Ravneet Singh Bittu Diljit Dosanjh: केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने बुधवार को OTT प्लेटफॉर्म Zee5 से फिल्म 'सतलुज' को हटाए जाने पर प्रतिक्रिया दी और उन दावों पर सवाल उठाए जिनमें कहा गया था कि सरकार ने इसे हटवाया है। उन्होंने तर्क दिया कि अगर केंद्र सरकार का इरादा फिल्म को हटाने का होता, तो वह इसे प्लेटफॉर्म पर रिलीज ही नहीं होने देती। इसके अलावा, फिल्म की रिलीज और बाद में उसे हटाए जाने से जुड़े विवाद पर टिप्पणी करते हुए बिट्टू ने गायक-अभिनेता दिलजीत दोसांझ की आलोचना की। बता दें कि जब से स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म से 'सतलुज' को हटाया गया है, तब से यह चर्चा में है।
'वह LA के बड़े बंगलों में बैठे हैं, उन्हें पंजाब की क्या परवाह?'; 'सतलुज' फिल्म विवाद पर दिलजीत दोसांझ पर बरसे केंद्रीय मंत्री
मंत्री ने कहा, 'हमें तभी समझ जाना चाहिए था कि कुछ गड़बड़ है जब दिलजीत दोसांझ ने कहा कि फिल्म OTT प्लेटफॉर्म पर 2-3 दिनों के लिए उपलब्ध रहेगी और फिर हटा दी जाएगी। अगर सरकार का इरादा सच में फिल्म को हटाने का होता, तो वह इसे स्ट्रीम ही क्यों होने देती?'
बिट्टू ने कहा, 'ऐसा लगता है कि जब उन्होंने जरूरी पैसे कमा लिए, तो उन्होंने (फिल्म के निर्माताओं ने) फिल्म हटा दी। OTT प्लेटफॉर्म पर सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है।' उन्होंने दिलजीत की एक और फिल्म 'चमकीला' की भी आलोचना की और कहा कि अगर अभिनेता महिलाओं का सम्मान करते तो वे इसमें कोई किरदार नहीं निभाते। बिट्टू ने आगे कहा, 'दिलजीत दोसांझ सिर्फ पैसे के बारे में सोचते हैं। अगर दिलजीत दोसांझ को अपने परिवार की महिलाओं, जैसे अपनी मां या बहन के लिए जरा भी सम्मान होता, तो वे 'चमकीला' फिल्म में काम नहीं करते।'
बिट्टू ने कहा , 'वह LA में बड़े-बड़े बंगलों में रह रहे हैं, उन्हें पंजाब की क्या परवाह है?'। बिट्टू ने आगे कहा कि राज्य सिर्फ शांति चाहता है। बता दें कि रवनीत बिट्टू पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं, जिनकी 1995 में हत्या कर दी गई थी।
'सतलुज' फिल्म OTT से हटाई गई
यह फिल्म, जिसका पहले नाम 'पंजाब '95' था, 1990 के दशक में पंजाब में मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की जिंदगी पर आधारित है। इसे 3 जुलाई को ZEE5 पर 'सतलुज' नाम से बिना किसी कट-छांट के रिलीज किया गया था।
हनी त्रेहान की डायरेक्ट की गई फिल्म 'सतलुज' खालरा की जिंदगी के बारे में बताती है। खालरा ने 1984 से 1994 के बीच 10 सालों में राज्य में हजारों अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार की जांच की थी। 1995 में वे लापता हो गए थे।
इसके बाद, समाचार एजेंसी PTI के अनुसार, 2005 में पंजाब पुलिस के चार कर्मचारियों को उनके अपहरण और हत्या का दोषी ठहराया गया और सात साल की जेल की सजा सुनाई गई।
दो साल बाद, पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने उनकी सजा बढ़ाकर उम्रकैद कर दी। इससे पहले, यह फिल्म तीन साल से ज्यादा समय तक सेंसर बोर्ड के पास अटकी रही थी। OTT पर रिलीज होने के दो दिन बाद, 5 जुलाई को इसे प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। OTT प्लेटफॉर्म से 'सतलुज' फिल्म को हटाए जाने पर पंजाब की कई राजनीतिक पार्टियों और सिख संगठनों ने प्रतिक्रिया दी।
