दिल्ली : राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ आतंकवाद रोधी कानून UAPA के तहत जांच बंद नहीं की है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, एजेंसी की UAPA के तहत जांच अभी जारी है। NIA ने फिलहाल सातों आरोपियों के खिलाफ इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट (IFA) के तहत चार्जशीट दाखिल की है। जांच के दौरान इस कानून के तहत अवैध प्रवेश, भारत में ठहरने और आवाजाही से जुड़े अपराध प्रथम दृष्टया स्थापित होने के बाद एजेंसी ने यह चार्जशीट दाखिल की।
(फाइल फोटो-Istock)
सूत्रों के अनुसार, NIA ने अपनी पहली चार्जशीट में स्पष्ट किया है कि UAPA के तहत जांच अभी जारी है। कानून के तहत चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी आगे की जांच की जा सकती है और नए साक्ष्य सामने आने पर सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल करने का प्रावधान है।
सातों आरोपी 8 सितंबर को न्यायिक हिरासत के 180 दिन पूरे करने वाले थे। यदि निर्धारित अवधि के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं की जाती, तो उन्हें डिफॉल्ट बेल मिलने का कानूनी आधार बन सकता था। ऐसे में IFA के तहत अपराध स्थापित होने के बाद NIA ने पहली चार्जशीट दाखिल की।
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एनआईए ने विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा की अदालत में IFA की धारा 21 और 23 के तहत आरोप लगाए हैं। एजेंसी ने आरोपियों पर अवैध तरीके से भारत में प्रवेश करने, रहने और आवाजाही करने का आरोप लगाया है। NIA ने 13 मार्च को वैन डाइक के साथ छह यूक्रेनी नागरिकों—कामिन्स्की विक्टर, हुरबा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुखमानोव्स्की, स्टेफानकिव मारियन और होंचारुक मैक्सिम—को गिरफ्तार किया था। आरोप है कि ये लोग म्यांमार से मिजोरम सीमा के रास्ते भारत में दाखिल हुए और बाद में देश के अलग-अलग घरेलू हवाई अड्डों पर पकड़े गए।
जांच एजेंसी ने पहले इनके खिलाफ UAPA के साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया था। आरोपियों के बारे में यह भी आरोप लगाया गया था कि वे भाड़े के लड़ाकों (mercenaries) के तौर पर काम कर रहे थे। सरकारी सूत्रों ने यह भी कहा कि अमेरिकी राजनयिकों द्वारा अपने नागरिक की हिरासत का मुद्दा उठाना सामान्य राजनयिक प्रक्रिया है। विदेशों में भारतीय नागरिकों की गिरफ्तारी के मामलों में भी भारतीय मिशन संबंधित अधिकारियों से कांसुलर एक्सेस, कानूनी सहायता और निष्पक्ष व्यवहार की मांग करते हैं।
