'सीमा पर शांति के बिना आपसी रिश्ते सामान्य नहीं हो सकते', चीन को विदेश मंत्री जयशंकर का दो टूक संदेश

ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में भारत-चीन संबंधों पर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि हम चीन से कहते हैं कि यदि आप सामान्य संबंध चाहते हैं और द्विपक्षीय रिश्तों के अन्य पहलुओं को भी आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो यह समझना मुश्किल नहीं है कि सीमा पर स्थिरता जरूरी है।

S Jaishankar: लद्दाख में 28 रणनीतिक स्थानों और भौगोलिक क्षेत्रों के मानकीकृत नाम तय करने के भारत के फैसले पर चीन की आपत्ति पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कड़ा संदेश दिया है। विदेश मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि सीमा पर शांति के बगैर आपसी रिश्ते सामान्य नहीं हो सकते। ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में भारत-चीन संबंधों पर विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि हम चीन से कहते हैं कि यदि आप सामान्य संबंध चाहते हैं और द्विपक्षीय रिश्तों के अन्य पहलुओं को भी आगे बढ़ाना चाहते हैं, तो यह समझना मुश्किल नहीं है कि सीमा पर स्थिरता जरूरी है। सीमा पर शांति और सौहार्द बनाए रखना बेहद आवश्यक है।

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चीन को जयशंकर ने दिया दो टूक संदेश।

सीमा विवाद कोई नया मुद्दा नहीं-जयशंकर

उन्होंने कहा, 'भारत और चीन के बीच सीमा का अब तक कोई सहमत निर्धारण नहीं हुआ है। यह कोई नया मुद्दा नहीं है, बल्कि कई दशकों से चला आ रहा है। 1975 से 2020 तक, यानी पूरे 45 वर्षों तक, सीमा पर किसी की जान नहीं गई। आखिरी बार 1975 में सीमा पर मौतें हुई थीं। इस दौरान भारत और चीन के संबंधों में भी सुधार हुआ और वे आगे बढ़े। लेकिन 2020 में, जब पूरी दुनिया कोविड लॉकडाउन के दौर से गुजर रही थी, तब सीमा पर कई घटनाएं हुईं। अंततः दोनों पक्षों के सैनिकों के बीच एक झड़प हुई, जिसमें दोनों तरफ के कई सैनिक मारे गए। भारत के लिए यह 1975 से चली आ रही स्थिति से एक बहुत बड़ा बदलाव था। हमारा स्पष्ट रुख है कि यदि सीमा पर शांति और स्थिरता भंग होती है, तो इसका असर द्विपक्षीय संबंधों पर भी पड़ेगा।'

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