India China relation : चीन के 77वें राष्ट्रीय दिवस के मौके पर बुधवार को दिल्ली में आयोजित समारोह में भारत और चीन की ओर से द्विपक्षीय रिश्तों को लेकर कई अहम संदेश सामने आए। भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने आर्थिक रिश्तों को स्थिर, स्पष्ट और भरोसेमंद बनाने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने चीन के बाजार में भारतीय उत्पादों और सेवाओं के लिए ज्यादा और बेहतर बाजार पहुंच की जरूरत दोहराई।
भारत-चीन रिश्तों की नई तस्वीर।
द्विपक्षीय व्यापार 151.1 बिलियन डॉलर रहा
अग्रवाल ने यह भी बताया कि 2025-26 में भारत-चीन द्विपक्षीय व्यापार 151.1 बिलियन डॉलर रहा और चीन को भारत का निर्यात 36% से ज्यादा बढ़कर 19.47 बिलियन डॉलर हो गया है। उन्होंने चीन के बाजार में भारत के कृषि और समुद्री उत्पाद, दवाइयां, कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान और सेवाओं के निर्यात की संभावनाएं जताई हैं।
भारत-चीन रिश्तों को आगे बढ़ाने पर जोर
वहीं, चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने भारत-चीन रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए साझेदारी, आपसी लाभ और रणनीतिक भरोसे पर जोर दिया। उन्होंने साफ कहा कि चीन और भारत को एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि साझेदार के तौर पर देखना चाहिए।
भारत का संदेश- कारोबार में स्थिरता और बराबरी जरूरी
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भारत-चीन आर्थिक रिश्तों को ऐसा बनाने की जरूरत बताई जिसमें कारोबारियों को नीतियों और कारोबारी माहौल को लेकर स्पष्टता और स्थिरता मिले। भारत की एक बड़ी चिंता चीन के साथ व्यापार में मौजूद असंतुलन है। भारत चाहता है कि चीन के साथ कारोबार बढ़े, लेकिन इसके साथ ही भारतीय कंपनियों को भी चीन के बाजार में अपने सामान और सेवाएं बेचने के ज्यादा अवसर मिलें। यानी भारत का फोकस सिर्फ चीन से सामान खरीदने पर नहीं, बल्कि चीन को भारतीय सामान और सेवाओं का निर्यात बढ़ाने पर भी है।भारत में चीनी राजदूत के 5 बड़े संदेश
1. भारत-चीन प्रतिद्वंद्वी नहीं, साझेदार
चीनी राजदूत ने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे को प्रतिस्पर्धी या खतरे के रूप में नहीं, बल्कि विकास के अवसर और साझेदार के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने रिश्तों को रणनीतिक और लंबे समय के नजरिए से आगे बढ़ाने की बात कही।2. दोनों देशों को ऐसा सहयोग चाहिए जिसमें दोनों को फायदा हो
चीन ने आपसी लाभ वाले सहयोग पर जोर दिया। राजदूत के मुताबिक दोनों देशों के बीच व्यापार और लोगों के बीच संपर्क बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि इस साल की पहली छमाही में भारत-चीन व्यापार 91.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया।3. सीमा पर शांति, रिश्तों को आगे बढ़ाने की कोशिश
चीन ने कहा कि भारत और चीन को आपसी सम्मान और समझ के साथ आगे बढ़ना चाहिए। सीमा से जुड़े मुद्दों और द्विपक्षीय रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए समानांतर तरीके से काम करने और सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर जोर दिया गया।4. मोदी-शी मुलाकात के बाद रिश्तों को स्थिर दिशा देने की बात
चीनी राजदूत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की हालिया मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों को स्वस्थ और स्थिर दिशा में आगे बढ़ाने को लेकर महत्वपूर्ण सहमति बनाई है। चीन ने उस सहमति को जमीन पर उतारने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करने की बात कही।5. ब्रिक्स, संयुक्त राष्ट्र, SCO और G20 में सहयोग बढ़ाने का संदेश
चीन ने कहा कि भारत और चीन को ब्रिक्स, संयुक्त राष्ट्र, शंघाई सहयोग संगठन और जी20 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आपसी तालमेल बढ़ाना चाहिए। साथ ही दोनों देशों को विकासशील देशों यानी ग्लोबल साउथ के साझा हितों के लिए भी मिलकर काम करना चाहिए।ब्रिक्स के बाद क्या बदलने की कोशिश?
ब्रिक्स में मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद अब दोनों देशों के रिश्तों में सिर्फ राजनीतिक संवाद ही नहीं, बल्कि व्यापार और आर्थिक सहयोग को भी आगे बढ़ाने पर जोर दिखाई दे रहा है। भारत की तरफ से संदेश है कि चीन के साथ व्यापार बढ़ना चाहिए, लेकिन इसके लिए व्यापार का माहौल स्थिर और भरोसेमंद हो तथा भारतीय उत्पादों और सेवाओं को चीन के बाजार में ज्यादा जगह मिले।चीन की तरफ से आपसी लाभ वाले सहयोग, व्यापार बढ़ाने, लोगों के बीच संपर्क मजबूत करने और रणनीतिक स्तर पर रिश्तों को बेहतर बनाने की बात कही गई है। ब्रिक्स के बाद कोशिश है कि भारत-चीन रिश्तों में बातचीत को राजनीतिक स्तर से आगे बढ़ाकर व्यापार, कारोबारी संपर्क, सीमा पर शांति और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग जैसे व्यावहारिक मुद्दों तक ले जाया जाए।
