Asaduddin Owaisi on Nitish Kumar: असदुद्दीन ओवैसी के तीखे बोल से हर कोई वाकिफ है। तेलंगाना से बाहर वो पांव पसारने की कोशिश कर रहे हैं और उन्हें बिहार में कामयाबी मिली। हालांकि उनके अपने विधायक अपने नहीं रहे। वो तरह तरह के आरोप लगाते हैं। इन सबके बीच बिहार की सियासत पर टिप्पणी करते हुए बताया कि नीतीश कुमार को देश किस रूप में याद करेगा। पूर्णिया में ओवैसी ने एक तरफ खुद के बारे में मुस्लिम परस्त होने ले इनकार किया। लेकिन नीतीश के बारे में कहा कि वो खास समाज और सोच से बाहर नहीं निकल सकते। बीजेपी का विरोध वो सिर्फ कहने के लिए करते हैं। हकीकत में ऐसा कुछ भी नहीं। बीजेपी को उन्होंने फलने फूलने में मदद की है। लेकिन क्या ओवैसी इस तरह की बातों को कह सिर्फ कहने के लिए विरोध की बात कर रहे हैं या वास्तव में उनकी बातों में दम है।
असदुद्दीन ओवैसी,मुखिया, एआईएमआईएम
'नीतीश ही बीजेपी के मददगार'
ओवैसी ने पूर्णिया में कहा कि भारत में लोग और इतिहास नीतीश कुमार को बीजेपी को मजबूत करने के रूप में याद करेगा। गुजरात जब जल रहा था तो वो रेल मंत्री थे। अगर वो समझते हैं कि एआईएमआईएम सिर्फ मुस्लिमों की पार्टी है तो वो कुर्मी और कुशवाहा से आगे नहीं बढ़ सकते। उन्होंने कहा कि आप सिर्फ बातों से बीजेपी को परास्त नहीं कर सकते हैं, जो भाषा बोलते हैं उसे जमीन पर उतारने की कोशिश भी तो करिए। लेकिन बिहार में क्या हो रहा है। नीतीश कुमार का रुख लालू परिवार के मामले में साफ क्यों नहीं आ रहा। नीतीश कुमार आखिर किस दिन का इंतजार कर रहे है जब वो कड़े अंदाज में बीजेपी की मुखालफत करेंगे।
Bihar | History will remember Nitish Kumar (Bihar CM) for strengthening BJP in India. When Gujarat was burning, he… t.co/n8sHIgxPY6
— ANI (@ANI) Mar 18, 2023
क्या कहते हैं जानकार
जानकारों का कहना है कि बिहार की राजनीति में अब स्वार्थ की मात्रा बढ़ गई है। किसी तरह से कुर्सी पर काबिज रहने के लिए नैतिकता विहीन राजनीति का स्तर बढ़ गया है। अगर आप नीतीश कुमार को देखें तो वो अलग अलग घटक दलों के साथ सरकार में बने हैं। आप इसे सुविधा वाली राजनीति मान सकते हैं। अगर ओवैसी कहते हैं कि नीतीश कुमार ने बीजेपी की मदद की है तो उसमें गलत बात नहीं है। इस बात से पूरी दुनिया वाकिफ है कि अगर बीजेपी को नीतीश का साथ नहीं मिला होता तो संसदीय सीटों पर बीजेपी का आंकड़ा कभी बेहतर ना हो पाता। बिहार विधानसभा में बीजेपी दूसरे नंबर की सबसे बड़ी पार्टी ना होती। लेकिन जब ओवैसी पूरी तरह से नीतीश कुमार को ही कसूरवार ठहराते हैं तो शायद वो अपने योगदान को भूल जाते हैं। राजनीति में परसेप्शन की लड़ाई अहम है। अगर ओवैसी को बिहार में राजनीति करनी है तो जाहिर सी बात है कि वो गैर फिरकापरस्त ताकतों के खिलाफ ही बोलेंगे और यह काम पहले से वहां के राजनीतिक दल करते रहे हैं।
