पर अनुशासन को बिगाड़ता है और आम नागरिकों के लिए खतरा पैदा करता है। कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया कि ऐसे वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए जो नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं या बिना अनुमति हूटर और चमकीली लाइट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट के आसपास की समस्या पर भी चर्चा
सुनवाई के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने यह भी कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट के आसपास पैदल यात्रियों को जिन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, उन पर विशेष ध्यान दिया गया है। अदालत ने कहा कि वहां के फुटपाथों और सड़क पार करने की व्यवस्थाओं को सुरक्षित और सुलभ बनाया जाए। कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल, जो इस मामले में अमीकस क्यूरी हैं, को निर्देश दिया कि वे इस मुद्दे पर निगरानी रखें और अदालत में प्रगति रिपोर्ट दाखिल करें।
भारतीय सड़क कांग्रेस की गाइडलाइंस को लागू करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इंडियन रोड्स कांग्रेस की जून 2022 में प्रकाशित पैदल यात्री सुरक्षा दिशा-निर्देश के दूसरे संशोधन का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि इन दिशा-निर्देशों को सभी राज्यों में लागू किया जाना चाहिए ताकि सड़क और फुटपाथ निर्माण के समय सुरक्षा मानकों का पालन हो सके। इन गाइडलाइंस में साफ-सुथरे फुटपाथ, व्हीलचेयर उपयोगकर्ताओं के लिए रैंप, उचित रोशनी और सिग्नल सिस्टम जैसी सुविधाओं का उल्लेख है।
अमल ही सबसे बड़ी चुनौती: कोर्ट की अहम टिप्पणी
आदेश सुनाते हुए जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन दिशा-निर्देशों को लागू कैसे किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से यह याचिका लंबित थी और अदालत समय-समय पर आदेश देती रही है, लेकिन असली सुधार तभी होगा जब राज्यों में इन आदेशों का ईमानदारी से पालन किया जाए। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश देश में सड़क सुरक्षा को नया ढांचा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। छह महीने की समय सीमा तय करके अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल सिफारिशों से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस नियम और सख्त अमल की ज़रूरत है। यदि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने समय पर ये नियम बना लिए और ईमानदारी से लागू किए, तो आने वाले समय में सड़कों पर न केवल वाहन चालकों बल्कि हर पैदल यात्री की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
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