Captain Ashish Kumar Missing: 1 मार्च को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यापारिक जहाज 'एमटी स्काईलाइट' (MT Skylight) पर हुए घातक मिसाइल हमले के बाद से लापता भारतीय कैप्टन आशीष कुमार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस दुखद रहस्य को सुलझाने का निर्देश दिया है।
'कैप्टन जीवित हैं या मृत?': होर्मुज में मिसाइल हमले के बाद लापता आशीष के मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगी रिपोर्ट
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कैप्टन आशीष कुमार की लोकेशन और मौजूदा स्थिति की जानकारी जुटाकर स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।
डीएनए रिपोर्ट ने बदला पूरा मामला: क्यों उठा जीवित होने का शक?
शुरुआती जांच में कैप्टन आशीष को मृत मान लिया गया था, लेकिन उनकी पत्नी अंशु कुमारी की याचिका ने मामले में नया मोड़ ला दिया है। हमले में जले हुए कैप्टन के केबिन से हड्डियां मिली थीं, जिसके आधार पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था। हालांकि, बाद में हुई डीएनए जांच से साबित हुआ कि वे अवशेष कैप्टन आशीष के नहीं थे।
कैप्टन की पत्नी अंशु कुमारी ने याचिका में बताया कि घटना के तीन दिन बाद (4 मार्च को) यूएई (UAE) और पाकिस्तान सहित अंतरराष्ट्रीय नंबरों से उनके पास कॉल आई, जिसमें 20 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी।
जहाज तबाह होने के घंटों बाद तक कैप्टन के फोन पर व्हाट्सएप मैसेज डिलीवर हो रहे थे। इसके अलावा 31 मार्च को उनका व्हाट्सएप प्रोफाइल मैनुअली डिलीट किया गया, जो किसी के द्वारा फोन इस्तेमाल किए जाने का पक्का सबूत है।
याचिकाकर्ता अंशु कुमारी ने केंद्र सरकार पर जांच में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया है। याचिका में कहा गया कि जीवन और बंधक बनाए जाने के स्पष्ट संकेत मिलने के बावजूद केंद्र सरकार ने न तो कोई विशेष जांच शुरू की और ना ही लापता नागरिक को खोजने के लिए कूटनीतिक चैनलों का उचित इस्तेमाल किया। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को आश्वासन दिया कि वे इस विषय पर सरकार और संबंधित एजेंसियों से जानकारी प्राप्त कर सोमवार तक जवाब दाखिल करेंगे।
