लंबित मामलों का कैसे हो निपटारा? CJI ने आर्बिट्रेशन पर दिया जोर; अदालतों से ऐसे कम हो सकता है बोझ

सीजेआई ने कहा कि भारत में आर्बिट्रेशन को लेकर काफी संभावनाएं हैं, लेकिन अभी भी कई चुनौतियां हैं। उन्होंने माना कि प्रक्रिया में देरी, लागत और कार्यान्वयन से जुड़ी दिक्कतें इन सभी मुद्दों पर काम करने की जरूरत है।

देश में बढ़ते वाणिज्यिक विवादों और लंबित मामलों के बीच वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली को मजबूत करने की जरूरत पर जोर देते हुए सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि आर्बिट्रेशन को भरोसेमंद, तेज और पारदर्शी बनाना समय की मांग है। मुख्य न्यायाधीश ने यह बात दिल्ली में शुरू हुए इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन आर्बिट्रेशन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कही। सीजेआई ने अपने संबोधन में कहा कि अदालतों में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में हर विवाद का समाधान पारंपरिक न्यायिक प्रक्रिया से करना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने कहा कि, "आर्बिट्रेशन जैसी प्रणाली विवादों को जल्दी सुलझाने में मदद कर सकती है। इससे अदालतों पर बोझ भी कम होगा और व्यापारिक माहौल बेहतर बनेगा।"

Supreme Court Chief Justice Suryakant

इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन आर्बिट्रेशन का उद्घाटन

निवेश और व्यापार के लिए जरूरी है भरोसेमंद व्यवस्था

सीजेआई ने कहा कि किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए यह जरूरी है कि वहां विवाद समाधान की प्रक्रिया मजबूत और भरोसेमंद हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेशी निवेशक तभी भरोसा करते हैं जब उन्हें न्यायिक सुरक्षा का विश्वास हो। अगर विवादों का समाधान समय पर नहीं होगा तो निवेश प्रभावित हो सकता है।

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