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केवल NEET ही नहीं, बीते वर्षों में इन राज्यों में सामने आ चुके हैं पेपर लीक के 6 दर्जन मामले

लोग सवाल पूछ रहे हैं कि परीक्षा कराने की व्यवस्था आखिर फुल प्रूफ कब होगी। कब ऐसा समय आएगा जब प्रवेश परीक्षा में बैठने के बाद छात्र निश्चिंत होकर अपने परीक्षा परिणाम का इंतजार करेंगे। बार-बार हुए पेपर लीक ने परीक्षा कराने वाली संस्थाओं और सरकार की मंशा और नीयत पर सवाल खड़े किए हैं।

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रुक नहीं रहा पेपर लीक। तस्वीर-AI
Edited by: आलोक कुमार राव
Updated May 19, 2026, 14:32 IST
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Paper Leaks: देश में प्रवेश परीक्षाओं का प्रश्नपत्र लीक होना राष्ट्रीय शर्म की बात बन चुका है। पेपर लीक के बाद सिस्टम हर बार इस पर पूरी तरह रोक लगाने का वादा करता आया है लेकिन यह वादा तभी तक दिखता है जब तक कि दूसरा पेपर लीक नहीं हो जाता है। सिस्टम की खामी उजागर हो जाती है और लाखों छात्रों की उम्मीदों पर पानी फिर जाता है। परीक्षा माफिया और उनका नेटवर्क सिस्टम का मखौल उड़ाते हैं। छात्र मानसिक, आर्थिक एवं भावनात्मक चुनौती से गुजरते हैं। NEET-2026 के पेपर लीक से सिस्टम की खामी पर बहस एक बार फिर तेज हुई है। नीट परीक्षा कराने वाली NTA सवालों एवं जांच के घेरे में है। गिरफ्तारियां हो रही हैं।

कब फुल प्रूफ कब होगी परीक्षा कराने की व्यवस्था?

लोग सवाल पूछ रहे हैं कि परीक्षा कराने की व्यवस्था आखिर फुल प्रूफ कब होगी। कब ऐसा समय आएगा जब प्रवेश परीक्षा में बैठने के बाद छात्र निश्चिंत होकर अपने परीक्षा परिणाम का इंतजार करेंगे। बार-बार हुए पेपर लीक ने परीक्षा कराने वाली संस्थाओं और सरकार की मंशा और नीयत पर सवाल खड़े किए हैं। सरकार अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकती। रिपोर्टों में बीते वर्षों में देश में हुए पेपर लीक के बारे में कई आंकड़े जारी किए गए हैं। इन आंकड़ों एवं रिपोर्टों को देखने पर पता चलता है कि बीते सात वर्षों में अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं के करीब 70 पेपर लीक हुए।

कई राज्यों में हो चुका है पेपर लीक

सबसे ज्यादा किस राज्य में पेपर लीक हुए हैं। यदि इस पर बात करें तो इसमें राजस्थान सबसे आगे हैं। इसके बाद उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और गुजराज जैसे बड़े राज्यों का नंबर आता है। पेपर लीक केवल भर्ती परीक्षाओं और उच्च शिक्षा प्रवेश परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि स्कूल परीक्षाएं भी इससे प्रभावित हैं। रिपोर्टों के मुताबिक बिहार बोर्ड की कक्षा 10 की परीक्षा के प्रश्नपत्र छह बार लीक हो चुके हैं। पश्चिम बंगाल में पिछले सात वर्षों में राज्य बोर्ड परीक्षा के पेपर कम-से-कम 10 बार लीक हुए। तमिलनाडु में 2022 में कक्षा 10 और 12 दोनों के पेपर लीक हुए थे।

राजस्थान में हुए सबसे ज्यादा पेपर लीक

राजस्थान पिछले कुछ वर्षों में कई पेपर लीक मामलों को लेकर कुख्यात रहा है। रिपोर्टों की मानें तो 2015 से 2023 के बीच राज्य में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के 14 से अधिक पेपर लीक हुए। दिसंबर 2022 में वरिष्ठ सरकारी स्कूल शिक्षकों की भर्ती के लिए आयोजित सामान्य ज्ञान परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) को परीक्षा रद्द करनी पड़ी। इसके अलावा यूजीसी नेट और पुलिस भर्ती परीक्षा के पेपर भी पिछले दो वर्षों में लीक हुए।

