उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) विक्रम सिंह ने पुलिस व्यवस्था, थानों में FIR दर्ज करने की प्रक्रिया, महिला सुरक्षा, पुलिसकर्मियों के कार्यदबाव और राजनीतिक हस्तक्षेप जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। POWER CORRIDOR पॉडकास्ट में टाइम्स नाउ नवभारत की वरिष्ठ पत्रकार डॉ रमा सोलंकी से बातचीत के दौरान उन्होंने पुलिस सुधारों पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि पुलिस व्यवस्था में वास्तविक सुधार केवल आधुनिक इमारतों, कंप्यूटर और सुविधाओं से नहीं आएगा, बल्कि इसके लिए अधिकारियों का चरित्र, जवाबदेही, संवेदनशीलता और जनता के प्रति सेवा भाव सबसे ज्यादा जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि थाने में आने वाले आम नागरिक को भय नहीं, बल्कि सुरक्षा और भरोसे का अनुभव होना चाहिए।
थानों में जनता का डर खत्म करना जरूरी
डॉ रमा सोलंकी से बात करते हुए पूर्व DGP विक्रम सिंह ने कहा कि किसी थाने की पहचान उसकी चमकदार इमारत या आधुनिक सुविधाओं से नहीं, बल्कि वहां तैनात पुलिसकर्मियों के व्यवहार से होती है। उन्होंने कहा कि थाने में आने वाले व्यक्ति को ऐसा महसूस होना चाहिए कि वह अपनी समस्या के समाधान के लिए सुरक्षित जगह पर आया है। दुर्भाग्य से आज भी पुलिस और जनता के बीच दूरी बनी हुई है। जनसंपर्क अभियान और कम्युनिटी पुलिसिंग जैसी पहल के बावजूद कई जगहों पर आम नागरिक थाने जाने से डरते हैं।उन्होंने सुझाव दिया कि पुलिस व्यवस्था में जनता के फीडबैक को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति की शिकायत का समाधान नहीं हुआ है, तो संबंधित थाना प्रभारी और जांच अधिकारी से जवाब मांगा जाना चाहिए। शिकायत की जांच के बाद जिसकी गलती सामने आए, उसके खिलाफ कार्रवाई भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जवाबदेही तय होने से पुलिस अधिकारियों की मनमानी पर रोक लगेगी और जनता का विश्वास बढ़ेगा।
FIR दर्ज नहीं करना गंभीर समस्या
पूर्व DGP ने FIR दर्ज करने में होने वाली परेशानियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई बार शिकायतकर्ता को थाने के चक्कर लगाने पड़ते हैं। कभी तकनीकी खराबी, कभी बिजली या इंटरनेट की समस्या और कभी आवेदन में बदलाव करने के नाम पर उसे वापस भेज दिया जाता है।
विक्रम सिंह ने कहा कि शिकायतकर्ता को उसकी भाषा के आधार पर परेशान नहीं किया जाना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति हिंदी नहीं जानता और अंग्रेजी में शिकायत देता है, तो पुलिस को तकनीकी सहायता या अनुवाद की मदद से उसकी शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि थाने में शिकायत नहीं सुनी जाती है, तो वे संबंधित अधिकारियों को ईमेल, स्पीड पोस्ट और सोशल मीडिया के माध्यम से मामले की जानकारी दें तथा शिकायत का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
पुलिसकर्मियों को छुट्टी और बेहतर कार्य वातावरण मिले
इस दौरान विक्रम सिंह ने पुलिसकर्मियों के काम के दबाव और उनके कल्याण पर जोर देते हुए कहा कि लगातार ड्यूटी और पर्याप्त आराम नहीं मिलने का असर उनकी कार्यक्षमता पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी भी इंसान हैं और उन्हें अपने परिवार के साथ समय बिताने, बच्चों की देखभाल करने तथा मानसिक रूप से स्वस्थ रहने का अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में कर्मचारियों की कमी के बावजूद छुट्टी और कल्याण संबंधी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच संवाद बढ़ाने की जरूरत भी बताई, ताकि निचले स्तर के कर्मचारी बिना डर के अपनी समस्याएं सामने रख सकें।
महिला सुरक्षा में संवेदनशीलता और सख्त कार्रवाई जरूरी
महिला सुरक्षा के मुद्दे पर पूर्व DGP ने पुलिसकर्मियों के व्यवहार को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यौन अपराध की शिकायत लेकर थाने पहुंचने वाली पीड़िता के साथ सम्मानजनक और संवेदनशील व्यवहार होना चाहिए। विक्रम सिंह ने कहा कि महिला अपराधों की जांच में पीड़िता की गरिमा और कानूनी प्रक्रिया का पालन सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने ऐसे पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई की वकालत की, जो शिकायतकर्ताओं का उत्पीड़न करते हैं या अपने पद का दुरुपयोग करते हैं। उन्होंने कहा कि केवल चेतावनी या मामूली दंड पर्याप्त नहीं है। गंभीर कदाचार के मामलों में बर्खास्तगी तक की कार्रवाई होनी चाहिए।
राजनीतिक दबाव में गलत काम नहीं करना चाहिए
राजनीतिक हस्तक्षेप पर बात करते हुए विक्रम सिंह ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को वैध निर्देशों का पालन करना चाहिए, लेकिन किसी गलत या गैरकानूनी काम के लिए दबाव आने पर स्पष्ट रूप से मना करने का साहस भी रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक ईमानदार अधिकारी को अपनी सुविधा, पद या मनचाही पोस्टिंग के लिए सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए।
योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली की तारीफ
इस दौरान जब उनसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बारे में सवाल किया गया तो विक्रम सिंह ने उनकी कार्यशैली और प्रशासनिक सख्ती की प्रशंसा की। उन्होंने योगी आदित्यनाथ को कर्मयोगी और सख्त प्रशासक बताते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में पुलिस व्यवस्था के आधुनिकीकरण और तकनीक के इस्तेमाल की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं।
बातचीत के दौरान उन्होंने पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था, साइबर अपराध से निपटने के लिए सुविधाओं और फॉरेंसिक ढांचे के विस्तार का भी उल्लेख किया। उन्होंने तकनीक आधारित पुलिसिंग को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि अपराध नियंत्रण के लिए आधुनिक उपकरणों के साथ बेहतर योजना और इच्छाशक्ति की भी जरूरत है।
पॉडकास्ट के दौराम जब पूर्व डीजीपी से पूछा गया कि वे उत्तर प्रदेश पुलिस को पांच में से कितने स्टार देंगे? इस सवाल पर उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह पुलिस को पांच से भी ज्यादा, यानी 10 स्टार देंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि पुलिस विभाग में कुछ कमियां और अनुचित आचरण वाले लोग मौजूद हैं, जिन्हें सुधारने की जरूरत है।
आधे-अधूरे एनकाउंटर नहीं, कानून के तहत सजा जरूरी
अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई पर विक्रम सिंह ने कहा कि आधा-अधूरा एनकाउंटर अपराध नियंत्रण का स्थायी समाधान नहीं है। उनके मुताबिक, अपराधियों को कानून के तहत कठोर सजा दिलाना, मामलों की प्रभावी जांच करना और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाना ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने गंभीर मामलों में फास्ट ट्रैक अदालतों के माध्यम से शीघ्र सुनवाई की जरूरत पर जोर दिया।