संयुक्त राष्ट्र ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधार को लेकर भारत के रुख का पुरजोर समर्थन किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में UNSC सुधारों को लेकर उठाए गए मुद्दों पर सहमति जताते हुए यूएन ने स्वीकार किया है कि 5 स्थायी सदस्यों वाला वर्तमान ढांचा अब 21वीं सदी की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को नहीं दर्शाता है।
UN महासचिव दुजारिक का अहम बयान
1945 के नहीं, 2026 के विश्व के हिसाब से बदलें अंतरराष्ट्रीय संस्थान
संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक (Stéphane Dujarric) ने कहा कि सुरक्षा परिषद और वैश्विक वित्तीय संस्थानों में व्यापक बदलाव समय की मांग है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, सुरक्षा परिषद संयुक्त राष्ट्र के शांति और सुरक्षा ढांचे का केंद्र है। 5 स्थायी सदस्यों का यह मौजूदा स्वरूप 21वीं सदी का प्रतिनिधित्व नहीं करता। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को 1945 के बजाय वर्ष 2026 की दुनिया और उसकी वास्तविकताओं को दर्शाना होगा। इस संगठन को और अधिक प्रभावी व प्रतिनिधि बनाने के लिए बदलाव को अब और नहीं टाला जा सकता।
पीएम मोदी ने उठाए अहम सवाल
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक शासन प्रणाली के मौजूदा ढांचे की आलोचना करते हुए इसे एक 'पिरामिड' जैसा बताया था, जिसमें शीर्ष पर बैठे कुछ देशों के पास ही निर्णय लेने की शक्ति है। ग्लोबल साउथ की उपेक्षा: पीएम मोदी ने कहा कि संकटों का सबसे ज्यादा असर झेलने वाला 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देश) फैसले लेने के मामले में आज भी पीछे की पंक्ति में खड़ा है। पीएम मोदी ने ब्रिक्स देशों से वैश्विक शासन सुधार के लिए 10 प्रस्तावों वाला एक साझा रोडमैप तैयार करने का आह्वान किया, जो प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम-निर्माण पर आधारित हो।
'नई दिल्ली घोषणापत्र' पर सहमति
यूएन प्रवक्ता ने भारत द्वारा ब्रिक्स सम्मेलन के सफल आयोजन और 'नई दिल्ली घोषणापत्र' (New Delhi Declaration) को सर्वसम्मति से पारित कराने के लिए पीएम मोदी और भारत के नेतृत्व की सराहना की। यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और पीएम मोदी के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में यूक्रेन और मध्य पूर्व (Middle East) के संघर्षों पर चर्चा हुई। यूएन ने माना कि भारत वैश्विक शांति समझौतों में एक महत्वपूर्ण 'ब्रिज बिल्डर' की भूमिका निभा सकता है।
'नई दिल्ली घोषणापत्र' के मुख्य बिंदु: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपनाए गए संयुक्त घोषणापत्र में कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सुधारों पर बल दिया गया:
- ब्रिक्स सदस्यों जिनमें चीन और रूस भी शामिल हैं—ने UNSC में भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका की आकांक्षाओं का समर्थन दोहराया।
- आर्थिक संस्थानों की संरचना को बदलकर उनमें विकासशील देशों की आर्थिक हिस्सेदारी के अनुसार प्रतिनिधित्व देने की मांग की गई।
- विश्व व्यापार संगठन (WTO) के विवाद निपटान तंत्र को पूरी तरह से बहाल करने और एकतरफा व्यापारिक प्रतिबंधों को समाप्त करने का आह्वान किया गया।
- संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष पदों पर किसी एक देश का एकाधिकार खत्म करने और अफ्रीका, एशिया व लैटिन अमेरिका से महिलाओं के नेतृत्व को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई।
