इसे कहते हैं देवी-देवताओं का 'रक्त' ! दुनिया में दुर्लभ लेकिन है लाइफ सेविंग

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Nov 16, 2022, 05:53 PM IST

Golden Blood Group: गोल्डेन ब्लड को Rhnull कहा जाता है। क्योंकि ये ब्लड उसी शख्स के शरीर में पाया जाता है, जिनका Rh फैक्टर null होता है। ग्रीक मान्यताओं में गोल्डेन ब्लड की खासियत की वजह से, इसे देवी-देवताओं में पाए जाने वाले ब्लड के रूप में देखा जाता था।

KEY HIGHLIGHTS
  • Rhnull ग्रुप की एक खासियत यह भी है कि यह किसी को भी दिया जा सकता है।
  • साल 1961 में पहली बार ऑस्ट्रेलियाई की एक आदिवासी महिला के शरीर में गोल्डेन ब्लड ग्रुप पाया गया था।
  • आम तौर में इंसानों में A,B,AB,0 ग्रुप के पॉजिटिव और निगेटिव ब्लड ग्रुप पाए जाते हैं।

Golden Blood Group:दुनिया की आबादी 800 करोड़ पहुंच गई है। अभी तक की सबसे अधिक आबादी वाली दुनिया में भी कुछ दुर्लभ चीजें ऐसी हैं, जो बेहद कम लोगों को प्रकृति के तरफ से मिली हैं। ऐसा ही एक ब्लड ग्रुप , गोल्डेन ब्लड ग्रुप है। जो दुनिया में केवल 43 लोगों के पास है। उससे भी आश्चर्य की बात है केवल 9 लोग ऐसे हैं, जो इस ब्लड ग्रुप को डोनेट करने के लिए एक्टिव हैं। ऐसे में इस ब्लड ग्रुप को कई उप नाम भी मिल चुके हैं। दुर्लभ होने की वजह से इसे गोल्डेन ब्लड ग्रुप कहा जाता है। वहीं इसे देवी-देवताओं का खून भी कहा जाता है। तो आइए जानते हैं कि क्या होता है गोल्डेन ब्लड ग्रुप..

golden blood

जानें क्या होता है गोल्डेन ब्लड

क्या है गोल्डेन ब्लड ग्रुप

डिस्कवरी डॉट कॉम की रिपोर्ट के अनुसार गोल्डेन ब्लड को Rhnull कहा जाता है। क्योंकि ये ब्लड उसी शख्स के शरीर में पाया जाता है, जिनका Rh फैक्टर null होता है। हमारे शरीर में खून रेड ब्लड सेल, व्हाइट ब्लड सेल और प्लेटलेट्स के जरिए बना होता है। आम इंसान के शरीर में ये Rh या तो पॉजिटव होता है या तो नेगेटिव होता है। लेकिन, जिस इंसान की शरीर में Rh न तो पॉजिटिव होता है और न ही नेगेटिव होता है, तो उसका ब्लड ग्रुप Rhnull हो जाता है। साल 1961 में पहली बार ऑस्ट्रेलियाई की एक आदिवासी महिला के शरीर में गोल्डेन ब्लड ग्रुप पाया गया था।

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