UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) ने एक बड़ा रणनीतिक दांव खेला है। रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने वरिष्ठ राजनेता और पूर्व सांसद केसी त्यागी को पार्टी के संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया है। हाल ही में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) छोड़कर रालोद का दामन थामने वाले केसी त्यागी को इतनी बड़ी जिम्मेदारी देकर जयंत चौधरी ने साफ कर दिया है कि वे आगामी चुनावों में अनुभव और युवा नेतृत्व के तालमेल के साथ उतरने वाले हैं।
जयंत चौधरी ने केसी त्यागी को पार्टी के संसदीय बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया।
गठबंधन की राजनीति के माहिर खिलाड़ी माने जाने वाले केसी त्यागी को यह कमान सौंपकर रालोद ने न सिर्फ पश्चिमी उत्तर प्रदेश बल्कि पड़ोसी राज्यों में भी अपनी सियासी बिसात बिछा दी है। जयंत चौधरी द्वारा गठित इस नए संसदीय बोर्ड में पार्टी के दिग्गज सांसदों, विधायकों, पूर्व जन-प्रतिनिधियों और वरिष्ठ नेताओं को शामिल किया गया है, जिसमें खुद जयंत चौधरी भी बतौर सदस्य शामिल हैं।
क्या है जयंत चौधरी का सियासी उद्देश्य?
केसी त्यागी को इस सर्वोच्च नीति-निर्धारक बोर्ड की कमान सौंपने के पीछे जयंत का उद्देश्य पार्टी के भीतर केवल पारंपरिक चेहरों पर निर्भर न रहकर अनुभवी और मंझे हुए राजनीतिक प्रबंधकों को आगे बढ़ाना है। जेडीयू में रहते हुए केसी त्यागी ने लंबे समय तक नीतीश कुमार की राजनीति को राष्ट्रीय स्तर पर धार देने का काम किया था और अब वही भूमिका वे रालोद के लिए निभाएंगे। समाजवादी राजनीति का दशकों का अनुभव रखने वाले त्यागी के संबंध एनडीए से लेकर विपक्षी दलों तक बेहद गहरे हैं, जो भविष्य में गठबंधन और नीतिगत फैसलों में रालोद के लिए बेहद मददगार साबित होंगे।
पश्चिमी यूपी में त्यागी समाज की एक प्रभावी और निर्णायक आबादी
इस बड़े फैसले के पीछे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जमीनी हकीकत और जातिगत समीकरणों को साधने की सोची-समझी रणनीति भी दिखाई देती है। पश्चिमी यूपी में त्यागी समाज की एक प्रभावी और निर्णायक आबादी है। ऐसे में केसी त्यागी को रालोद में शीर्ष हैसियत देकर जयंत चौधरी किसान राजनीति के साथ-साथ जाट, त्यागी, गुर्जर, राजपूत और ओबीसी जातियों का एक बड़ा सामाजिक गठबंधन तैयार करना चाहते हैं, जिससे रालोद अपनी 'एकल समुदाय' वाली छवि को तोड़कर सर्वसमाज की पार्टी के रूप में स्थापित हो सके।
इसके साथ ही, जयंत चौधरी ने इस 15 सदस्यीय बोर्ड और 4 विशेष आमंत्रित सदस्यों के जरिए राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली के किसान नेताओं को भी जोड़ा है, जो पार्टी के राष्ट्रीय विस्तार और ग्रामीण मतदाताओं को साधने के बड़े मिशन की ओर इशारा करता है। इस बोर्ड में बागपत सांसद डॉ. राजकुमार सांगवान, विधायक राजपाल बालियान, राजस्थान के विधायक सुभाष गर्ग और दिल्ली के बड़े किसान नेता युद्धवीर सिंह जैसे चेहरों को शामिल कर रालोद ने पूरे क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है।
