रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को राज्यसभा को बताया कि भारतीय रेलवे ने धुले हुए चादरों की गुणवत्ता जांचने के लिए एआई-कैमरा का उपयोग करने वाली प्रायोगिक परियोजना शुरू की है।उन्होंने एक सवाल के लिखित जवाब में उच्च सदन को यह जानकारी दी।उनसे सवाल किया गया था कि चादरों को प्रत्येक यात्रा के उपरांत धोए जाने के विपरीत ऊनी कंबलों को माह में एक बार धोए जाने का स्वास्थ्य एवं स्वच्छता की दृष्टि से क्या औचित्य है। इसके साथ ही स्वचालित एआई- कैमरा दाग-धब्बा पहचान प्रौद्योगिकी के उपयोग को लेकर भी सवाल किया गया था।
दाग पहचानने के लिए शुरू हुई नई तकनीक (प्रतीकात्मक फोटो)
मंत्री ने कहा कि भारतीय रेल वातानुकूलित श्रेणियों में यात्रा करने वाले यात्रियों को प्रत्येक यात्रा के दौरान साफ और स्वच्छ ’बेडरोल’ मुहैया करती है। प्रत्येक बेडरोल में दो चादर, एक तकिया कवर और एक तौलिया होता है।
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कंबल की चादर को प्रत्येक इस्तेमाल के बाद धोया जाता है
उन्होंने कहा कि एक चादर सीट पर बिछाने के लिए होती है जबकि दूसरी चादर कंबल के अंदर की परत बनाने के लिए होती है ताकि कंबल यात्री के शरीर से सीधे संपर्क में ना रहे। इस कंबल की चादर को प्रत्येक इस्तेमाल के बाद धोया जाता है। वैष्णव ने कहा कि यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए प्रायोगिक पहल के रूप में उत्तर पश्चिम रेलवे द्वारा परिचालित रेलगाड़ियों और कामाख्या एवं हावड़ा के बीच परिचालित वंदे भारत शयनयान गाड़ियों की सभी वातुनुकूलित श्रेणी के यात्रियों को कंबल के कवर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। यात्रियों द्वारा इस पहल की सराहना की गई है।
सभी मशीनीकृत 'लॉन्ड्री' में 'व्हाइटो मीटर' का उपयोग किया जाता है
उन्होंने कहा कि चादरों की सफाई की प्रभावशीलता की जांच के लिए सभी मशीनीकृत 'लॉन्ड्री' में 'व्हाइटो मीटर' का उपयोग किया जाता है। वहीं निगरानी के लिए भारतीय रेल की 'लॉन्ड्री' के चारों ओर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। मंत्री ने बताया कि भारतीय रेल ने पुणे मंडल, मध्य रेलवे और जयपुर एवं जोधपुर मंडल, उत्तर पश्चिम रेलवे में लॉन्ड्री में धुले हुए चादरों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए स्वचालित एआई-कैमरा दाग-धब्बा पहचान प्रौद्योगिकी उपयोग करने की प्रायोगिक परियोजना भी शुरू की है।
