TMC छोड़ने के महीनों बाद, यूसुफ पठान को गुजरात सरकार से उपहार के तौर पर 500 वर्ग मीटर का प्लॉट मिलेगा, जिससे 14 साल पुराना जमीन विवाद खत्म हो जाएगा। उस समय एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर रहे पठान ने 2012 में पहली बार VMC (वडोदरा नगर निगम) से संपर्क किया था। उन्होंने बिना किसी सार्वजनिक नीलामी के इस प्लॉट को 99 साल की लीज पर देने की मांग की थी। उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर होने के नाते सुरक्षा चिंताओं का हवाला दिया और अपने पारिवारिक घर से सटी जमीन मांगी थी।
बंगाल चुनाव में हार के बाद, अन्य सांसदों के साथ तृणमूल कांग्रेस (TMC) छोड़ने के तीन महीने से ज्यादा समय बीत जाने पर, यूसुफ पठान को गुजरात सरकार से 900 वर्ग मीटर से ज्यादा जमीन मिलने जा रही है। इससे राज्य सरकार के साथ उनका 14 साल पुराना ज़मीन विवाद खत्म हो जाएगा।
एक मीडिया रिपोर्ट' के अनुसार, यह प्लॉट वडोदरा के तंडलजा इलाके में है, जो पठान परिवार के घर के बगल में स्थित है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत, 500 वर्ग मीटर ज़मीन पठान को आवासीय उपयोग के लिए उपहार के तौर पर दी जाएगी, जबकि बाकी 478 वर्ग मीटर जमीन उन्हें उसकी आंकी गई कीमत के 55% पर ट्रांसफर की जाएगी।
यह जमीन वडोदरा नगर निगम (VMC) की
पठान ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस से की थी। 2024 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर पश्चिम बंगाल की बहरामपुर लोकसभा सीट जीती थी। हालांकि, जून 2026 में, वह उन सांसदों में शामिल थे जिन्होंने TMC से अलग होकर 'नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NDA गठबंधन का हिस्सा) का दामन थाम लिया था। घटनाक्रम से पठान की राजनीतिक संबद्धताओं पर फिर से चर्चा शुरू हो गई है और राज्य सरकार के साथ उनके जमीन विवाद का इतिहास भी एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।
क्या था यूसुफ पठान का जमीन विवाद?
उस समय एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर रहे पठान ने 2012 में पहली बार VMC से संपर्क किया था और बिना किसी सार्वजनिक नीलामी के इस प्लॉट को 99 साल की लीज पर देने की मांग की थी। उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर होने के नाते सुरक्षा चिंताओं का हवाला दिया और अपने पारिवारिक घर से सटी जमीन मांगी थी। गुजरात सरकार के शहरी विकास विभाग ने 2014 में इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।
हालांकि, जून 2024 में यह विवाद फिर से सामने आया-यह समय पठान के TMC के साथ अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करने के 2 महीने बाद का था। VMC ने पठान को एक नोटिस जारी किया, जिसमें उनसे उस जगह को खाली करने के लिए कहा गया, जिसे VMC ने जमीन पर 'अतिक्रमण' बताया था। पठान ने इस नोटिस को गुजरात हाई कोर्ट में चुनौती दी। जून 2026 में, कोर्ट ने सवाल उठाया कि बिना किसी औपचारिक आवंटन या भुगतान के जमीन पर कब्जा कैसे किया जा सकता है और वहां बाड़ कैसे लगाई जा सकती है। इसके बाद, यह कानूनी विवाद कोर्ट के बाहर सुलझाए जाने की दिशा में आगे बढ़ा।
