ग्वालियर : अस्पतालों में मरीजों के इलाज से जुड़े रिकॉर्ड और रोजमर्रा के प्रशासनिक कामकाज को डिजिटल बनाने की प्रक्रिया तेज हो रही है। मेडिकल हिस्ट्री, टेस्ट रिपोर्ट और प्रिस्क्रिप्शन जैसे रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने के साथ रजिस्ट्रेशन, अपॉइंटमेंट और बिलिंग जैसी सेवाओं को भी एक ही सिस्टम से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
देश में डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) पर भी काम चल रहा है। इसका मकसद स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित डिजिटल जानकारी के लिए ऐसा ढांचा तैयार करना है, जिसमें अधिकृत स्वास्थ्यकर्मी जरूरत के मुताबिक मरीज से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकें।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक, 22 मार्च 2026 तक देश में 86.96 करोड़ से अधिक आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA) बनाए जा चुके थे। इसी अवधि तक 4.85 लाख से ज्यादा हेल्थ फैसिलिटीज को ABDM की हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री में जोड़ा जा चुका था।
हालांकि, अस्पताल को डिजिटल बनाने का मतलब केवल पुराने कागजी रिकॉर्ड को कंप्यूटर में दर्ज करना नहीं है। अस्पतालों में अलग-अलग काम के लिए अलग सिस्टम इस्तेमाल होने पर जानकारी को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना और उसे व्यवस्थित रखना मुश्किल हो सकता है। छोटे और मध्यम अस्पतालों के सामने संसाधनों और तकनीकी प्रबंधन की चुनौती अपेक्षाकृत ज्यादा हो सकती है।
ग्वालियर में Qorlia नाम का सॉफ्टवेयर पेश किया गया है। कंपनी के अनुसार, इसका इस्तेमाल मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड के साथ अस्पताल के विभिन्न प्रशासनिक कार्यों को डिजिटल तरीके से मैनेज करने के लिए किया जा सकता है।
कागजी रिकॉर्ड से डिजिटल मेडिकल हिस्ट्री तक
अस्पतालों में मरीजों के पुराने रिकॉर्ड को लंबे समय तक संभालकर रखना आसान काम नहीं है। इसके लिए दस्तावेजों को सुरक्षित रखने की जगह, उन्हें व्यवस्थित करने के लिए स्टाफ और लगातार रखरखाव की जरूरत होती है। मरीज के स्तर पर भी पुरानी जांच रिपोर्ट और प्रिस्क्रिप्शन को संभालकर रखना कई बार मुश्किल होता है।
कंपनी के मुताबिक, Qorlia में मरीज की बीमारी की हिस्ट्री, इलाज, जांच रिपोर्ट और दूसरे मेडिकल रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में दर्ज करने की सुविधा है। जरूरत पड़ने पर अधिकृत डॉक्टर इन जानकारियों को देख सकते हैं। कंपनी के डायरेक्टर और टेक लीड आशुतोष सक्सेना के अनुसार, प्लेटफॉर्म पर मरीज के लिए एक डिजिटल आईडी बनाई जाती है। कंपनी का कहना है कि इसे आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के इकोसिस्टम से जोड़ा जा सकता है।
डिजिटल हेल्थ व्यवस्था में अलग-अलग स्वास्थ्य सेवाओं के बीच मरीज से संबंधित जानकारी को सुरक्षित तरीके से उपलब्ध कराना एक महत्वपूर्ण पहलू है। ABDM भी इसी तरह के डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है।
छोटे और मध्यम अस्पतालों की जरूरत पर फोकस
बड़े अस्पतालों और हॉस्पिटल चेन में डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल पहले से काफी आम है। इसके मुकाबले छोटे और मध्यम अस्पतालों के लिए अलग-अलग सॉफ्टवेयर खरीदना, उन्हें आपस में जोड़ना और उनका संचालन करना अतिरिक्त चुनौती हो सकता है।
गजरा राजा मेडिकल कॉलेज के डीन और ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ Dr RKS Dhakad ने अस्पतालों में कागजी रिकॉर्ड को लंबे समय तक व्यवस्थित रखने की चुनौती का जिक्र किया। उनके मुताबिक, ऐसे रिकॉर्ड को संभालने में अस्पताल के संसाधनों का एक हिस्सा लगातार खर्च होता है।
इलाज प्रक्रिया होगी डिजिटल
हेल्थकेयर में डिजिटल बदलाव अब सिर्फ मेडिकल रिकॉर्ड को कंप्यूटर पर सुरक्षित रखने तक सीमित नहीं है। अस्पतालों में मरीज के आने से लेकर उसके इलाज और डिस्चार्ज तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल सिस्टम से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