गुजरात में पेपर लीक के 14 मामले

गुजरात में पिछले सात वर्षों में 14 पेपर लीक के मामले सामने आए। इनमें GPSC चीफ ऑफिसर परीक्षा (2014), तलाटी परीक्षा (2015 और 2016), टीचर्स एप्टीट्यूड टेस्ट (2018) सहित मुख्य सेविका, नायब चिटनिस, लोक रक्षक दल और गैर-सचिवालय क्लर्क परीक्षाएं शामिल हैं। हाल के मामलों में हेड क्लर्क परीक्षा (2021), GSSSB पेपर लीक (2021), फॉरेस्ट गार्ड परीक्षा (2022), जूनियर क्लर्क परीक्षा (2023) और सब-ऑडिटर परीक्षा शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश में पेपर लीक की नौ घटनाएं

उत्तर प्रदेश में 2017 से 2024 के बीच कम-से-कम नौ पेपर लीक की घटनाएं सामने आईं। इनमें इंस्पेक्टर ऑनलाइन भर्ती परीक्षा (2017), UPTET (2021), प्रारंभिक पात्रता परीक्षा (PET), बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा (2021), नीट-यूजी (2021) और 2022 की कक्षा 12 बोर्ड परीक्षा शामिल हैं। 2024 की कांस्टेबल भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने से 48 लाख से अधिक अभ्यर्थी प्रभावित हुए, जो एक बेहद बड़ा आंकड़ा है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, बिहार और हरियाणा जैसे कई अन्य राज्यों में भी पिछले सात वर्षों के दौरान पेपर लीक के मामले सामने आए हैं।

कानून बना, लेकिन असर नहीं

संसद ने 2024 में पेपर लीक माफिया पर सख्ती के लिए एक कानून पारित किया, जिसमें अधिकतम 10 साल की जेल और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। इसके बावजूद पेपर लीक की घटनाओं पर कोई खास असर दिखाई नहीं दे रहा। इससे परीक्षा प्रणाली और विभिन्न बोर्डों के अधिकारियों की ईमानदारी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इन कानूनों में पेपर लीक होने के बाद कार्रवाई का प्रावधान तो है, लेकिन निष्पक्ष और सुरक्षित परीक्षा आयोजन सुनिश्चित करने के लिए ठोस रोकथाम उपायों की कमी महसूस की जा रही है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 13 जून को नीट-यूजी परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि 'पेपर लीक का कोई सबूत नहीं मिला है' और 'NTA में भ्रष्टाचार के आरोप निराधार हैं।' पिछले साल 6 जून को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने भी सोशल मीडिया पर वायरल पेपर लीक की खबरों को 'पूरी तरह बेबुनियाद' बताया था।

पेपर लीक के पीछे की वजह

पुलिस जांच में सामने आया है कि लगभग हर पेपर लीक मामले में भारी रकम का लेन-देन होता है। कई मामलों में सरकारी अधिकारी, शिक्षक और प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारी भी शामिल पाए गए हैं। सोशल मीडिया भी लीक हुए प्रश्नपत्रों को तेजी से फैलाने में बड़ी भूमिका निभाता है। कुछ ही मिनटों में हजारों अभ्यर्थियों तक पेपर पहुंच जाता है, अक्सर पैसों के बदले। अक्सर पेपर लीक के बाद परीक्षाएं काफी लंबे समय बाद दोबारा आयोजित की जाती हैं। इससे छात्रों का मनोबल टूटता है और उनका भविष्य प्रभावित होता है। कम-से-कम 20 मामलों में परीक्षाएं लगभग एक साल बाद आयोजित की गईं, जबकि छह मामलों में छात्रों को दो साल तक इंतजार करना पड़ा। वहीं 11 मामलों में अब तक कोई समाधान नहीं निकला है।

कई पेपर लीक कभी सामने ही नहीं आए

कई बार पेपर लीक की घटनाएं समय पर उजागर नहीं हो पातीं और कुछ लोग अवैध तरीके से नौकरी हासिल कर लेते हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में 'जमीन के बदले नौकरी' जैसे मामले भी सामने आए हैं। ऐसे मामलों से मेहनती युवा और नौकरी के इच्छुक उम्मीदवार खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ऐसे डॉक्टरों, पुलिसकर्मियों या सरकारी कर्मचारियों पर भरोसा किया जा सकता है जिन्होंने गलत तरीके से नौकरी हासिल की हो? क्या लोग अपनी जान ऐसे लोगों के भरोसे छोड़ पाएंगे?

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