ऐसे बच सकती थी इंदिरा गांधी की जान, उनके शरीर से गोलियां निकालने वाले डॉक्टर वेणुगोपाल ने याद किया वो मंजर

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  • Updated Jul 12, 2023, 09:27 AM IST

Indira Gandhi Assassination: दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में 31 अक्टूबर 1984 की सुबह नए निदेशक कार्यभार संभालने वाले थे कि अचानक जो घटा, उसकी किसी ने सपने में भी कल्पना नहीं की थी। श्रीमती गांधी का ऑपरेशन कर उनके शरीर से गोलियां निकालने वाले डॉ पी वेणुगोपाल आज भी उस खौफनाक दिन को भूल नहीं पाए हैं।

Indira Gandhi Assassination: दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में 31 अक्टूबर 1984 की सुबह नए निदेशक कार्यभार संभालने वाले थे कि अचानक जो घटा, उसकी किसी ने सपने में भी कल्पना नहीं की थी। थोड़ी ही देर बाद गोलियों से छलनी तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को वहां लाया गया। अस्पताल में हताशा और अफरा-तफरी का ऐसा माहौल उत्पन्न हो गया जिसे शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल था। श्रीमती गांधी का ऑपरेशन कर उनके शरीर से गोलियां निकालने वाले डॉ पी वेणुगोपाल आज भी उस खौफनाक दिन को भूल नहीं पाए हैं।

Indira Gandhi Assassination

पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी

इंदिरा गांधी के आखिरी वक्त की हृदयविदारक कहानी

अनुभवी हृदय रोग विशेषज्ञ ने अपने संस्मरणों को लेकर लिखी किताब ‘हार्टफेल्ट’ में उन 4 घंटों का विस्तृत विवरण दिया है जब एम्स के डॉक्टरों, सर्जनों और नर्सिंग स्टाफ ने गांधी को बचाने के लिए अथक प्रयास किया था। वेणुगोपाल उस समय एम्स के हृदय शल्यचिकित्सा विभाग के प्रमुख थे। और अगस्त 1994 में भारत में पहला हृदय प्रतिरोपण करने की उपलब्धि भी उन्हीं के नाम दर्ज है। पिछले हिफ्ते एम्स के पूर्व निदेशक की किताब का विमोचन किया गया। उन्होंने किताब में लिखा है कि खून से सनी उनकी साड़ी से फर्श पर गिरती हुई गोलियां, ‘ओ-निगेटिव’ रक्त चढ़ाने की जीतोड़ कोशिश, और अस्पताल के गलियारे में अगले प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण पर हो रही राजनीतिक चर्चा... 39 साल बाद, आज भी सब साफ साफ याद है। उन्होंने लिखा है कि बेड पर उस दुबली-पतली काया को देखकर मैं हिल गया; उनके पेट से खून बह रहा था और वह अपने ही खून से पूरी तरह भीग गई थीं। चेहरा पीला पड़ गया था, मानो शरीर से सारा खून निकल गया हो.... खून तेजी से बह रहा था, उनके चारों ओर खून का तालाब बन गया।

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